पश्चिम एशिया का संघर्ष झुलसा देगा सिरेमिक टाइल्स इंडस्ट्री का कारोबार, रेवेन्यू में गिरावट की आशंका, इन स्टॉक्स पर रखें नजर
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने की वजह से एक्सपोर्ट से होने वाली कमाई में 6-7 फीसदी की गिरावट आ सकती है. पश्चिम एशिया को होने वाले एक्सपोर्ट पर लॉजिस्टिक्स से जुड़ी चुनौतियों और सप्लाई-चेन में बदलाव का असर पड़ा है.
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष देश के कई कारोबारी सेक्टर्स को झुलसा रहा है. डिमांड से लेकर सप्लाई तक की समस्या इंडस्ट्रीज को वित्तीय रूप से नुकसान पहुंचा सकती है. इसको लेकर एक्सपर्ट ने अलर्ट भी करना शुरू कर दिया है. भारतीय सिरेमिक टाइल्स इंडस्ट्री को लेकर क्रिसिल रेटिंग्स ने अपनी रिपोर्ट में कई पहलुओं पर ध्यान आकर्षित किया है और कहा कि पश्चिम एशिया के तनाव का असर इस इंडस्ट्री पर पड़ेगा.
सिरेमिक टाइल्स इंडस्ट्री पर दोहरी मार
क्रिसिल के अनुसार, 53,000 करोड़ रुपये की भारतीय सिरेमिक टाइल्स इंडस्ट्री में इस वित्त वर्ष में लगातार दूसरे साल ग्रोथ में गिरावट देखने को मिलेगी. इसकी वजह पश्चिम एशिया में चल रहे घटनाक्रमों का दोहरा असर है. पहला, पश्चिम एशिया को होने वाले एक्सपोर्ट पर लॉजिस्टिक्स से जुड़ी चुनौतियों और सप्लाई-चेन में बदलाव का असर पड़ा है. खास बात यह है कि एक्सपोर्ट से इंडस्ट्री की कुल कमाई का 40 फीसदी हिस्सा आता है, जिसमें से 15 फीसदी सिरेमिक एक्सपोर्ट पश्चिम एशिया में होता है.
एक्सपोर्ट से होने वाली कमाई में गिरावट का अनुमान
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने की वजह से एक्सपोर्ट से होने वाली कमाई में 6-7 फीसदी की गिरावट आ सकती है. इससे डिलीवरी में रुकावट आई है और माल ढुलाई व बीमा की लागत बढ़ गई है. इसका असर न सिर्फ पश्चिम एशिया को होने वाले एक्सपोर्ट पर पड़ा है, बल्कि दूसरे इलाकों को होने वाले एक्सपोर्ट की लागत भी बढ़ गई है.
दूसरा, मुख्य कच्चे माल की सप्लाई में कटौती की गई है, जिसमें लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) और प्रोपेन शामिल हैं और ये सामान बेचने की लागत (COGS) का 35 फीसदी हिस्सा होते हैं. इसकी वजह से ज्यादातर सिरेमिक प्लांट को या तो अपना प्रोडक्शन बंद करना पड़ा है या फिर उन्हें काफी कम स्तर पर काम करना पड़ रहा है.
घरेलू खपत कम हो सकती है
मार्च में प्रोडक्शन लगभग पूरी तरह से ठप हो जाने के कारण, घरेलू खपत में ग्रोथ की रफ्तार धीमी होने की आशंका है. अब उम्मीद है कि इस वित्त वर्ष में घरेलू बाजार में सिर्फ 4-5 फीसदी की ग्रोथ होगी, जो पहले के 7-8 फीसदी के अनुमान से काफी कम है.
लंबे समय तक बंद रह सकते हैं प्लांट
क्रिसिल रेटिंग्स के डायरेक्टर नितिन कंसल कहते हैं, ‘मौजूदा पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण सिरेमिक इंडस्ट्री को काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा. खास तौर पर, गैस सप्लाई की उपलब्धता, पश्चिम एशिया क्षेत्र से कम या बिल्कुल भी मांग न होना और दूसरे विदेशी बाजारों के लिए लॉजिस्टिक्स लागत में बढ़ोतरी का सीधा असर प्रोडक्शन शेड्यूल पर पड़ेगा. अगर यह स्थिति अगले 2-3 हफ्तों तक बनी रहती है, तो इससे कंपनियों को लंबे समय तक प्लांट बंद रखने पड़ सकते हैं और भारी नुकसान हो सकता है, जिससे आखिरकार इस वित्त वर्ष में रेवेन्यू में 1-2% की गिरावट आ सकती है. इसके अलावा, अगर यह स्थिति और लंबी खिंचती है, तो हम रेवेन्यू में 7-8% की मासिक गिरावट देख सकते हैं.’
रेवेन्यू में नुकसान
प्लांट बंद होने और क्षमता का पूरा इस्तेमाल न होने के कारण रेवेन्यू में नुकसान के साथ-साथ, कंपनियों को फिक्स्ड लागत (COGS का 15-20%) और ज्यादा लॉजिस्टिक्स लागत (COGS का 3-5%) का बोझ भी उठाना पड़ेगा, क्योंकि शिपमेंट के लिए माल ढुलाई की लागत में 45%-50% और बीमा लागत में 25-30% की बढ़ोतरी हुई है.
आशंका है कि ऊपर बताए गए कारणों से ऑपरेटिंग मुनाफा 130-150 बेसिस पॉइंट्स (bps) गिरकर इस वित्त वर्ष में पांच साल के निचले स्तर 9.3-9.5% पर आ जाएगा, और अगर अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भी यही स्थिति बनी रहती है, तो वित्त वर्ष 2027 में यह गिरकर 8.2-8.5% हो जाएगा.
सिरेमिक टाइल्स इंडस्ट्री की टॉप कंपनियों के शेयर का हाल
| कंपनी का नाम | मार्केट प्राइस (₹) | क्लोजिंग प्राइस (₹) | मार्केट कैप (₹ करोड़) |
| कजारिया सेरामिक्स | ₹955.45 | ₹888.90 | ₹14,168 |
| सेरा सैनिटरीवेयर | ₹4,982.10 | ₹4,580.90 | ₹5,910 |
| मिडवेस्ट गोल्ड | ₹4,089.00 | ₹3,906.35 | ₹4,315 |
| मिडवेस्ट | ₹1,311.50 | ₹1,181.70 | ₹4,261 |
| पोकार्ना | ₹864.60 | ₹859.15 | ₹2,672 |
| एशियन ग्रेनाइट इंडिया | ₹60.54 | ₹62.47 | ₹1,853 |
| निटको | ₹79.38 | ₹66.99 | ₹1,530 |
| सोमानी सेरामिक्स | ₹388.40 | ₹360.70 | ₹1,482 |
| ओरिएंट बेल | ₹279.80 | ₹268.90 | ₹396 |
| एक्सारो टाइल्स | ₹6.90 | ₹6.61 | ₹295 |
मुनाफे में संभावित गिरावट
क्रिसिल ने कहा कि हमारे द्वारा रेट किए गए 40 मैन्युफैक्चरर्स का हमारा विश्लेषण, जिनका इंडस्ट्री के कुल रेवेन्यू में लगभग एक-चौथाई हिस्सा है, इसी बात की ओर इशारा करता है. मुनाफे में संभावित गिरावट और रेवेन्यू में कोई खास बढ़ोतरी न होने के कारण, हमारे रेटेड पोर्टफोलियो का इंटरेस्ट कवरेज पिछले वित्त वर्ष के 4.4 गुना से घटकर इस वित्त वर्ष में 3.5 गुना रहने की उम्मीद है. कुल बाहरी देनदारियां बनाम टेंजिबल नेटवर्थ (TOL/TNW) का अनुपात इस वित्त वर्ष में 1 गुना पर नियंत्रण में रहने की उम्मीद है.
कंपनियों के फाइनेंस पर दबाव पड़ सकता है
क्रिसिल रेटिंग्स के एसोसिएट डायरेक्टर नीलेश अग्रवाल कहते हैं, ‘हमारी रेटेड कंपनियों के पास ऑपरेशन बंद रहने के बावजूद जरूरी खर्चों और कर्ज चुकाने के लिए 30-40 दिनों के लिए काफी लिक्विडिटी है. हालांकि, अगर रुकावटें 30-40 दिनों से ज्यादा रहती हैं, तो रेटेड सिरेमिक कंपनियों के फाइनेंस पर दबाव पड़ सकता है, जिससे उनके क्रेडिट प्रोफ़ाइल पर असर पड़ सकता है.’
डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.
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