ट्रंप ने भारत सहित किन देशों पर कितना लगाया है टैरिफ? अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ठहराया अवैध

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने डोनाल्ड ट्रंप की ओर से राष्ट्रीय आपातकाल के नाम पर लगाए गए वैश्विक टैरिफ को अवैध करार दिया है. भारत समेत 70 से अधिक देशों पर 10 फीसदी से 41 फीसदी तक लगाए गए शुल्क पर यह फैसला बड़ा असर डाल सकता है, जबकि भारत पर पहले 50 फीसदी तक पहुंचा टैरिफ अब 18 फीसदी पर है.

ट्रंप Image Credit: @Money9live

US Trump Tariff and Affected Countries: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक व्यापार नीति को बड़ा झटका लगा है. अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने उन वैश्विक टैरिफ को अवैध ठहरा दिया है, जिन्हें ट्रंप प्रशासन ने राष्ट्रीय आपातकाल के कानून के तहत लागू किया था. यह फैसला ऐसे समय आया है जब ट्रंप ने भारत समेत 70 से अधिक देशों पर 10 फीसदी से 41 फीसदी तक के तथाकथित “रिसिप्रोकल टैरिफ” लागू कर रखे थे और इन्हें व्यापार घाटा कम करने तथा राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर उचित ठहराया था.

किन देशों पर कितना था ट्रंप का टैरिफ?

ट्रंप प्रशासन का तर्क था कि लगातार बढ़ता व्यापार घाटा अमेरिका की आर्थिक स्थिरता और सुरक्षा के लिए खतरा है, इसलिए आयात पर अतिरिक्त शुल्क जरूरी है. इसी आधार पर अलग-अलग देशों पर अलग-अलग दरों से टैरिफ लगाए गए. सूची में सीरिया पर 41 फीसदी, लाओस और म्यांमार पर 40 फीसदी, स्विट्जरलैंड पर 39 फीसदी, कनाडा और इराक जैसे देशों पर 35 फीसदी तक शुल्क रखा गया, जबकि दक्षिण अफ्रीका और अल्जीरिया जैसे देशों पर 30 फीसदी टैरिफ लगाया गया. कई एशियाई देशों- जैसे बांग्लादेश, श्रीलंका, वियतनाम और ताइवान पर 19 फीसदी से 20 फीसदी के बीच शुल्क तय किया गया.

देशटैरिफ दर
सीरिया41%
लाओस40%
म्यांमार (बर्मा)40%
स्विट्जरलैंड39%
कनाडा35%
इराक35%
सर्बिया35%
दक्षिण अफ्रीका30%
अल्जीरिया30%
बोस्निया और हर्जेगोविना30%
लीबिया30%
भारत18% (ट्रेड डील के बाद)
कजाकिस्तान25%
ट्यूनीशिया25%
मोल्डोवा25%
ब्रुनेई25%
बांग्लादेश20%
श्रीलंका20%
ताइवान20%
वियतनाम20%
इंडोनेशिया19%
मलेशिया19%
पाकिस्तान19%
फिलीपींस19%
थाईलैंड19%
कंबोडिया19%
अफगानिस्तान15%
जापान15%
दक्षिण कोरिया15%
इजराइल15%
नॉर्वे15%
न्यूजीलैंड15%
तुर्की15%
यूनाइटेड किंगडम10%
ब्राजील10%

भारत पर भी था 50% टैरिफ

भारत भी इस नीति से अछूता नहीं रहा. पहले भारतीय निर्यात पर अतिरिक्त शुल्क को बढ़ाकर 50 फीसदी तक कर दिया गया था, जिससे द्विपक्षीय व्यापार में तनाव बढ़ गया था. हालांकि, बाद में भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते के ढांचे पर सहमति बनने के बाद यह शुल्क घटाकर 18 फीसदी कर दिया गया. इसके बावजूद भारत पर लागू यह टैरिफ व्यापारिक संबंधों में एक बड़ा मुद्दा बना हुआ था.

कनाडा पर बढ़ाया था टैरिफ

कनाडा पर भी अमेरिका ने सख्त रुख अपनाते हुए पहले 25 फीसदी शुल्क लगाया, जिसे बढ़ाकर 35 फीसदी कर दिया गया. ट्रंप प्रशासन ने इसके पीछे मादक पदार्थों की तस्करी पर पर्याप्त कार्रवाई न करने और अमेरिकी नीतियों के खिलाफ जवाबी कदम उठाने का आरोप लगाया था. यूरोपीय संघ के लिए भी विशेष व्यवस्था बनाई गई, जिसके तहत जिन उत्पादों पर पहले से 15 फीसदी से ज्यादा शुल्क था, उन पर नया टैरिफ नहीं लगाया गया, जबकि कम शुल्क वाले उत्पादों पर दर बढ़ाकर 15 फीसदी कर दी गई.

IEEPA का तर्क- कोर्ट ने नहीं किया स्वीकार

इन व्यापक टैरिफ को लागू करने के लिए ट्रंप ने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का सहारा लिया था और व्यापार घाटे को “राष्ट्रीय आपातकाल” घोषित किया था. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया. अदालत ने कहा कि आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल इतनी व्यापक व्यापार नीति लागू करने के लिए नहीं किया जा सकता. यह मामला उन कंपनियों और 12 अमेरिकी राज्यों की ओर से चुनौती दिए जाने के बाद अदालत तक पहुंचा था, जिन्हें इन शुल्कों से नुकसान हुआ था.

कोर्ट के उलट फैसले पर ट्रंप ने पहले क्या कहा था?

कोर्ट के फैसले को ट्रंप की व्यापार नीति के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. ट्रंप लंबे समय से दावा करते रहे थे कि इन टैरिफ से अमेरिकी इंडस्ट्री को बढ़ावा मिला और घरेलू प्रोडक्शन मजबूत हुआ. उन्होंने पहले चेतावनी भी दी थी कि अगर अदालत ने इन उपायों को खारिज किया, तो यह अमेरिका के लिए “गंभीर नुकसान” होगा. चीन के साथ व्यापार समझौता भी अभी पूरी तरह अंतिम रूप नहीं ले पाया है. दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है और कई दौर की वार्ताओं के बावजूद व्यापक समझौता अधूरा बना हुआ है. ट्रंप प्रशासन ने चीन, कनाडा और मैक्सिको पर भी अलग-अलग कारणों से अतिरिक्त शुल्क लगाए थे, जिनमें मादक पदार्थों की तस्करी जैसे मुद्दे शामिल थे.

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