ATM में कैश पर संकट! कई जगहों पर रोज नहीं पड़ेगा पैसा, लॉजिस्टिक्स कंपनियों की चेतावनी; तेल के दाम का असर
कैश लॉजिस्टिक्स कंपनियों ने चेतावनी दी है कि फ्यूल की बढ़ती कीमतें और न्यूनतम मजदूरी में बढ़ोतरी के कारण कैश से जुड़े कामों की लागत तेजी से बढ़ रही है. कैश सप्लाई में मांग और सप्लाई के बीच के अंतर की वजह से लागत का दबाव और बढ़ गया है.
एटीएम में कैश डालने वाली कंपनियों ने इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) से अधिक चार्ज की मांग की है. ईटी की रिपोर्ट के अनुसार, CMS Info Systems, Brink’s India और SIS Prosegur जैसी कैश लॉजिस्टिक्स कंपनियों ने इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) से संपर्क करके ATM में कैश डालने के लिए ज्यादा चार्ज की मांग की है. कैश लॉजिस्टिक्स कंपनियों ने चेतावनी दी है कि फ्यूल की बढ़ती कीमतें और न्यूनतम मजदूरी में बढ़ोतरी के कारण कैश से जुड़े कामों की लागत तेजी से बढ़ रही है.
बढ़ सकता है ऑपरेशनल खर्च
IBA के चीफ एग्जीक्यूटिव V G Kannan को लिखे एक लेटर में, इंडस्ट्री की सेल्फ-रेगुलेटरी बॉडी, करेंसी साइकिल एसोसिएशन ने कहा कि आने वाले समय में ऑपरेशनल खर्च 15–20 फीसदी तक बढ़ सकते हैं. उन्होंने ATM कैश सर्विस बिना किसी रुकावट के जारी रखने के लिए कीमतों में तुरंत बदलाव करने की मांग की. CCA के सेक्रेटरी जनरल यूएस पालीवाल ने कहा कि फ्यूल महंगा हो गया है.
तेल की बढ़ती कीमतों का असर
करेंसी साइकिल एसोसिएशन के सेक्रेटरी जनरल US पालीवाल ने लिखा, ‘मौजूदा भू-राजनीतिक घटनाओं और ग्लोबल कच्चे तेल के बाजारों में उतार-चढ़ाव की वजह से ईंधन की कीमतें बढ़ गई हैं और लगातार बढ़ रही हैं, जिसका सीधा असर कैश वैन की आवाजाही और रूट पर आने वाले खर्च पर पड़ रहा है. कई अहम राज्यों में न्यूनतम मजदूरी में बढ़ोतरी से कुल ऑपरेशनल खर्च काफी बढ़ गया है. इन घटनाओं के कुल असर से अनुमान है कि आने वाले समय में इंडस्ट्री का कुल खर्च और बढ़ जाएगा.
बढ़ गया है लागत का दबाव
कैश सप्लाई में मांग और सप्लाई के बीच के अंतर की वजह से लागत का दबाव और बढ़ गया है, जिसके चलते कैश भरने के लिए अधिक चक्कर लगाने पड़ रहे हैं. इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के मुताबिक, नवंबर 2025 से मार्च 2026 के बीच ATM में कैश भरने की ट्रिप्स में 11-12 फीसदी की बढ़ोतरी देखी गई, जिससे फ्यूल की लागत में अनुमानित 8–10 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है.
ऐसे ATMs में रोजान नहीं भरे जाएंगे कैश
ईटी ने पालीवाल के हवाले से लिखा कि इंडस्ट्री लागत को कंट्रोल करने के लिए कैश भरने की ट्रिप्स को कम करने के तरीकों पर भी विचार कर रही है. इसके तहत, जिन ATM में रोजाना कैश भरने की जरूरत नहीं होती, वहां हफ्ते में सिर्फ दो या तीन बार ही जाया जा सकता है.
उन्होंने कहा, ‘मान लीजिए हम रोजाना ATM जाते हैं, लेकिन कैश रखने वाली कैसेट में अभी भी 50–60 फीसदी कैश बचा होता है. इसके बजाय, जहां रोजाना कैश भरने की जरूरत होगी, हम वहां ही रोज जाएंगे. जहां जरूरत नहीं होगी वहां हम हफ्ते में दो या तीन बार ही कैश भरेंगे.’
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