5G की रेस से बाहर होगा अडानी ग्रुप ! दो बार लगी पेनाल्टी, रिपोर्ट में दावा

अडानी समूह की टेलीकॉम ब्रांच अडानी डाटा नेटवर्क्स को पिछले साल से अब तक 2 बार पेनलाइज किया जा चुका है. ये फाइन, कंपनी की ओर से खरीदी गई 5G स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल और अपने न्यूनतम रोलआउट से जुड़ी जिम्मेदारियों को पूरा नहीं करने के कारण लगाई गई है.

5G रेस से बाहर हो सकता है अडानी ग्रुप Image Credit: @Money9live

Adani 5G Spectrum: अडानी ग्रुप को देश में 5G सर्विस को शुरू करने के लिए तकरीबन 2 साल पहले लाइसेंस मिल चुका था लेकिन कंपनी ने अभी तक सर्विसेज देनी शुरू नहीं की है. अब इसको लेकर डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकॉम (DoT), अडानी ग्रुप से सवाल कर रहा है. रिपोर्ट की मानें तो कंपनी खरीदे गए स्पेक्ट्रम को आने वाले समय में सरेंडर करने पर भी विचार कर रही है.

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अडानी समूह की टेलीकॉम ब्रांच अडानी डाटा नेटवर्क्स को पिछले साल से अब तक 2 बार पेनलाइज किया जा चुका है. ये फाइन, कंपनी की ओर से खरीदी गई 5G स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल और अपने न्यूनतम रोलआउट से जुड़ी जिम्मेदारियों को पूरा नहीं करने के कारण लगाई गई है. DOT ने कनेक्टिविटी सर्विस को शुरू करने में हो रही देरी को लेकर कंपनी को कई शो कॉज नोटिस भेज चुकी है.

अडानी ने कब खरीदा था स्पेक्ट्रम

अडानी ग्रुप ने वर्ष 2022 की 5G स्पेक्ट्रम नीलामी में 212 करोड़ रुपये में 26 गीगाहर्ट्ज बैंड के 400 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम हासिल किए थे. इसमें गुजरात और मुंबई में 100 MHz और आंध्र प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक और तमिलनाडु में 50-50 MHz शामिल है. अब उसी नीलामी में खरीदे गए 5जी स्पेक्ट्रम को कंपनी सरेंडर कर सकती है. हालांकि कंपनी की ओर से स्पेक्ट्रम सरेंडर करने को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है.

रिपोर्ट के मुताबिक, अडानी ग्रुप आगामी नीलामी में कोई स्पेक्ट्रम नहीं खरीदेगी. इससे साफ समझ आता है कि कंपनी अपनी टेलीकॉम से जुड़ी प्लानिंग को पूरी तरह से खत्म कर सकती है. वहीं, पिछले साल के जून महीने में आयोजित स्पेक्ट्रम नीलामी में अडानी ने हिस्सा नहीं लिया था.

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क्या है नियम?

नीलामी से जुड़ी नियमों के मुताबिक, 26 GHz बैंड का इस्तेमाल करने वाले ऑपरेटरों को एक साल के अंदर अपने लाइसेंस प्राप्त सेवा में कमर्शियल सर्विसेज लॉन्च करनी होती है. इसको लेकर जो न्यूनतम शर्तें पूरी करने का प्रावधान है, उसे नहीं करने पर कंपनी को जुर्माना देना पड़ता है.

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