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Silver Price Crash Warning: दो दिनों में चांदी ने मचाया कोहराम, अभी कितनी गिरावट बाकी, 50 साल के ट्रेंड से समझें

पिछले कुछ दिनों में चांदी की कीमतों में आई तेज गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है. इतिहास गवाह है कि जब चांदी असामान्य रफ्तार पकड़ती है, तो उसके बाद बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिलता है. 50 साल के ट्रेंड में ऐसे दौर पहले भी आए हैं. सवाल यही है कि यह गिरावट कहां तक जा सकती है और आगे क्या संकेत छुपे हैं.

चांदी में अभी कितनी गिरावट बाकी Image Credit: FreePik

Silver Price Crash Outlook: चांदी हमेशा से भरोसे और डर के बीच झूलती रही है. जब अर्थव्यवस्था स्थिर होती है, सिस्टम पर भरोसा कायम रहता है और भविष्य साफ दिखता है, तब चांदी शांत रहती है. लेकिन जैसे ही महंगाई, कर्ज, करेंसी की कीमत और आर्थिक ढांचे को लेकर सवाल खड़े होते हैं, चांदी अचानक सुर्खियों में आ जाती है. इतिहास गवाह है कि हर बड़े आर्थिक तनाव के दौर में चांदी ने तेज रफ्तार पकड़ी, और फिर उतनी ही बेरहमी से टूटी भी है.

29 जनवरी को यही इतिहास एक बार फिर हरकत में दिखा. चांदी 121–122 डॉलर के दायरे में पहुंची, यानी निचले स्तरों से करीब 934 फीसदी का रिटर्न दे चुकी थी. इसके तुरंत बाद बाजार में तेज बिकवाली शुरू हुई और कुछ ही दिनों में चांदी फिसलकर 84 डॉलर के आसपास आ गई. अब निवेशकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है, अगर चांदी क्रैश होती है, तो कितना टूटती है? इस रिपोर्ट में हम आपको इसी सवाल का जवाब टेक्निकल चार्ट के हवाले से देने की कोशिश करेंगे.

1970-80: जब 1200% की तेजी के बाद 90% की गिरावट आई

1975 में चांदी करीब 3.8 डॉलर प्रति औंस पर थी. महंगाई, तेल संकट, डॉलर पर घटता भरोसा और आर्थिक अनिश्चितता ने चांदी को पंख लगा दिए. 1979-80 तक यह करीब 48-50 डॉलर तक पहुंच गई, लगभग 1,188 फीसदी की तेजी.

लेकिन जैसे ही अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरें सख्त कीं, डॉलर मजबूत हुआ और महंगाई काबू में आई, चांदी की चमक टूट गई. अगले कुछ सालों में इसमें करीब 89 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. यह गिरावट सिर्फ कीमत की नहीं थी, बल्कि भरोसे की भी थी.

2001-2011: 1100% चढ़ने के बाद 70% टूट गई चांदी

2001 में चांदी करीब 4 डॉलर के आसपास थी. डॉट-कॉम बबल, फिर 2008 का वैश्विक वित्तीय संकट, बैंकों का डूबना और केंद्रीय बैंकों द्वारा बेहिसाब पैसा छापना इन सबने निवेशकों को फिर चांदी की ओर मोड़ा. 2011 तक चांदी करीब 50 डॉलर पहुंची, यानी फिर लगभग 1,100 फीसदी की तेजी.

लेकिन जैसे-जैसे हालात सामान्य हुए, नीतियां सख्त हुईं और डर कम हुआ, चांदी में गिरावट शुरू हुई. 2011 के बाद इसमें करीब 72 फीसदी की गिरावट देखने को मिली और कई साल तक चांदी सुस्त पड़ी रही.

2026 के पहले महीने में फिर आई गिरावट

महामारी के बाद दुनिया ने एक बार फिर वही माहौल देखा, जहां ब्याज दरें नीचे थी, कर्ज ऊंचा था, और भविष्य अनिश्चित. 2020 में चांदी 11-12 डॉलर तक गिर गई थी, लेकिन इसके बाद जबरदस्त उछाल आया. 29 जनवरी 2026 को यह में यह 120 डॉलर के अपने ऑल टाइम हाई पर पहुंच गई, यानी करीब 930-950 फीसदी का रिटर्न. यही वह जोन है, जहां इतिहास में हर बार चांदी पर दबाव बढ़ा है.

अगले दिन हुआ भी वही, जोरदार क्रैश के साथ 31 जनवरी को चांदी 84 डॉलर पर बंद हुई. यानी महज दो दिन में 30 फीसदी का क्रैश.

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चांदी में गिरावट अभी कितनी बाकी

पिछले पांच दशकों के चांदी के चार्ट को देखें तो एक पैटर्न बार-बार उभरकर सामने आता है. ऐसे हर बड़े बूम के बाद चांदी में सिर्फ मामूली सुधार नहीं, बल्कि गहरी गिरावट आती है. आमतौर पर यह गिरावट 65 से 75 फीसदी तक जाती है, जिसके बाद ही कीमतों में कुछ स्थिरता दिखाई देती है. अब क्योंकि चांदी अपने ऑलटाइम हाई से 30 फीसदी क्रैश हो चुकी है तो चार्ट ट्रेंड के मुताबिक इसमें अभी भी 30-35 फीसदी की गिरावट बाकि है.