क्या खत्म हो गया ईरान का न्यूक्लियर सपना? परमाणु कार्यक्रम बंद करने पर भरी हामी! अमेरिका के दावे से हलचल
व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार ईरान ने एक ऐसे समझौते पर सहमति जताई है, जिसके तहत वह अपने परमाणु कार्यक्रम को खत्म करेगा और उससे जुड़े परमाणु सामग्री को भी नष्ट करेगा. अगर यह समझौता पूरी तरह लागू होता है तो इससे क्षेत्र में तनाव कम हो सकता है और वैश्विक स्तर पर भी इसका बड़ा असर देखने को मिल सकता है. हालांकि दोनों देशों की ओर से समझौते को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं.

Iran Nuclear Deal Closed: अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत अब एक अहम मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है. व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार ईरान ने एक ऐसे समझौते पर सहमति जताई है, जिसके तहत वह अपने परमाणु कार्यक्रम को खत्म करेगा और उससे जुड़े परमाणु सामग्री को भी नष्ट करेगा.
अगर यह समझौता पूरी तरह लागू होता है तो इससे क्षेत्र में तनाव कम हो सकता है और वैश्विक स्तर पर भी इसका बड़ा असर देखने को मिल सकता है. हालांकि दोनों देशों की ओर से समझौते को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं. ऐसे में दुनिया की नजर अब इस बात पर टिकी है कि आगे इस डील को किस तरह लागू किया जाता है.
क्या है पूरा समझौता?
ET की रिपोर्ट के अनुसार व्हाइट हाउस के अधिकारी के ने बताया कि ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने और परमाणु सामग्री को नष्ट करने पर सहमति दी है. इसके अलावा ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक होरमुज स्ट्रेट को भी खोलने का वादा किया है. यह रास्ता वैश्विक तेल व्यापार के लिए बेहद अहम माना जाता है.
तुरंत नहीं मिलेगा पैसा
रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका ने साफ कर दिया है कि ईरान को उसके जमे हुए फंड या धनराशि तब तक नहीं दी जाएगी, जब तक वह समझौते में किए गए अपने वादों को पूरा नहीं करता.
अमेरिकी अधिकारियों ने इस व्यवस्था को “परफॉर्मेंस आधारित समझौता” बताया है. यानी पहले ईरान को अपनी जिम्मेदारियां पूरी करनी होंगी, उसके बाद ही उसे आर्थिक राहत मिल सकेगी.
क्यों है यह डील अहम?
- ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर कई सालों से विवाद चल रहा है.
- अमेरिका और कई पश्चिमी देशों को डर था कि इस कार्यक्रम का इस्तेमाल भविष्य में परमाणु हथियार बनाने के लिए किया जा सकता है.
- दूसरी ओर ईरान लगातार कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल शांति और ऊर्जा जरूरतों के लिए है.
आगे क्या होगा?
फिलहाल इस समझौते को लेकर कई सवाल बने हुए हैं. दोनों देशों की ओर से अलग-अलग बातें सामने आ रही हैं और अभी कई डिटेल्स सार्वजनिक नहीं किए गए हैं. फिर भी यदि यह समझौता सफल रहता है तो इससे अमेरिका और ईरान के रिश्तों में सुधार आ सकता है. साथ ही वेस्ट एशिया में लंबे समय से जारी तनाव को कम करने की दिशा में भी यह एक बड़ा कदम साबित हो सकता है.
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