Honda ने Tata से मिलाया हाथ, 2028 में आएगी नई कारों की रेंज
Honda Motor ने नई कारों का प्लेटफॉर्म तैयार करने के लिए Tata Technologies को जिम्मेदारी दी है. इस प्लेटफॉर्म से पेट्रोल, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक कारें विकसित की जाएंगी. Honda भारत में 2028 से नई कारों की रेंज पेश करने की तैयारी कर रही है.

Honda Motor ने नए व्हीकल प्लेटफॉर्म को विकसित करने की जिम्मेदारी Tata Technologies को दी है. इस प्लेटफॉर्म पर पेट्रोल, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक कारें तैयार की जा सकेंगी. भारत में घटती बाजार हिस्सेदारी के बीच कंपनी 2028 से नई कारें लाने की तैयारी कर रही है.
पहली बार भारतीय कंपनी को मिली बड़ी जिम्मेदारी
जापान की वाहन कंपनी Honda Motor ने अपने नए व्हीकल प्रोग्राम के विकास के लिए Tata Technologies के साथ साझेदारी की है. मामले से जुड़े लोगों के मुताबिक, Honda पहली बार किसी भारतीय इंजीनियरिंग सर्विस कंपनी को एक पूरे व्हीकल प्लेटफॉर्म को शुरू से अंत तक तैयार करने की जिम्मेदारी दे रही है. इससे कंपनी को कारों के विकास की लागत और समय दोनों कम करने में मदद मिल सकती है.
नया प्लेटफॉर्म कई अलग-अलग कार मॉडल के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा. इसमें पारंपरिक पेट्रोल-डीजल इंजन वाली कारों के साथ-साथ हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक पावरट्रेन को भी सपोर्ट करने की क्षमता होगी. हालांकि, इस प्लेटफॉर्म पर तैयार होने वाली कारों को किन बाजारों में बेचा जाएगा, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है.
Honda की रणनीति में बड़ा बदलाव
Honda आमतौर पर अपने प्रमुख व्हीकल प्लेटफॉर्म का विकास खुद या अपने पुराने सप्लायर नेटवर्क के जरिए करती रही है. ऐसे में Tata Technologies को यह जिम्मेदारी देना कंपनी की रणनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है.
Honda इस समय अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में बदलाव कर रही है. कंपनी ने 1948 में स्थापना के बाद पहली बार सालाना घाटा दर्ज किया है. इसके बाद Honda ने कुछ इलेक्ट्रिक वाहन प्रोजेक्ट को रोकने और लागत कम करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं. कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि Honda अपनी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत करने के लिए अलग-अलग बाहरी साझेदारियों की संभावनाओं पर विचार करती रहती है.
भारत में Honda की स्थिति कमजोर
भारत Honda के लिए अहम बाजार है, लेकिन यहां कंपनी की स्थिति पिछले कुछ वर्षों में कमजोर हुई है. Honda के पास फिलहाल सीमित और अपेक्षाकृत पुराना कार पोर्टफोलियो है. इसके चलते कंपनी Maruti Suzuki और Toyota जैसे प्रतिद्वंद्वियों से पीछे है.
भारत में Honda की बाजार हिस्सेदारी एक दशक पहले करीब 7% थी, जो अब घटकर 2% से भी कम रह गई है. कंपनी फिलहाल भारत में बैटरी इलेक्ट्रिक कार नहीं बेचती, जबकि Tata Motors और Mahindra जैसे घरेलू वाहन निर्माता कई इलेक्ट्रिक मॉडल पेश कर चुके हैं.
भारत बन रहा ग्लोबल इंजीनियरिंग हब
Tata Technologies के साथ Honda की साझेदारी ऑटो सेक्टर में भारत की बढ़ती इंजीनियरिंग क्षमता को भी दिखाती है. Mercedes-Benz, BMW और दूसरी वैश्विक वाहन कंपनियां भी कारों के विकास से जुड़े काम भारतीय इंजीनियरिंग कंपनियों को दे रही हैं. इससे कंपनियों को लागत कम करने और नई कारों को तेजी से विकसित करने में मदद मिल रही है. Tata Technologies के CEO Warren Harris ने जुलाई में बताया था कि कंपनी एक प्रमुख जापानी ऑटोमोबाइल कंपनी के साथ पूरे वाहन विकास कार्यक्रम पर काम कर रही है.
2028 से भारत में नई कारें लाएगी Honda
Honda ने भारत के लिए अपनी भविष्य की योजना भी स्पष्ट की है. कंपनी 2028 से भारत में कारों की नई फैमिली पेश करना शुरू करेगी. साथ ही भारत को मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट हब बनाने की योजना है. यहां तैयार होने वाली कारों को लैटिन अमेरिका और दक्षिण-पूर्व एशिया के बाजारों में भी भेजा जा सकता है. Tata Technologies के साथ नई साझेदारी Honda को कम लागत में तेजी से नए मॉडल विकसित करने और भारत में अपनी बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने में मदद कर सकती है.
यह भी पढ़ें- Maruti Brezza vs Scorpio-N: कीमत, पावर और फीचर्स में कौन मारेगा बाजी?