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सिगरेट की लंबाई से तय होगा टैक्स, कल से महंगे हो जाएंगे तंबाकू प्रोडक्ट, जानिए आपके जेब पर पड़ेगा कितना असर

फरवरी की शुरुआत से सिगरेट और तंबाकू प्रोडक्ट से जुड़ा नियम बदलने वाला है, इन पर सरकार लंबे समय से नजर रखे हुए थी. टैक्स व्यवस्था, कीमत तय करने का तरीका और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े नियमों में बदलाव का असर सीधे बाजार, उद्योग और उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ सकता है.

Tobacco tax Image Credit: FreePik

1 फरवरी 2026 से सिगरेट और तंबाकू प्रोडक्ट आम लोगों के लिए और महंगा होने जा रहा है. केंद्र सरकार ने इन उत्पादों पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) और पान मसाला पर हेल्थ व नेशनल सिक्योरिटी सेस लगाने का फैसला लागू करने का ऐलान किया है. यह नया टैक्स ढांचा मौजूदा 28 फीसदी जीएसटी और मुआवजा सेस की जगह लेगा, जो जुलाई 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद से इन ‘सिन गुड्स’ पर लगाया जा रहा था. सरकार का मकसद न सिर्फ रेवेन्यू बढ़ाना है, बल्कि तंबाकू सेवन को हतोत्साहित करना और स्वास्थ्य से जुड़ी जरूरतों के लिए स्थायी संसाधन जुटाना भी है.

जीएसटी के बाद अब एक्साइज और सेस का दौर

अब तक सिगरेट और पान मसाला जैसे उत्पाद 28 फीसदी जीएसटी और उसके ऊपर कंपेंसेशन सेस के दायरे में थे. लेकिन कोविड के दौरान राज्यों को हुए राजस्व नुकसान की भरपाई के लिए लिया गया 2.69 लाख करोड़ रुपये का कर्ज 31 जनवरी 2026 तक चुकता हो जाएगा. इसके बाद मुआवजा सेस खत्म हो रहा है. इसी खाली जगह को भरने के लिए सरकार ने एक्साइज ड्यूटी और हेल्थ सेस का नया ढांचा तैयार किया है.

सिगरेट पर लंबाई के हिसाब से टैक्स

नए नियमों के तहत सिगरेट पर टैक्स उसकी लंबाई के आधार पर लगाया जाएगा. 65 मिलीमीटर तक की छोटी नॉन-फिल्टर सिगरेट पर करीब 2.05 रुपये प्रति स्टिक और फिल्टर सिगरेट पर लगभग 2.10 रुपये प्रति स्टिक अतिरिक्त ड्यूटी लगेगी. 65 से 70 मिलीमीटर की सिगरेट पर यह टैक्स 3.6 से 4 रुपये प्रति स्टिक होगा, जबकि 70 से 75 मिलीमीटर की लंबी और प्रीमियम सिगरेट पर करीब 5.4 रुपये प्रति स्टिक ड्यूटी लगेगी. बेहद अलग या असामान्य डिजाइन वाली सिगरेट पर अधिकतम 8.50 रुपये प्रति स्टिक टैक्स तय किया गया है, हालांकि ज्यादातर लोकप्रिय ब्रांड इस कैटेगरी में नहीं आते.

तंबाकू और गुटखा पर भारी बोझ

चबाने वाले तंबाकू, जर्दा और सुगंधित तंबाकू पर 82 फीसदी तक एक्साइज ड्यूटी लगेगी, जबकि गुटखा पर यह टैक्स 91 फीसदी तक पहुंचेगा. पान मसाला पर 40 फीसदी जीएसटी के अलावा हेल्थ और नेशनल सिक्योरिटी सेस लगाया जाएगा, हालांकि कुल टैक्स बोझ 88 फीसदी के आसपास ही रखा गया है.

MRP आधारित नया नियम और सख्त निगरानी

1 फरवरी से तंबाकू उत्पादों के लिए एमआरपी आधारित मूल्यांकन व्यवस्था लागू होगी. यानी पैकेट पर लिखी खुदरा कीमत के आधार पर जीएसटी तय होगा. पान मसाला निर्माताओं को नए सेस कानून के तहत नया रजिस्ट्रेशन कराना होगा. साथ ही फैक्ट्रियों में पैकिंग मशीनों पर सीसीटीवी कैमरे लगाना और 24 महीने तक रिकॉर्ड सुरक्षित रखना अनिवार्य किया गया है. मशीनों की संख्या और क्षमता की जानकारी भी एक्साइज विभाग को देनी होगी.

राज्यों को कैसे मिलेगा फायदा

तंबाकू पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी से मिलने वाली राशि को वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार राज्यों में बांटा जाएगा. केंद्र के कुल कर राजस्व का 41 फीसदी हिस्सा राज्यों को जाता है. वहीं पान मसाला पर लगने वाले सेस से मिलने वाला पैसा स्वास्थ्य जागरूकता और अन्य स्वास्थ्य योजनाओं में खर्च किया जाएगा.

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इंडस्ट्री और आम आदमी पर असर

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के मुताबिक, इस हेल्थ सेस का मकसद स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक भरोसेमंद और स्थायी फंड बनाना है. विश्व बैंक के अनुसार भारत में सिगरेट पर कुल टैक्स बोझ अभी करीब 53 फीसदी है, जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन 75 फीसदी या उससे ज्यादा टैक्स की सलाह देता है. ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कई यूरोपीय देश इस स्तर को पहले ही पार कर चुके हैं.

क्रिसिल रेटिंग्स का अनुमान है कि अतिरिक्त टैक्स के चलते अगले वित्त वर्ष में घरेलू सिगरेट उद्योग की बिक्री मात्रा में 6 से 8 फीसदी तक गिरावट आ सकती है. साफ है कि सरकार का यह कदम रेवेन्यू बढ़ाने के साथ-साथ लोगों की सेहत और तंबाकू नियंत्रण की दिशा में भी अहम माना जा रहा है.