व्हील नट टाइट करने का क्या है सही तरीका? छोटी गलती से हो सकता है बड़ा नुकसान; टायर बदलते समय रखें ध्यान

कार का टायर बदलते समय व्हील नट को सही तरीके से टाइट करना बेहद जरूरी होता है. ऑटो एक्सपर्ट्स के अनुसार व्हील नट हमेशा क्रॉस पैटर्न में टाइट किए जाने चाहिए. अगर नट को क्रम से एक ही लाइन में टाइट किया जाता है तो रिम पर दबाव बराबर नहीं पड़ता, जिससे गाड़ी चलाते समय वाइब्रेशन की समस्या हो सकती है.

व्हील नट टाइट करने का तरीका Image Credit: AI/canva

Wheel Nut Tightening: कार का टायर बदलते समय अक्सर लोग एक छोटी लेकिन बेहद महत्वपूर्ण तकनीक को नजरअंदाज कर देते हैं. व्हील नट को किसी भी क्रम में टाइट करना गाड़ी के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है. ऑटो एक्सपर्ट्स के अनुसार व्हील नट हमेशा क्रॉस पैटर्न में ही टाइट किए जाने चाहिए. अगर नट को एक ही लाइन में क्रम से टाइट किया जाता है, तो रिम पर दबाव बराबर नहीं पड़ता. इससे गाड़ी चलाते समय वाइब्रेशन पैदा हो सकता है और टायर समय से पहले घिसने लगते हैं.

गलत तकनीक से खराब हो सकते हैं हब और ब्रेक सिस्टम

ऑटो एक्सपर्ट्स के मुताबिक कई बार गलत तरीके से टायर फिट करने के कारण व्हील हब और ब्रेक डिस्क भी खराब हो सकते हैं. अगर व्हील नट सही तरीके से टाइट नहीं किए जाते, तो ब्रेक डिस्क में वॉरपेज यानी टेढ़ापन आ सकता है. ऐसे में ब्रेकिंग के दौरान कंपन महसूस होने लगता है और बाद में डिस्क बदलवाने तक की नौबत आ सकती है.

क्रॉस पैटर्न से बराबर रहता है दबाव

क्रॉस पैटर्न में नट टाइट करने से रिम पूरी तरह व्हील हब पर सही तरीके से बैठता है. इससे सभी बोल्ट्स पर दबाव बराबर पड़ता है और गाड़ी का पहिया संतुलित रहता है. यह तकनीक न केवल टायर और रिम की उम्र बढ़ाती है बल्कि ब्रेक सिस्टम को भी सुरक्षित रखती है.

तेज रफ्तार में वाइब्रेशन बन सकता है खतरा

अगर व्हील सही तरीके से फिट नहीं होता, तो तेज रफ्तार पर स्टेयरिंग में कंपन महसूस हो सकता है. कई मामलों में यही समस्या आगे चलकर बड़े हादसे का कारण भी बन सकती है. इसलिए टायर बदलवाते समय यह जरूर सुनिश्चित करें कि व्हील नट क्रॉस पैटर्न में ही टाइट किए जाएं.

छोटी जानकारी, बड़ी बचत

विशेषज्ञों का कहना है कि कई लोग वाइब्रेशन की समस्या आने पर सीधे टायर या ब्रेक बदलवा देते हैं, जबकि असली वजह गलत तरीके से टाइट किए गए व्हील नट होते हैं. ऐसी छोटी-छोटी तकनीकी बातों का ध्यान रखकर न केवल गाड़ी की उम्र बढ़ाई जा सकती है बल्कि हजारों रुपये के अनावश्यक खर्च से भी बचा जा सकता है.

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