चंद्रशेखरन की नियुक्ति सही, टाटा संस ने नोएल की आपत्तियों को खारिज किया, क्या है चेयरमैन चुनने की प्रक्रिया?

Tata Sons IPO: चंद्रशेखरन के डायरेक्टर बने रहने के मामले पर कंपनी ने कहा कि कंपनीज एक्ट, 2013 की धारा 152 के तहत एक आम बैठक बुलाई जाएगी. यह असहमति तब सामने आई है जब टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के बीच होल्डिंग कंपनी के रेगुलेटरी स्टेटस और संभावित लिस्टिंग को लेकर मतभेद हैं.

टाटा समूह में चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति को लेकर विवाद.

Highlights

  • नए चेयरमैन के चयन की एक विशेष प्रक्रिया बताई गई है.
  • कंपनी ने कहा कि टाटा संस बोर्ड ने बहुमत से इस प्रस्ताव को मंजूरी दी थी.
  • 18 अगस्त को बुलाई गई सालाना आम बैठक (AGM) स्थगित कर दी गई थी.

Tata Sons IPO: टाटा संस ने टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा से कहा कि चेयरमैन के तौर पर एन. चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति सही थी और इस कदम पर उनकी आपत्तियों को खारिज कर दिया. कंपनी ने कहा कि टाटा संस बोर्ड ने बहुमत से इस प्रस्ताव को मंजूरी दी थी. इसलिए नोएल टाटा द्वारा बताए गए ‘आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन’ (AoA) के तहत खास प्रक्रिया मौजूदा चेयरमैन की दोबारा नियुक्ति पर लागू नहीं होती.

दो मुद्दों पर विवाद

यह चिट्ठी 17 सितंबर को हुई टाटा संस बोर्ड की बैठक के एक हफ्ते बाद आई है. इस बैठक में दो अहम मुद्दों- चेयरमैन के तौर पर चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति और कंपनी की लिस्टिंग- पर विवाद हुआ था. नोएल टाटा ने इन दोनों का विरोध किया था, जबकि बाकी डायरेक्टरों ने इनका समर्थन किया था.

600 पन्नों का डॉक्यूमेंट्स

ईटी के अनुसार, 24 सितंबर के पत्र में टाटा संस ने नोएल टाटा से कहा, ‘बोर्ड ने बहुमत के प्रस्ताव से लागू कानून और कंपनी के AoA के अनुसार, मौजूदा कार्यकाल खत्म होने पर एन. चंद्रशेखरन को चेयरमैन के तौर पर दोबारा नियुक्त करने का सही फैसला लिया है.’

कंपनी ने कहा कि उसने नियमों (आर्टिकल्स) की व्याख्या कानूनी सलाह के आधार पर की है. मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि टाटा संस ने टाटा ट्रस्ट्स को सेंट्रल बैंक के साथ हुई बातचीत से जुड़े 600 पेज के दस्तावेज भी सौंपे हैं.

कानूनी राय ली गई

उन्होंने बताया कि यह कदम नोएल टाटा की उस मांग के बाद उठाया गया है, जिसमें उन्होंने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के साथ टाटा संस के उस पत्राचार को देखने की अनुमति मांगी थी. यह होल्डिंग कंपनी द्वारा कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी के तौर पर अपना रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने के आवेदन से जुड़ा था.

यह विवाद आंशिक रूप से आर्टिकल 118 पर केंद्रित है, जिसमें नए चेयरमैन के चयन की एक विशेष प्रक्रिया बताई गई है. यह प्रक्रिया तब लागू होती है, जब टाटा ट्रस्ट्स के पास सामूहिक रूप से कंपनी की पेड-अप ऑर्डिनरी शेयर कैपिटल का कम से कम 40 फीसदी हिस्सा होता है. पेड-अप ऑर्डिनरी शेयर कैपिटल का मतलब है, कंपनी के सामान्य (Ordinary) शेयरों के बदले शेयरधारकों से वास्तव में प्राप्त की गई रकम.

चेयरमैन चुनने की प्रक्रिया

इस प्रावधान के तहत, चेयरमैन के तौर पर नियुक्ति के लिए किसी व्यक्ति को चुनने के लिए एक चयन समिति बनाई जाती है. इस समिति में तीन लोग शामिल होते हैं जिन्हें संयुक्त रूप से सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट द्वारा नॉमिनेट किया जाता है. एक व्यक्ति बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स द्वारा और उनके बीच से नॉमिनेट किया जाता है और एक स्वतंत्र बाहरी व्यक्ति को बोर्ड द्वारा चुना जाता है.

बोर्ड, आर्टिकल 121 के अधीन रहते हुए, समिति द्वारा अनुशंसित व्यक्ति को नियुक्त कर सकता है. आर्टिकल में यह भी कहा गया है कि मौजूदा चेयरमैन को हटाने के लिए भी इसी प्रक्रिया का पालन किया जाएगा. हालांकि, टाटा संस ने कहा कि यह प्रावधान चंद्रशेखरन के मामले पर लागू नहीं होता है.

चंद्रा के पक्ष में क्या है?

कंपनी ने कहा, ‘आर्टिकल ऑफ एसोसिएशन के आर्टिकल 118 के तहत प्रक्रिया नए चेयरमैन की पहली नियुक्ति से संबंधित है, न कि मौजूदा चेयरमैन की दोबारा नियुक्ति से.’

टाटा संस ने कहा कि बोर्ड इस बात पर सहमत हुआ था कि बहुमत के फैसले का समर्थन करने वाली कानूनी राय को प्रेस रिलीज जारी करने से पहले सर्कुलेट किया जाएगा. कंपनी ने बताया कि सहमति के अनुसार सीनियर एडवोकेट सुदीप्तो सरकार की राय सर्कुलेट की गई थी. नोएल टाटा ने इन बिंदुओं पर आपत्ति जताई थी.

नोएल टाटा द्वारा यह मुद्दा उठाए जाने के बाद, टाटा संस ने कहा कि उसने भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश उदय ललित और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज बी.एन. श्रीकृष्ण से राय मांगी थी.

टाटा संस ने कहा, ‘इन्होंने भी वही राय व्यक्त की है जो सुदीप्तो सरकार की थी और इस तरह बैठक में पारित प्रस्ताव की वैधता की पुष्टि करते हैं.’ कंपनी ने यह भी कहा कि दोनों राय की कॉपियां पत्र के साथ अटैच की गई थीं.

स्थगित कर दी गई थी एजीएम

पत्र में कंपनी की सालाना आम बैठक (AGM) के मामले का भी जिक्र किया गया, जो 18 अगस्त को बुलाई गई थी लेकिन कोरम की कमी के कारण स्थगित कर दी गई थी. टाटा संस ने कहा कि बैठक को स्थगित करना पड़ा, क्योंकि टाटा ट्रस्ट्स, आर्टिकल ऑफ एसोसिएशन के आर्टिकल 86 के तहत जरूरी संयुक्त अधिकृत प्रतिनिधि को नॉमिनेट नहीं कर पाए.

आर्टिकल 86 के अनुसार, आम बैठक के लिए कोरम तब तक पूरा नहीं माना जाता जब तक कि जरूरी सदस्य व्यक्तिगत रूप से मौजूद न हों, जिसमें सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट द्वारा संयुक्त रूप से नॉमिनेट किया गया कम से कम एक अधिकृत प्रतिनिधि शामिल हो.

टाटा संस ने इस सुझाव को खारिज कर दिया कि 17 सितंबर के बोर्ड प्रस्ताव को AGM (जो कोरम की कमी के कारण स्थगित हो गई थी) से जोड़ा जाना चाहिए. कंपनी ने ऐसी बात को पूरी तरह से बेबुनियाद बताया.

कंपनीज एक्ट के तहत बुलाई जाएगी बैठक

चंद्रशेखरन के डायरेक्टर बने रहने के मामले पर कंपनी ने कहा कि कंपनीज एक्ट, 2013 की धारा 152 के तहत एक आम बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें शेयरहोल्डर उनके बने रहने पर विचार करेंगे. इस पत्र पर टाटा संस के कंपनी सेक्रेटरी सुप्रकाश मुखोपाध्याय के साइन थे और इसकी कॉपी टाटा संस के सभी डायरेक्टरों को भेजी गई थी.

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यह असहमति तब सामने आई है जब टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के बीच होल्डिंग कंपनी के रेगुलेटरी स्टेटस और संभावित लिस्टिंग को लेकर मतभेद हैं. यह घटनाक्रम RBI के 11 सितंबर के उस फैसले के बाद हुआ है, जिसमें उसने टाटा संस की कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी के तौर पर अपना रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने की अपील को खारिज कर दिया.

इसके अलावा उसे NBFC-अपर लेयर के तौर पर काम जारी रखने को कहा. इस फैसले का मतलब है कि टाटा संस को लिस्टिंग से जुड़ी रेगुलेटरी जरूरतों का पालन करना होगा.