अमेरिका ने ईरान पर ‘इकोनॉमिक D-डे’ जैसे प्रतिबंधों का किया ऐलान, दुनिया भर के देशों से कहा तेहरान से तोड़ें नाता

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बेसेंट ने कहा कि 'आर्थिक हमले' का निशाना वे आर्थिक रास्ते होंगे, जिनका इस्तेमाल ईरान रेवेन्यू कमाने और अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने के लिए करता है. ट्रेजरी सेक्रेटरी ने यह भी कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप व्यक्तिगत रूप से विदेशी नेताओं से संपर्क कर रहे हैं.

ईरान को अलग-थलग करने की कोशिश. Image Credit: @Money9live

Highlights

  • अमेरिका ने ईरान के सहयोगियों पर दबाव बढ़ाया.
  • अमेरिका ने ईरान के सहयोगियों पर दबाव बढ़ाया.
  • अमेरिका ने ईरान के सहयोगियों पर दबाव बढ़ाया.

जैसे-जैसे युद्ध छह महीने के करीब पहुंच रहा है, डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने ईरान को अलग-थलग करने के लिए ‘इकोनॉमिक D-डे’ कैंपेन शुरू किया है. अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने उन देशों और संस्थाओं के खिलाफ सेकेंडरी प्रतिबंधों को बढ़ाने का ऐलान किया जो तेहरान के साथ कारोबार जारी रखे हुए हैं. उन्होंने दुनिया के नेताओं को चेतावनी दी कि ईरान से जुड़ी गतिविधियों को रोकने के लिए उनके पास एक तय ‘समय-सीमा’ है, वरना उनकी अहम कंपनियों और संस्थाओं को डॉलर-आधारित फाइनेंशियल सिस्टम से अलग किया जा सकता है.

ईरान को अलग धलग करने की कोशिश

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बेसेंट ने कहा कि ‘आर्थिक हमले’ का निशाना वे आर्थिक रास्ते होंगे, जिनका इस्तेमाल ईरान रेवेन्यू कमाने और अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने के लिए करता है. उन्होंने कहा कि अमेरिका का मकसद ईरानी सरकार को मदद पहुंचाने वाले आर्थिक जरिए को खत्म करना और तेहरान के साथ कारोबार करने वाले देशों और संस्थाओं को उन रिश्तों पर दोबारा सोचने के लिए मजबूर करना है.

बेसेंट ने कहा, ‘हमारा मकसद उन सभी आर्थिक जरियों को खत्म करना है जो इस जालिम सरकार को बनाए रखते हैं, ताकि ईरान अकेला पड़ जाए. यह घोषणा अमेरिका के ट्रेज़री विभाग द्वारा ईरान से जुड़ी लगभग 60 संस्थाओं, व्यक्तियों और जहाजों पर नए प्रतिबंध लगाने के साथ की गई. ये प्रतिबंध तेल, परमाणु, मिसाइल और साइबर नेटवर्क जैसे कई क्षेत्रों से जुड़े हैं.

अमेरिका ने देशों को दी डेडलाइन

बेसेंट ने कहा कि ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने उन नेटवर्क की पहचान कर ली है जिनका इस्तेमाल ईरान तेल की आवाजाही, फंड तक पहुंचने और प्रतिबंधों से बचने के लिए करता है. बेसेंट ने बताया कि अमेरिका के ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ प्लान के तहत, डिपार्टमेंट ने ‘हर उस नोड, हर मददगार और हर नेटवर्क का पता लगाया है जिसका इस्तेमाल ईरान ने तेल की तस्करी और प्रतिबंधों से बचने के लिए किया है.’

उन्होंने आगे कहा कि दुनिया भर की सरकारों से अब कहा जा रहा है कि वे वॉशिंगटन द्वारा पहचानी गई गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई करें. बेसेंट ने कहा कि हर देश के पास उन गतिविधियों को बंद करने के लिए एक ‘तय समय-सीमा’ है.

उन्होंने कहा, ‘ट्रेजरी, स्टेट डिपार्टमेंट और अमेरिकी सेना की टीमें अब अपने वैश्विक समकक्षों से मिलकर उन्हें बता रही हैं कि अमेरिका कार्रवाई की उम्मीद करता है.’ समय शुरू हो चुका है. हालांकि, बेसेंट ने यह नहीं बताया कि देशों के पास पालन करने के लिए कितना समय है या ऐसा न करने पर उन्हें किन दंडों का सामना करना पड़ सकता है.

अमेरिका ने ईरान के सहयोगियों पर दबाव बढ़ाया

ट्रेजरी सेक्रेटरी ने यह भी कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप व्यक्तिगत रूप से विदेशी नेताओं से संपर्क कर रहे हैं, क्योंकि वॉशिंगटन तेहरान के खिलाफ अपना दबाव अभियान बढ़ा रहा है. बेसेंट ने कहा कि ट्रंप विश्व नेताओं को फोन करके ईरान के साथ अपने संबंध खत्म करने का खास अनुरोध कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि प्रशासन को वीकेंड में ही इस कोशिश के नतीजे दिखने लगे थे, लेकिन उन्होंने कोई विवरण नहीं दिया.

बेसेंट ने कहा, ‘जो लोग अमेरिका के साथ खड़े होंगे, उन्हें हमारी साझेदारी का फायदा मिलेगा. जो लोग खुद को ईरानी शासन से जोड़ेंगे, उन्हें कमजोर होते शासन के साथ अलग-थलग पड़ने का सामना करना पड़ सकता है.’

वित्तीय संस्थानों के खिलाफ होगी कार्रवाई

बेसेंट ने कहा कि अमेरिका ईरान से जुड़े वित्तीय संस्थानों के खिलाफ और कार्रवाई करेगा और उम्मीद है कि इस सप्ताह के अंत तक एक बड़े वित्तीय संस्थान पर प्रतिबंध लगा दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन इसमें शामिल सभी पक्षों को जवाबदेह ठहराएगा, क्योंकि वह तेहरान पर आर्थिक दबाव बढ़ा रहा है, और इस अभियान को इस शासन का आर्थिक दम घोंटना बताया.

ईरान से जुड़ी संस्थाओं पर प्रतिबंध

बेसेंट की टिप्पणी से पहले, अमेरिकी ट्रेजरी ने ईरान से जुड़ी लगभग 60 संस्थाओं, लोगों और जहाजों पर प्रतिबंधों की घोषणा की.

डिपार्टमेंट ने कहा कि इन प्रतिबंधों का दायरा ईरान के परमाणु, मिसाइल, साइबर और तेल नेटवर्क तक फैला है. इसने उन ब्रोकर कंपनियों के नेटवर्क को भी निशाना बनाया जिन पर संयुक्त अरब अमीरात, हांगकांग, चीन, सिंगापुर, स्विट्जरलैंड और यूरोप के माध्यम से काम करने वाले ‘शैडो-फ्लीट’ (गुप्त बेड़े) के जहाजों का समर्थन करने का आरोप है. इन प्रतिबंधों में ईरान से जुड़ी डिजिटल एसेट्स, टेक्नोलॉजी, सोना, एविएशन और शिपिंग से जुड़ी गतिविधियां भी शामिल हैं. वॉशिंगटन का कहना है कि इन सेक्टर पर आगे और ‘सेकेंडरी प्रतिबंध’ लग सकते हैं.

ट्रेजरी ने उन जनरल लाइसेंस को भी सस्पेंड कर दिया है, जिनके तहत ईरान को कुछ रेमिटेंस पेमेंट की इजाजत थी.

ईरान ने अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने के तरीके ढूंढ लिए

ईरान के टॉप नेगोशिएटर मोहम्मद बाघेरी घालीबाफ ने तेहरान पर वॉशिंगटन के बढ़ते आर्थिक दबाव का विरोध करते हुए कहा कि अमेरिका ऐसी आर्थिक स्थिति में नहीं है कि वह दूसरे देशों के ईरान के साथ संबंधों पर और रोक लगा सके. उनके ये बयान बेसेंट की उस चेतावनी से ठीक पहले आए, जिसमें कहा गया था कि वॉशिंगटन उन देशों और संस्थाओं पर नए प्रतिबंध लगाएगा जो तेहरान के साथ आर्थिक संबंध बनाए रखेंगे.

घालीबाफ ने X पर एक पोस्ट में कहा, ‘अमेरिकी जानते हैं कि उनकी डींगों पर कोई यकीन नहीं करता. अमेरिका ऐसी आर्थिक स्थिति में नहीं है कि वह दूसरे देशों के साथ अपने संबंधों पर और रोक लगा सके.’ उन्होंने कहा कि ईरान के ट्रेडिंग पार्टनर्स ने संकेत दिया है कि वे वॉशिंगटन की धमकियों को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं. उन्होंने कहा कि ईरान के ट्रेडिंग पार्टनर्स ने मीडिया और हमें भेजे गए संदेशों के जरिए यह साफ कर दिया है कि वे इन बयानों को बिल्कुल भी अहमियत नहीं देते हैं.’

चीन ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार

चीन कई साल से ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार रहा है, जिसके चलते वॉशिंगटन ने चीन की खरीद को रोकने की कोशिशें तेज कर दी हैं. हालांकि, अमेरिका ने अब तक चीन के उन बड़े बैंकों पर प्रतिबंध नहीं लगाया है जो इस व्यापार में मदद कर रहे हो सकते हैं.

यह नया दबाव ऐसे समय में आया है जब ईरान के साथ ट्रंप का टकराव छह महीने के करीब पहुंच गया है. टकराव खत्म करने की कूटनीतिक कोशिशें रुकी हुई हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से तेल और कच्चे माल की शिपिंग में अभी भी रुकावट आ रही है.

एनर्जी की कीमतें हाई

हालांकि, हमले कम हो गए हैं, लेकिन इस रुकावट की वजह से दुनिया भर में एनर्जी की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं. अमेरिकी प्रतिबंध खास संस्थाओं को डॉलर-बेस्ड फाइनेंशियल सिस्टम से अलग कर देते हैं, लेकिन तेहरान ने बार-बार नई फ्रंट कंपनियां बनाकर, वैकल्पिक संस्थाएं खड़ी करके और नए नामों से जहाज रजिस्टर करके इन प्रतिबंधों से बचने के तरीके ढूंढ लिए हैं.

यह भी पढ़ें: कैरी बैग के पैसे लिए तो देना पड़ा 26 हजार का मुआवजा, जानें नियम