Byju’s की मुश्किलें खत्म होने की राह पर? Aakash में 30% हिस्सेदारी लेकर समझौते की तैयारी में कर्जदाता

Byju's और उसके ग्लोबल कर्जदाताओं के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद के खत्म होने की उम्मीद बढ़ गई है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कर्जदाता Aakash Educational Services में 30 फीसदी हिस्सेदारी लेने के बदले बायजू रवींद्रन के खिलाफ सभी कानूनी कार्रवाइयां वापस लेने पर विचार कर रहे हैं. प्रस्तावित समझौते में Aakash का वैल्यूएशन करीब 2 अरब डॉलर बताया गया है.

बायजू Image Credit: GettyImages

Byju’s Settlement: कभी भारत के सबसे बड़े एडटेक स्टार्टअप के रूप में पहचान बनाने वाली Byju’s अब अपनी सबसे बड़ी कानूनी लड़ाई को खत्म करने की दिशा में बढ़ती नजर आ रही है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी के ग्लोबल कर्जदाता Aakash Educational Services में करीब 30 फीसदी हिस्सेदारी लेने के बदले Byju’s के संस्थापक बायजू रवींद्रन के खिलाफ चल रही सभी कानूनी कार्रवाइयों को समाप्त करने पर विचार कर रहे हैं.

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले से जुड़े दो सूत्रों ने बताया कि समझौते को लेकर बातचीत अंतिम चरण में पहुंच चुकी है. यदि यह समझौता पूरा हो जाता है, तो कर्जदाता Byju’s के खिलाफ लगाए गए आरोप वापस ले सकते हैं और भारत, अमेरिका तथा सिंगापुर में चल रहे कानूनी विवाद भी समाप्त हो सकते हैं.

Aakash में 30 फीसदी हिस्सेदारी की मांग

रिपोर्ट के मुताबिक, Byju’s के ग्लोबल कर्जदाता Aakash Educational Services में करीब 30 फीसदी हिस्सेदारी हासिल करना चाहते हैं. बदले में वे कंपनी के संस्थापक बायजू रवींद्रन के खिलाफ सभी कानूनी दावे और मुकदमे वापस लेने को तैयार हो सकते हैं.

सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित समझौते में Aakash का वैल्यूएशन लगभग 2 अरब डॉलर लगाया गया है. बातचीत में बायजू रवींद्रन, Glas Trust, Aakash Educational Services और Manipal Health भी शामिल हैं. हालांकि, इस पूरे मामले पर Byju’s, बायजू रवींद्रन, Glas Trust, Aakash और Manipal Health की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है.

कैसे शुरू हुआ विवाद

Byju’s ने वर्ष 2021 में करीब 1 अरब डॉलर के सौदे के तहत Aakash Educational Services का अधिग्रहण किया था. हालांकि, बाद के वर्षों में कंपनी की वित्तीय स्थिति बिगड़ने के कारण Aakash में उसकी हिस्सेदारी लगातार कम होती गई. वर्तमान में Manipal Health Aakash का सबसे बड़ा शेयरधारक बन चुका है और Byju’s की हिस्सेदारी अल्पमत में पहुंच गई है. साल 2023 की शुरुआत में Byju’s और उसके अमेरिकी कर्जदाताओं के बीच विवाद शुरू हुआ.

अमेरिका स्थित Glas Trust, जो कर्जदाताओं के समूह का ट्रस्टी है, ने कंपनी पर वित्तीय मिसमैनेजमेंट का आरोप लगाया और करीब 1 अरब डॉलर के बकाया कर्ज की मांग की. इसके बाद 2024 में भारत में Byju’s के दिवालिया होने की प्रक्रिया शुरू हुई, जिससे यह विवाद और गहरा गया. हालांकि, बायजू रवींद्रन और कंपनी ने सभी आरोपों से इनकार किया है.

दुनिया के 21 देशों तक फैला था कारोबार

एक समय ऐसा था, जब Byju’s दुनिया के 21 से अधिक देशों में अपना कारोबार संचालित कर रही थी. कोविड-19 महामारी के दौरान ऑनलाइन शिक्षा की बढ़ती मांग के चलते कंपनी ने तेज रफ्तार से विस्तार किया और भारत के सबसे मूल्यवान स्टार्टअप्स में शामिल हो गई. लेकिन फंडिंग संकट, बढ़ते कर्ज, निवेशकों के साथ विवाद और कानूनी चुनौतियों ने कंपनी की स्थिति को पूरी तरह बदल दिया. वर्ष 2024 में बायजू रवींद्रन ने खुद स्वीकार किया था कि उनकी कंपनी की वैल्यूएशन अब “शून्य” रह गई है.

Aakash की मजबूत मौजूदगी

Aakash Educational Services भारत के सबसे बड़े ऑफलाइन कोचिंग नेटवर्क में शामिल है. कंपनी देशभर में 300 से अधिक सेंटर संचालित करती है, जहां मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं के साथ-साथ स्कूल स्तर की परीक्षाओं की तैयारी कराई जाती है. संस्थान में 5,000 से अधिक फैकल्टी सदस्य कार्यरत हैं. कंपनी का हालिया वार्षिक रेवेन्यू करीब 254 मिलियन डॉलर रहा है, जिससे यह देश के सबसे बड़े शिक्षा संस्थानों में गिनी जाती है.

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