पीक से आधा हुआ कॉरपोरेट निवेश, Paytm के विजय शेखर शर्मा ने शेयर किया ग्राफ और पूछा ये सवाल
विजय शेखर शर्मा ने X पर लिखा, 'प्राइवेट कॉरपोरेट निवेश 2010 के दशक के आस-पास अपने चरम पर था और अब लगभग आधे स्तर पर आ गया है. शर्मा की ये टिप्पणियां अर्थशास्त्रियों के बीच बढ़ती चिंता के बीच आई हैं कि कमजोर प्राइवेट निवेश भारत की लंबी अवधि की ग्रोथ की महत्वाकांक्षाओं को कमजोर कर सकता है.

Paytm के फाउंडर और CEO विजय शेखर शर्मा ने गुरुवार को भारत में कमजोर होते प्राइवेट कॉरपोरेट निवेश पर चिंता जताई. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या देश की आर्थिक ग्रोथ ज्यादातर सरकारी खर्च से चल रही है. विजय शेखर शर्मा ने X पर लिखा, ‘प्राइवेट कॉरपोरेट निवेश 2010 के दशक के आस-पास अपने चरम पर था और अब लगभग आधे स्तर पर आ गया है. ऐसा लगता है कि GDP ग्रोथ का ज्यादातर बोझ सरकारी खर्च उठा रहा है. क्या ऐसा ही है?’
तेजी से गिरा कॉरपोरेट निवेश
Paytm के फाउंडर ने एक ग्राफिक शेयर किया जिसमें दिखाया गया है कि प्राइवेट कॉरपोरेट निवेश 2011 में GDP के लगभग 27 फीसदी से तेजी से गिरकर 2026 तक लगभग 12 फीसदी पर आ गया है. चार्ट के अनुसार, सबसे बड़ी गिरावट 2012 और 2019 के बीच ‘ट्विन बैलेंस शीट डीलेवरेजिंग’ चरण के दौरान आई, जब निवेश GDP के लगभग 24.5 फीसदी से गिरकर 13.5 फीसदी पर आ गया.
कोविड के बाद कुछ खास सुधार नहीं
डेटा से यह भी पता चला कि कोविड महामारी के बाद प्राइवेट निवेश में कोई खास सुधार नहीं हुआ. आर्थिक मजबूती के बड़े दावों के बावजूद, यह 2020 और 2026 के बीच GDP के 11.5% से 12.2% की एक छोटी सी सीमा में ही अटका रहा. शर्मा की ये टिप्पणियां अर्थशास्त्रियों के बीच बढ़ती चिंता के बीच आई हैं कि कमजोर प्राइवेट निवेश भारत की लंबी अवधि की ग्रोथ की महत्वाकांक्षाओं को कमजोर कर सकता है.
सरकारी खर्च को दिया गया बढ़ावा
इस हफ्ते की शुरुआत में अर्थशास्त्री सुरजीत भल्ला ने तर्क दिया था कि भारत ने पिछले एक दशक में प्राइवेट निवेश की जगह ज्यादातर सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च को बढ़ावा दिया है. भल्ला ने एक टीवी इंटरव्यू में कहा, ‘पिछले 10 साल में जो हुआ है, वह यह है कि हमने प्राइवेट निवेश की जगह सरकारी निवेश – यानी सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश – को बढ़ावा दिया है. GDP के मुकाबले हमारा कुल निवेश रेश्यो लगभग 32% पर बिल्कुल वैसा ही बना हुआ है.’
उन्होंने आगे कहा कि हालांकि हम सभी सरकारी निवेश का स्वागत करते हैं, लेकिन प्राइवेट और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) अर्थव्यवस्था के लिए सरकारी निवेश की तुलना में कहीं अधिक फायदेमंद होता है.
द्विपक्षीय निवेश संधि जिम्मेदार
भल्ला ने कमजोर विदेशी निवेश के लिए कुछ हद तक भारत की 2015 की द्विपक्षीय निवेश संधि (Bilateral Investment Treaty) को जिम्मेदार ठहराया, और कहा कि इसके प्रावधानों ने निवेशकों को हतोत्साहित किया.
उन्होंने कहा कि 2015 में हमने एक नया द्विपक्षीय निवेश समझौता पास किया था. इस नए समझौते के मुताबिक, अगर कोई विदेशी और कोई घरेलू निवेशक अलग होना चाहते थे, तो सरकार इसकी इजाजत नहीं देती थी और कहती थी, ‘कुछ भी करने से पहले 5 साल तक यहीं रहो.’ पूरी दुनिया में कहीं भी ऐसा कोई नियम नहीं है.’ भल्ला ने आगे कहा कि विदेशी निवेश नहीं हो रहा है. निवेश का माहौल खराब है. घरेलू निवेशक बाहर जा रहे हैं, और हम 6% की रफ्तार से आगे बढ़ रहे हैं.
अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी चुनौती
पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम ने भी निजी कॉरपोरेट निवेश में कमी को अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी चुनौती बताया है़. सुब्रमण्यम ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में लिखा, ‘2000 के दशक की शुरुआत में यह GDP का 17 फीसदी था और आज यह उसका आधा रह गया है.’
GST को आसान बनाने, श्रम कानूनों में बदलाव और विदेशी निवेश को उदार बनाने जैसे सुधारों को मानते हुए भी, सुब्रमण्यम ने यह तर्क दिया कि निवेशक अभी भी पूरे कारोबारी माहौल को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं.