Gold and Silver Rate Today: सोने-चांदी का जोरदार कमबैक, MCX पर गोल्ड ₹3000 तो सिल्वर ₹7000 से ज्यादा महंगा, चेक करें लेटेस्ट भाव
सोना और चांदी ने 20 मार्च को जोरदार वापसी की, जहां MCX पर गोल्ड 3,000 रुपये से ज्यादा और सिल्वर 7,000 रुपये से ज्यादा महंगा हो गया. वैल्यू बायिंग की वजह से गोल्ड और सिल्वर की कीमतों में तेजी आई है. हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना-चांदी पर दबाव बना रहा. मजबूत डॉलर, अमेरिकी फेड के सख्त रुख और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ाया है.
Gold and Silver Rate Today: बीते तीन दिनों से सोना-चांदी में गिरावट का रुख था. सबसे ज्यादा गिरावट 19 मार्च यानी गुरुवार को दर्ज की गई थी. मगर 20 मार्च, यानी आज कीमती धातुओं ने जोरदार वापसी की. 20 मार्च की सुबह MCX पर गोल्ड में वैल्यू बायिंग देखने को मिली. नतीजतन गोल्ड अप्रैल फ्यूचर्स करीब 2.14 प्रतिशत उछलकर 1,48,302 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया. वहीं MCX सिल्वर मई कॉन्ट्रैक्ट लगभग 3 प्रतिशत से ज्यादा चढ़कर 2,40000 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई.
एक ही झटके में आज सोना करीब 3000 रुपये से ज्यादा महंगा हो गया, वहीं चांदी भी 7000 रुपये से ज्यादा महंगी हो गई. रिटेल मार्केट में भी गोल्ड 3060 रुपये की बढ़त के साथ 148,8850 रुपये प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड करता नजर आया. वहीं चांदी 7220 रुपये चढ़कर 239,270 रुपये प्रतिकिलो पर पहुंच गई.

इंटरनेशनल लेवल पर बड़ी गिरावट
घरेलू बुलियन मार्केट में भले ही सोना-चांदी की कीमतें आज उफान पर हों, लेकिन इंटरनेशनल लेवल पर इन कीमती धातुओं पर काफी ज्यादा दबाव देखने को मिला. स्पॉट गोल्ड 3.38 फीसदी टूटकर 4,725 डॉलर प्रति औंस पर जा पहुंचा, वहीं स्पॉट सिल्वर 4.21 फीसदी गिरकर 74,21 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया.
जानकारों के मुताबिक मजबूत डॉलर और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख ने निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों को कमजोर कर दिया है, जिससे कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ा है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोल्ड लगातार तीसरे हफ्ते गिरावट की ओर बढ़ रहा है. इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल से डॉलर की मांग बढ़ी, क्योंकि तेल का वैश्विक कारोबार बड़े पैमाने पर अमेरिकी डॉलर में होता है.
लॉन्ग टर्म में दिखी मजबूती
जानकारों का कहना है कि सेंट्रल बैंकों की खरीदारी और भू-राजनीतिक कारणों के चलते सोने का मिड से लॉन्ग टर्म का आउटलुक मजबूत बना हुआ है, लेकिन डॉलर की मजबूती और इस साल अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की घटती उम्मीदें कीमती धातुओं के लिए निकट अवधि की बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं.
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