तेल बाजार में भूचाल! ब्रेंट क्रूड $95 के पार, $100 तक पहुंचने की आशंका
ब्रेंट क्रूड 95 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है. US-Iran तनाव, होर्मुज स्ट्रेट और Red Sea में बढ़ते सुरक्षा जोखिमों के चलते वैश्विक तेल बाजार में जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मध्य पूर्व में तनाव जारी रहा, तो ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच सकता है.
Brent Crude: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेज उछाल देखने को मिला है. ब्रेंट क्रूड बुधवार को 95 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया, जो 11 जून के बाद पहली बार हुआ है. तेल की कीमतों में यह तेजी ऐसे समय आई है, जब US और Iran के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है. इसके साथ ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और रेड सी में बढ़ते सुरक्षा जोखिमों ने वैश्विक तेल सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है. बाजार में बढ़ते जियोपॉलिटिकल टेंशन के बीच ब्रेंट क्रूड फ्यूचर 4.43 डॉलर यानी 4.87 फीसदी की तेजी के साथ 95.44 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया.
US-Iran वार्ता की उम्मीदों को झटका
तेल की कीमतों में तेजी की सबसे बड़ी वजह US और Iran के बीच कूटनीतिक बातचीत की उम्मीदों का कमजोर पड़ना है. ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी Mehr के मुताबिक, फिलहाल दोनों देशों के बीच कोई औपचारिक वार्ता नहीं चल रही है. ईरान का कहना है कि इस समय केवल संदेशों का आदान-प्रदान ही संभव है. इस बयान के बाद बाजार में यह सेंटिमेंट मजबूत हुआ कि दोनों देशों के बीच तनाव जल्द खत्म होने की संभावना कम है. इसी वजह से निवेशकों ने तेल की खरीद बढ़ा दी.
Donald Trump के बयान से बढ़ी चिंता
इस बीच US के राष्ट्रपति Donald Trump ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान समर्थित हूती विद्रोही रेड सी में जहाजरानी को बाधित करते हैं, तो अमेरिका जवाबी कार्रवाई करेगा. Donald Trump ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े माने जाने वाले पिकऐक्स माउंटेन को भी निशाना बनाने की चेतावनी दोहराई है. इससे मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ गया है.
होर्मुज में बढ़ा खतरा
US Central Command के मुताबिक, अमेरिकी सेना लगातार 11वें दिन ईरानी ठिकानों पर हमले कर रही है. इसका उद्देश्य ईरान की उस क्षमता को कमजोर करना है, जिसके जरिए वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों को खतरे में डाल सकता है.
हालांकि अमेरिकी सेना का कहना है कि फिलहाल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुला हुआ है, लेकिन ईरान की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है. दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी जलमार्ग से होकर गुजरता है. ऐसे में यहां किसी भी तरह की बाधा वैश्विक तेल सप्लाई को प्रभावित कर सकती है.
ऑयल टैंकर्स पर हमलों से बढ़ी चिंता
हाल के दिनों में Oman के पास स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तीन ऑयल टैंकर्स पर हुए हमलों ने बाजार की चिंता और बढ़ा दी है. इसके अलावा Russia के Black Sea तट पर स्थित कैस्पियन पाइपलाइन कंसोर्टियम टर्मिनल पर हुए हमलों ने भी तेल सप्लाई को लेकर जोखिम बढ़ा दिया है. यह पाइपलाइन Kazakhstan के कच्चे तेल के निर्यात का अहम मार्ग है. इन घटनाओं के कारण बाजार को आशंका है कि आने वाले समय में वैश्विक सप्लाई और प्रभावित हो सकती है.
सऊदी अरब के निर्यात पर भी असर
ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के खतरे का असर अब सऊदी अरब के समुद्री तेल निर्यात पर भी दिखाई देने लगा है. कई ऑयल टैंकर्स ने यमन के समुद्री क्षेत्र के पास अपनी गति धीमी कर दी है, जबकि कुछ जहाजों ने अपना रास्ता बदलकर Suez Canal की ओर रुख कर लिया. हालांकि कुछ जहाज अभी भी अपने तय मार्ग पर चल रहे हैं. Joint Maritime Information Center ने चेतावनी दी है कि हूती लड़ाकों ने व्यावसायिक जहाजों पर हमले की तैयारी के लिए मिसाइल और ड्रोन तैनात कर दिए हैं.
100 डॉलर तक पहुंच सकता है ब्रेंट क्रूड
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि मध्य पूर्व में मौजूदा तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो ब्रेंट क्रूड इस साल के अंत तक 100 डॉलर प्रति बैरल का स्तर भी पार कर सकता है. Bernstein के विश्लेषकों का कहना है कि यदि मध्य पूर्व में संघर्ष जारी रहा और OECD देशों में तेल का भंडार लगातार घटता रहा, तो कीमतों में और तेजी आ सकती है. वहीं Goldman Sachs ने भी चेतावनी दी है कि यदि वैश्विक तेल सप्लाई में गंभीर व्यवधान आता है, तो कच्चे तेल की कीमतें फिर से तीन अंकों यानी 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच सकती हैं.
हालांकि बैंक का मानना है कि फिलहाल यह उसका आधारभूत अनुमान नहीं है. फिलहाल पूरी दुनिया की नजर US-Iran तनाव, होर्मुज स्ट्रेट और मध्य पूर्व की स्थिति पर टिकी हुई है, क्योंकि आने वाले दिनों में यही तय करेगा कि कच्चे तेल की कीमतें और कितनी ऊंचाई तक जाती हैं.
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