$100 से गिरकर $87 पर पहुंचा कच्चा तेल, 18 दिन में $13 प्रति बैरल घटे दाम; पेट्रोल अभी भी ₹100 के पार, अब मिलेगी राहत?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 18 दिनों में करीब 13 डॉलर प्रति बैरल गिरकर 100 डॉलर से 87 डॉलर के स्तर पर पहुंच गई है. कच्चे तेल में आई इस बड़ी गिरावट के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अभी तक कोई राहत नहीं मिली है और कई शहरों में पेट्रोल 100 रुपये प्रति लीटर के पार बना हुआ है. ऐसे में उपभोक्ताओं के मन में सवाल है कि क्या जल्द ईंधन कीमतों में कटौती होगी.

Crude Oil Price: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है. महज 18 दिनों के भीतर क्रूड ऑयल करीब 13 डॉलर प्रति बैरल सस्ता होकर 100 डॉलर के स्तर से फिसलकर 87 डॉलर तक पहुंच गया है. आमतौर पर कच्चे तेल की कीमतों में इतनी बड़ी कमी का असर पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी देखने को मिलता है, लेकिन भारत में उपभोक्ताओं को अभी तक कोई राहत नहीं मिली है. देश के कई शहरों में पेट्रोल की कीमतें अब भी 100 रुपये प्रति लीटर के पार बनी हुई हैं. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सस्ता हो रहा है तो आम लोगों को इसका फायदा कब मिलेगा? क्या तेल मार्केटिंग कंपनियां जल्द कीमतों में कटौती करेंगी या फिर टैक्स और अन्य कारणों से उपभोक्ताओं को अभी और इंतजार करना पड़ेगा? कच्चे तेल की गिरती कीमतों के बीच पेट्रोल-डीजल के दामों को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है.
कितना है क्रूड ऑयल का दाम
शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 3.37 फीसदी गिरकर 87.01 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई. इससे पहले 11 जून को इसकी कीमत 90.38 डॉलर प्रति बैरल थी, जबकि 10 जून को यह 91.45 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था. अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की उम्मीदों ने तेल बाजार पर दबाव बनाया है. यदि दोनों देशों के बीच समझौता आगे बढ़ता है, तो वैश्विक बाजार में तेल की सप्लाई बढ़ सकती है, जिससे कीमतों में और नरमी आने की संभावना है.
भारत में आखिरी बार कब बढ़े थे पेट्रोल-डीजल के दाम
भारत में आखिरी बार 25 मई को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 2.7 से 2.8 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की गई थी. इससे पहले 15 मई से 25 मई के बीच पेट्रोल और डीजल की कीमतों में चार बार बढ़ोतरी की गई थी. इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 102.12 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई थी, जबकि कई अन्य शहरों में भी ईंधन की कीमतें 100 रुपये के स्तर से ऊपर चली गई थीं. उस समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही थी और तेल कंपनियों ने बढ़ी हुई लागत का असर उपभोक्ताओं पर डालना शुरू कर दिया था. हालांकि, अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है और क्रूड ऑयल लगातार सस्ता हो रहा है.
18 दिनों में आई बड़ी गिरावट
भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में आखिरी बढ़ोतरी 25 मई को हुई थी. इसके अगले दिन यानी 26 मई को ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 99.58 डॉलर प्रति बैरल थी. वहीं, अब यह घटकर 87.01 डॉलर प्रति बैरल रह गई है. यानी केवल 18 दिनों में कच्चा तेल करीब 13 डॉलर प्रति बैरल सस्ता हो गया है.
तेल बाजार के जानकारों का कहना है कि इतनी बड़ी गिरावट सामान्य परिस्थितियों में ईंधन की कीमतों में राहत का आधार बन सकती है. हालांकि, भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें केवल कच्चे तेल पर निर्भर नहीं करतीं. इसमें रिफाइनिंग कॉस्ट, फ्रेट चार्ज, केंद्र और राज्य सरकारों के टैक्स तथा डीलर कमीशन भी शामिल होते हैं.
क्या अब सस्ता होगा पेट्रोल
यही वह सवाल है, जिसका जवाब करोड़ों वाहन चालक जानना चाहते हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक मौजूदा स्तर पर बनी रहती हैं या इसमें और गिरावट आती है, तो तेल मार्केटिंग कंपनियों पर कीमतें कम करने का दबाव बढ़ सकता है.
हालांकि, यह भी संभव है कि कंपनियां पहले पिछले महीनों में हुए नुकसान की भरपाई करने की कोशिश करें. इसके अलावा, सरकारें भी ईंधन पर लगने वाले टैक्स में बदलाव किए बिना सीधे राहत देने के पक्ष में नहीं हो सकतीं.
आम लोगों की उम्मीदें बढ़ीं
लगातार घटती कच्चे तेल की कीमतों ने आम लोगों की उम्मीदें बढ़ा दी हैं. परिवहन लागत से लेकर रोजमर्रा के खर्च तक, ईंधन की कीमतों का सीधा असर अर्थव्यवस्था पर पड़ता है. ऐसे में यदि पेट्रोल और डीजल के दाम घटते हैं, तो इसका फायदा केवल वाहन चालकों को ही नहीं, बल्कि महंगाई पर भी देखने को मिल सकता है.
फिलहाल सबकी नजरें अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और तेल मार्केटिंग कंपनियों के अगले कदम पर टिकी हैं. यदि क्रूड ऑयल 90 डॉलर से नीचे बना रहता है, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर राहत की उम्मीद और मजबूत हो सकती है.
यह भी पढ़ें: ₹35 का शेयर बना रॉकेट! 5 दिन से लगातार लग रहा अपर सर्किट; 1 हफ्ते में 89% की तूफानी छलांग