दिल्ली हाई कोर्ट से ITC को राहत, FSSAI को आदेश… ‘100% आटा’ मामले में लाइसेंस पर न करें कोई कार्रवाई

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने FSSAI और दूसरे संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है. दिल्ली हाई कोर्ट ने FSSAI से कहा है कि वह ITC का लाइसेंस रद्द करने के अपने फ़ैसले पर अभी रोक लगाए. ITC ने फ़ूड प्रोडक्ट के लेबल पर '100%' दावे करने के बारे में रेगुलेटर की एडवाइज़री को चुनौती दी थी.

आईटीसी आटा. Image Credit: ITC

दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) से कहा कि वह FMCG कंपनी ITC के ‘ITC आशीर्वाद शुद्ध चक्की आटा’ प्रोडक्ट पर 100 फीसदी वाले दावे के कारण उसका लाइसेंस रद्द करने का कोई भी फैसला अभी न ले. साथ ही, कोर्ट ने कंपनी की याचिका पर रेगुलेटर से जवाब भी मांगा है.’

संबंधित पक्षों को नोटिस

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने FSSAI और दूसरे संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है. यह नोटिस ITC की उस याचिका पर जारी किया गया है जिसमें खाने-पीने की चीजों पर “100%” का दावा करने के बारे में रेगुलेटर की एडवाइजरी को चुनौती दी गई है. कोर्ट इस मामले की अगली सुनवाई 9 सितंबर को करेगा.

कोर्ट ने कहा कि अगली सुनवाई तक ITC का लाइसेंस रद्द करने के बारे में कोई फैसला नहीं लिया जाना चाहिए और FSSAI से कहा कि वह इस दौरान कोई कार्रवाई न करे.

कंपनी ने एडवाइजरी को मनमाना बताया

FSSAI ने ITC की याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि हाई कोर्ट के पास इस मामले की सुनवाई करने का अधिकार क्षेत्र (ज्यूरिस्डिक्शन) नहीं है. इसके बाद कोर्ट ने दोनों पक्षों को अधिकार क्षेत्र के मुद्दे पर एक संक्षिप्त नोट दाखिल करने का निर्देश दिया.

कंपनी का तर्क

वकील रोहित शर्मा द्वारा दायर याचिका में, ITC ने FSSAI की एडवाइजरी को मनमाना बताया है. कंपनी का तर्क है कि यह एडवाइजरी ‘फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006’ के तहत रेगुलेटर की शक्तियों से बाहर है और कानून के तहत तय प्रक्रिया को नजरअंदाज करती है.

फूड बिजनेस ऑपरेटर्स

कंपनी का कहना है कि फूड बिजनेस ऑपरेटर्स इस एक्ट और इसके नियमों व रेगुलेशन से बंधे हैं, और कानून में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है कि वे इस दायरे से बाहर जारी की गई किसी एडवाइजरी को मानने के लिए बाध्य हों.

ITC ने FSSAI की 28 मई, 2025 की एडवाइजरी को चुनौती दी है, जिसमें फूड बिजनेस ऑपरेटर्स से फूड प्रोडक्ट्स के लेबल, पैकेजिंग और प्रचार सामग्री पर “100%” शब्द का इस्तेमाल बंद करने के लिए कहा गया था.

कंपनी ने 10 अगस्त को जारी उस ‘शो-कॉज नोटिस’ (कारण बताओ नोटिस) को भी चुनौती दी है जिसमें एडवाइजरी के उल्लंघन का आरोप लगाया गया था. साथ ही, उन्होंने 13 अगस्त को जारी उस ‘इम्प्रूवमेंट नोटिस’ को भी चुनौती दी है, जिसमें कंपनी को अपने लेबल, विज्ञापनों और वेबसाइट से कुछ खास बातें हटाने और 15 दिनों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Report) जमा करने का निर्देश दिया गया था.

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