पहली बार रुपया 93 के पार, डॉलर के मुकाबले बड़ी गिरावट; ईरान युद्ध ने बढ़ाया रिस्क

रुपया पहली बार 93 के करीब पहुंचा. डॉलर के मुकाबले गिरावट के पीछे ईरान युद्ध और तेल कीमतों में उछाल बड़ी वजह बनकर सामने आए. कच्चे तेल की कीमतें भी तेजी से बढ़कर करीब 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं. हालांकि बाद में थोड़ी गिरावट आई, लेकिन कीमतें अभी भी ऊंचे स्तर पर हैं.

रुपये में गिरावट जारी Image Credit: money9live.com

Rupee Low: भारतीय रुपये पर इस समय दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है. ग्लोबल स्तर पर बढ़ते तनाव और खासकर वेस्ट एशिया में चल रहे जंग का असर अब सीधे भारतीय अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है. कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने रुपये को कमजोर कर दिया है. शुक्रवार को रुपया डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया. अगर तेल की कीमतें ऐसे ही ऊंची बनी रहती हैं, तो भारत में महंगाई बढ़ सकती है और आर्थिक विकास पर भी असर पड़ सकता है.

रुपया पहुंचा रिकॉर्ड निचले स्तर पर

शुक्रवार को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 93 के पार पहुंच गया, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है. इससे पहले बुधवार को यह 92.63 पर था. लगातार गिरावट यह दिखाती है कि बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है और निवेशकों का भरोसा कमजोर हो रहा है.

सोर्स: Investing.com

तेल की कीमतों ने बढ़ाया दबाव

वेस्ट एशिया में हमलों के बाद कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़कर करीब 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं. हालांकि बाद में थोड़ी गिरावट आई, लेकिन कीमतें अभी भी ऊंचे स्तर पर हैं. भारत जैसे देश, जो तेल आयात करते हैं, उनके लिए यह चिंता की बात है. मार्च महीने में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 8 अरब डॉलर से ज्यादा पैसा निकाल लिया है. यह जनवरी 2025 के बाद सबसे बड़ी बिकवाली मानी जा रही है. इससे भी रुपये पर दबाव बढ़ा है.

अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है असर

अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो इससे महंगाई बढ़ सकती है. साथ ही भारत की आर्थिक विकास दर पर भी असर पड़ सकता है. फिलहाल स्थिति को लेकर चिंता बनी हुई है और आने वाले दिनों में हालात पर नजर रखना जरूरी होगा.

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