सरकारी तेल कंपनियों की बल्क डीजल बिक्री में 35% तक की गिरावट, सस्ते फ्यूल के लिए रिटेल पंपों का रुख कर रहे ग्राहक

सरकारी तेल कंपनियां बल्क डीजल की कीमत इंटरनेशनल रेट्स के हिसाब से तय करती हैं, जो अप्रैल के पीक से कम होने के बाद फिर से बढ़ गए हैं. कच्चे तेल की ऊंची कीमतें एक बार फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच रही हैं.

बल्क डीजल बिक्री में गिरावट Image Credit: @Money9live

सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों की बल्क डीजल बिक्री में 25-35% की गिरावट आई, क्योंकि कई बड़े ग्राहक 38-40 रुपये प्रति लीटर का प्रीमियम देने से बचने के लिए रिटेल पंपों का रुख कर रहे हैं. यह मांग में वैसा ही बदलाव है जैसा US-ईरान युद्ध के शुरुआती दौर में देखा गया था. सरकारी तेल कंपनियां बल्क डीजल की कीमत इंटरनेशनल रेट्स के हिसाब से तय करती हैं, जो अप्रैल के पीक से कम होने के बाद फिर से बढ़ गए हैं.

रिटेल कीमतों में अंतर

ईटी की रिपोर्ट्स के अनुसार, अरब गल्फ डीजल, जो इस क्षेत्र का बेंचमार्क है, की औसत कीमत इस महीने 157 डॉलर प्रति बैरल रही है. यह अप्रैल के 188 डॉलर से तो कम है, लेकिन फरवरी के स्तर से लगभग 80 फीसदी ज्यादा है, जिससे रिटेल कीमतों के साथ अंतर बढ़ गया है.

क्यों बढ़ रही हैं कीमतें?

कच्चे तेल की ऊंची कीमतें एक बार फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच रही हैं. इसकी वजह से भी डीजल की कीमतें बढ़ रही हैं, लेकिन रूस और गल्फ में रिफाइनरी आउटपुट का नुकसान एक बड़ा कारण है.

रूसी रिफाइनरियों पर यूक्रेनी ड्रोन हमले हुए हैं, जबकि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के लगभग बंद होने से गल्फ में रिफाइनरी चलाने की दर कम हो गई है. दोनों क्षेत्र डीजल के बड़े सप्लायर हैं और उत्पादन में कमी से ग्लोबल सप्लाई पर दबाव पड़ रहा है.

बल्क और रिटेल डीजल के रेट के बीच अंतर

घरेलू रिफाइनरियों ने मई के बाद से पंप की कीमतें नहीं बढ़ाई हैं, लेकिन वे इंटरनेशनल कीमतों के हिसाब से बल्क डीजल की दरों में बदलाव करती रही हैं. जून में US-ईरान समझौते के बाद ग्लोबल तेल की कीमतों में भारी गिरावट के साथ उन्होंने बल्क दरों में कटौती की थी, लेकिन कीमतें बढ़ने के साथ दरें भी ऊपर जाने लगीं.

बल्क और रिटेल डीजल के बीच का अंतर, जो अगस्त में लगभग 34-35 रुपये प्रति लीटर था, अब बढ़कर 38-40 रुपये हो गया है. मुंबई में बल्क ग्राहकों के लिए डीजल की कीमत लगभग 137 रुपये प्रति लीटर है, जबकि रिटेल पंपों पर यह 97.8 रुपये है.

ईंधन का डायवर्जन

ईंधन के डायवर्जन (इधर-उधर इस्तेमाल) को लेकर चिंताओं के कारण सरकार ने जून में रिटेल पंपों पर डीजल की बिक्री की राशनिंग शुरू कर दी थी. US-ईरान समझौते से ग्लोबल तेल की कीमतें कम होने के बाद इन प्रतिबंधों को जल्द ही हटा लिया गया था.

रिटेल पंपों पर शिफ्ट हो गए ग्राहक

रक्षा, रेलवे और मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों जैसे बड़े इंस्टीट्यूशनल ग्राहक रेगुलर चैनल के जरिए ही खरीदारी कर रहे हैं. हालांकि, छोटे कॉन्ट्रैक्टर, माइनर, सड़क बनाने वाली कंपनियां और अन्य बिजनेस ईंधन की लागत को कम करने और मार्जिन बचाने के लिए रिटेल पंपों पर शिफ्ट हो गए हैं. राज्य सड़क परिवहन निगमों को अभी भी रिटेल रेट पर ही डीजल मिल रहा है.

थोक बिक्री का हिस्सा

युद्ध से पहले भारत में डीजल की कुल खपत में थोक बिक्री का हिस्सा लगभग 12 फीसदी था. 28 फरवरी को शुरू हुए संघर्ष के शुरुआती महीनों में भी रिटेल पंपों की ओर ऐसा ही झुकाव देखा गया. उस समय पंपों पर कीमतें तो नहीं बदलीं, लेकिन ग्लोबल कीमतों के साथ थोक रेट बढ़ गए. मांग में अचानक आए इस बदलाव की वजह से कुछ इलाकों में घबराहट में खरीदारी (पैनिक बाइंग) हुई और कुछ समय के लिए कमी भी देखी गई.

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