12 फरवरी से बदलेगा महंगाई मापने का फॉर्मूला, CPI के नए वेटेज स्ट्रक्चर से आंकड़ों से बदलेगी तस्वीर

महंगाई से जुड़े आंकड़ों को समझने का तरीका जल्द बदलने वाला है. इससे रोजमर्रा की कीमतों, नीतिगत फैसलों और बाजार की धारणाओं पर असर पड़ सकता है. कुछ क्षेत्रों का महत्व बढ़ेगा तो कुछ का घटेगा, जिससे आने वाले महीनों में महंगाई के आंकड़े पहले से अलग तस्वीर पेश कर सकते हैं.

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CPI weight revision India: 12 फरवरी को देश में खुदरा महंगाई को मापने वाले कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स यानी CPI के वेटेज स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव सामने आएगा. यह बदलाव दिखने में तकनीकी जरूर है, लेकिन इसका असर महंगाई के आंकड़ों, नीति निर्माण और बाजार की समझ पर पड़ेगा. अर्थशास्त्रियों का मानना है कि नए वेट लागू होने के बाद रिटेल महंगाई में हल्की बढ़त दिख सकती है, हालांकि इससे मौद्रिक नीति में तुरंत कोई बड़ा बदलाव होने की उम्मीद नहीं है.

खाने-पीने के चीजों पर होगा असर

बिजनेस स्टैन्डर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्तावित बदलाव के तहत CPI में फूड एंड बेवरेजेस का वेट (weight) करीब 1/5 घटाया जा रहा है. अभी यह 45.86 प्रतिशत है, जिसे घटाकर 36.75 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है. इसका मतलब यह है कि सब्जी, दाल, अनाज जैसी चीजों की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर अब महंगाई के आंकड़ों पर पहले से कम दिखेगा. इससे CPI में अचानक आने वाली तेज हलचल कुछ हद तक कम हो सकती है.

कोर इंफ्लेशन को मिलेगी ज्यादा अहमियत

नए CPI ढांचे में कोर आइटम्स का वेट करीब 10 प्रतिशत अंक तक बढ़ सकता है. दिसंबर 2025 में कोर इंफ्लेशन 4.6 प्रतिशत था, जबकि कुल रिटेल महंगाई 1.3 प्रतिशत के आसपास रही.

नए वेट में शहरी CPI और सेवाओं पर ज्यादा जोर दिया गया है. रेस्टोरेंट, होटल और एकॉमोडेशन सर्विस, ट्रांसपोर्ट और सूचना व संचार सेवाओं के वेट में अच्छी-खासी बढ़ोतरी की गई है. वहीं शिक्षा सेवाओं, कपड़ा और फुटवियर जैसे सेक्टर का वजन थोड़ा घटाया गया है.

अर्थव्यवस्था और RBI पर क्या असर

बैंकों और विश्लेषकों का मानना है कि नया CPI ढांचा RBI के लिए महंगाई को समझना और टारगेट तय करना आसान बनाएगा. केनरा बैंक के अनुसार, रिटेल इंफ्लेशन अब 4 प्रतिशत के लक्ष्य के आसपास ज्यादा स्थिर रह सकती है. नोमुरा का अनुमान है कि नए वेटेज स्ट्रक्चर के हिसाब से हेडलाइन महंगाई औसतन 2.2 प्रतिशत ज्यादा दिखाई देती.

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हालांकि CPI के आंकड़ों में हल्की बढ़त संभव है, लेकिन ज्यादातर अर्थशास्त्री मानते हैं कि RBI की निकट अवधि की नीति पर इसका खास असर नहीं पड़ेगा. कुल मिलाकर, यह बदलाव महंगाई की ज्यादा सटीक तस्वीर दिखाने और आर्थिक स्थिरता को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है.

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