टाटा मोटर्स ने भी बढ़ा दिए वाहनों के दाम, जानें- कौन-कौन सी गाड़ियां हो जाएंगी महंगी

Tata Motors Price Hike: मारुति के बाद टाटा मोटर्स ने अपनी वाहनों की कीमतों में इजाफा किया है. हालांकि, टाटा मोटर्स ने पैसेंजर वाहनों की कीमतों में बढ़ोतरी का फैसला नहीं किया है. जानिए टाटा मोटर्स की कौन सी गाड़ियां आने वाले महीनों में महंगी हो जाएंगी.

टाटा मोटर्स ने वाहनों की कीमतों में किया इजाफा. Image Credit: Getty image

Tata Motors Price Hike: टाटा मोटर्स ने अपनी गाड़ियों की कीमतों में इजाफा करने का ऐलान किया है. एक अप्रैल 2024 से टाटा मोटर्स के कमर्शियल वाहन महंगे हो जाएंगे. कंपनी ने अपने कमर्शियल वाहनों की कीमतों में 2 फीसदी का इजाफा करने का फैसला किया है. कंपनी ने यह फैसला बढ़ती इनपुट लागतों के जवाब में लिया है, जो वैश्विक स्तर पर ऑटोमोटिव उद्योग को प्रभावित कर रही हैं. कीमत में बढ़ोतरी मॉडल और वैरिएंट स्पेस्फिक होगी, जिसका अर्थ है कि वाहन के आधार पर कीमतों में अलग-अलग बढ़ोतरी होगी.

कंपनी ने क्यों लिया कीमतों में इजाफे का फैसला?

कंपनी ने एक्सचेंज फाइलिंग में कहा कि भारत की सबसे बड़ी कमर्शियल वाहन निर्माता कंपनी टाटा मोटर्स ने आज अपनी कमर्शियल वाहनों की रेंज में 2 फीसदी तक की कीमत में इजाफा करने का फैसला किया है. बढ़ी हुई कीमतें एक अप्रैल से लागू होंगी. कीमतों में वृद्धि इनपुट लागत में हुई बढ़ोतरी की भरपाई के लिए की गई है और यह अलग-अलग मॉडल और वैरिएंट के अनुसार अलग-अलग होगी.

मारुति सुजुकी ने दिया झटका! तीसरी बार दाम बढ़ाने का ऐलान, 4% तक महंगी होंगी गाड़ियां

टाटा मोटर्स का नोटिफिकेशन मारुति सुजुकी द्वारा सोमवार को अप्रैल 2025 से अपने वाहनों की कीमतों में 4 फीसदी तक की वृद्धि करने की योजना की घोषणा के कुछ घंटों बाद आई है. हालांकि, टाटा मोटर्स कमर्शियल वाहनों की कीमतों में इजाफा करने की घोषणा की है, जिसमें ट्रक, मिनी ट्रक जैसे वाहन आते हैं.

मारुति ने भी बढ़ा दिए दाम

मारुति ने भी इस कीमतों में इजाफे के पीछे बढ़ती इनपुट लागतों का हवाला दिया है. कंपनी ने कीमतों में इजाफे के पीछे मुख्य कारणों के रूप में बढ़ती इनपुट लागत, ऑपरेशनल एक्सपेंडिचर और मुद्रास्फीति के दबाव का हवाला दिया है. ऑटोमोटिव उद्योग को रॉ मैटेरियल की बढ़ती लागत, बढ़ते लॉजिस्टिक्स खर्च और महंगाई जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है.

मारुति सुजुकी ने कहा कि लागत को अनुकूलित करने और उपभोक्ताओं पर प्रभाव को कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन इन बढ़े हुए खर्चों में से कुछ को अनिवार्य रूप से बाजार पर डालना होगा.

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