Trump-Xi Summit: ट्रेड, ताइवान, AI और ईरान समेत कई मुद्दों पर बातचीत, दोनों नेता चाहते हैं टकराव के बिना कॉम्पिटिशन

असहमति के बावजूद, ट्रंप और शी ने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि आपसी प्रतिद्वंद्विता को खुले टकराव में बदलने से रोकना जरूरी है. शी ने बैठक का उपयोग वाशिंगटन से ताइवान की स्वतंत्रता पर सख्त रुख अपनाने की सीधी अपील करने के लिए किया.

शी जिनपिंग और ट्रंप Image Credit: PTI

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने गुरुवार को व्हाइट हाउस में बातचीत की, जिसमें ताइवान, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ट्रेड, ईरान और व्यापक रणनीतिक प्रतिस्पर्धा पर असहमति को दूर करते हुए दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच संबंधों को स्थिर करने की कोशिश की गई. ट्रंप ने कहा कि दोनों पक्षों ने जबरदस्त प्रगति की है, जबकि शी जिनपिंग ने बेहतर संवाद की जरूरत पर जोर दिया और चेतावनी दी कि टकराव से दोनों देशों को नुकसान होगा.

शी ने ट्रंप से कहा ताइवान की आजादी का करें विरोध

शी ने बैठक का उपयोग वाशिंगटन से ताइवान की स्वतंत्रता पर सख्त रुख अपनाने की सीधी अपील करने के लिए किया. चीन की आधिकारिक शिन्हुआ न्यूज एजेंसी के अनुसार, शी ने ट्रंप से ताइवान की स्वतंत्रता का विरोध करने की सही स्थिति का पालन करने’ का आग्रह किया.व्हाइट हाउस ने ट्रंप की प्रतिक्रिया को स्पष्ट करते हुए तुरंत कोई डिटेल्स जारी नहीं किया.

शी ने ताइवान को व्यापक रणनीतिक सहयोग से जोड़ा

शी ने इस प्रश्न को अमेरिका-चीन संबंधों की व्यापक स्थिरता से जोड़ते हुए अमेरिका से ताइवान मुद्दे को ‘विवेक से’ संभालने का भी आग्रह किया. शिन्हुआ के अनुसार, शी ने कहा, ‘ताइवान मुद्दे को विवेक से संभालने से चीन और अमेरिका के बीच रणनीतिक सहयोग के लिए एक ठोस आधार तैयार होगा.’ बीजिंग, ताइवान को एक मुख्य संप्रभुता का मुद्दा मानता है, जबकि वाशिंगटन ताइवान स्ट्रेट में यथास्थिति में एकतरफा बदलाव के खिलाफ अपना लॉन्ग टर्म स्टेटस बरकरार रखता है.

ताइवान पर ट्रंप का रुख

बैठक के बाद अपनी औपचारिक टिप्पणी में ट्रंप ने ताइवान का जिक्र नहीं किया और अमेरिकी नीति में बदलाव की कोई सार्वजनिक घोषणा नहीं की गई. फिर भी इस मुद्दे का महत्व इसलिए बढ़ गया है, क्योंकि ट्रंप ने ताइवान के लिए नियोजित 14 अरब डॉलर के हथियार पैकेज में देरी की है और पहले इस सौदे को ‘एक बहुत अच्छी बातचीत की चिप’ बताया था.

नई प्रतिबद्धता के अभाव का मतलब है कि शिखर सम्मेलन ने वाशिंगटन की ताइवान नीति में सार्वजनिक रूप से घोषित बदलाव नहीं किया.

AI को मानव नियंत्रण में रहना चाहिए

एआई सबसे स्पष्ट क्षेत्रों में से एक था जहां दोनों नेताओं ने अपने अलग-अलग नजरिया रखा. शी ने कहा, ‘चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका दोनों आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में अग्रणी देश हैं’. उन्होंने कहा कि हमारे पास एआई को हमेशा के लिए डेवलप करने और प्रबंधित करने की क्षमता और जिम्मेदारी दोनों है. यह सुनिश्चित करना है कि एआई का विकास हमेशा मानव नियंत्रण में हो.’

AI पर ट्रंप का रुख

शिखर सम्मेलन से पहले ट्रंप ने कहा कि सुपर इंटेलिजेंस पर चर्चा की जाएगी, लेकिन उन्होंने कहा कि वह ‘इसे वहीं छोड़ना चाहते हैं जहां यह है.’ चीन की भी यही स्थिति है. हमारी रेलिंग डीओजे है. ये टिप्पणियां एआई के प्रबंधन और इसके विकास पर मनुष्यों को नियंत्रण में रखने पर शी के जोर के विपरीत थीं.

अमेरिका और ईरान संघर्ष

शी ने ट्रंप के साथ अपनी चर्चा में ईरान संघर्ष को शामिल किया और वाशिंगटन और तेहरान से बातचीत के जरिए अपने मतभेदों को सुलझाने का आग्रह किया. सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, चीनी राष्ट्रपति ने अमेरिका और ईरान से बातचीत के माध्यम से मुद्दों को जल्द से जल्द हल करने का आग्रह किया.

अमेरिका-चीन व्यापार संघर्ष विराम को दो महीने का समय

शिखर सम्मेलन का सबसे ठोस आर्थिक परिणाम मौजूदा व्यापार संघर्ष विराम को 10 जनवरी तक बढ़ाना था. ट्रंप ने कहा कि दोनों पक्षों ने अपनी अर्थव्यवस्थाओं के सामने आने वाले मुद्दों पर ‘जबरदस्त प्रगति’ की है, जिसमें अमेरिकी किसानों और पशुपालकों के लिए चीनी बाजार तक पहुंच बढ़ाने के प्रयास भी शामिल हैं.

रेयर अर्थ और टेक्नोलॉजी

ट्रेड ट्रूस (व्यापारिक युद्धविराम) से टेक्नोलॉजी और जरूरी मिनरल्स को लेकर चल रही गहरी रणनीतिक प्रतिस्पर्धा खत्म नहीं होती है. बातचीत में चीन का रेयर-अर्थ सप्लाई चेन पर कंट्रोल एक अहम ताकत के तौर पर उभरा है, जबकि एडवांस्ड सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी पर वॉशिंगटन की पाबंदियां बीजिंग के लिए बड़ी चिंता का विषय बनी हुई हैं.

ये मुद्दे ट्रेड पॉलिसी को सीधे तौर पर दोनों देशों के बीच इंडस्ट्रियल क्षमता, AI और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर चल रही व्यापक प्रतिस्पर्धा से जोड़ते हैं.

दोनों नेता टकराव के बिना चाहते हैं कॉम्पिटिशन

असहमति के बावजूद, ट्रंप और शी ने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि आपसी प्रतिद्वंद्विता को खुले टकराव में बदलने से रोकना जरूरी है. शी ने कहा कि टकराव की स्थिति में ‘दोनों देशों का नुकसान होगा’ और उन्होंने व्यापार, फाइनेंस और विदेश मामलों पर बेहतर बातचीत की जरूरत पर जोर दिया.

उन्होंने दोनों पक्षों से यह भी कहा कि वे ‘मतभेदों को एक तरफ रखकर आपसी सहमति के बिंदु तलाशें’ और लगातार बातचीत के जरिए आपसी भरोसा बढ़ाएं.

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