कैरी बैग के पैसे लिए तो देना पड़ा 26 हजार का मुआवजा, जानें नियम

गुरुग्राम में कैरी बैग के लिए 30 रुपये लेना दुकानदार को भारी पड़ गया. उपभोक्ता आयोग ने ग्राहक को 26,000 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया. आयोग ने कैरी बैग का शुल्क लेना अनुचित व्यापार व्यवहार और सेवा में कमी माना.

जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग

Highlights

  • कैरी बैग के ₹30 चार्ज पर आयोग ने सख्ती दिखाई
  • ग्राहक को मानसिक परेशानी के लिए ₹15,000 मुआवजा मिला
  • मुकदमे के खर्च के लिए ₹11,000 देने का आदेश

गुरुग्राम में कैरी बैग के लिए ग्राहक से लिए गए सिर्फ 30 रुपये का मामला अब दुकानदार के लिए 26,000 रुपये का पड़ गया. गुरुग्राम जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने तीन कैरी बैग के लिए 30 रुपये वसूलने को अनुचित व्यापार व्यवहार और सेवा में कमी माना है. आयोग ने दुकानदार को ग्राहक को 26,000 रुपये देने का आदेश दिया है.

4,713 रुपये की खरीदारी पर लिए थे 30 रुपये

मामला 31 अगस्त 2025 का है. गुरुग्राम के सेक्टर-14 निवासी रविंदर जैन ने सेक्टर-102 स्थित एक रिटेल आउटलेट से करीब 4,713 रुपये का सामान खरीदा था. सामान ज्यादा होने के कारण उन्होंने दुकान से कैरी बैग मांगा, ताकि खरीदारी का सामान आसानी से घर ले जा सकें.

ग्राहक के मुताबिक, दुकान ने उन्हें मुफ्त कैरी बैग देने से इनकार कर दिया और तीन बैग के लिए अलग से 30 रुपये वसूले. इसके बाद ग्राहक ने इस चार्ज को लेकर उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया.

आयोग ने कैरी बैग का पैसा लेना गलत माना

मामले की सुनवाई के दौरान गुरुग्राम उपभोक्ता आयोग ने कहा कि सामान को ग्राहक तक पहुंचाने लायक बनाने में होने वाले खर्च की जिम्मेदारी विक्रेता की होती है. आयोग ने Sale of Goods Act, 1930 की धारा 36(5) का भी हवाला दिया.

आयोग के मुताबिक, पैकेजिंग और सामान को डिलीवरी के लिए तैयार करने से जुड़े खर्च विक्रेता को उठाने चाहिए. ऐसे में ग्राहक से अलग से कैरी बैग का पैसा लेना सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार माना गया.

ग्राहक को 15,000 रुपये मानसिक परेशानी के मिले

आयोग ने दुकान को सिर्फ 30 रुपये वापस करने का आदेश नहीं दिया. ग्राहक को हुई मानसिक परेशानी और तकलीफ के लिए 15,000 रुपये का मुआवजा देने को कहा गया. इसके अलावा मुकदमे में हुए खर्च के लिए 11,000 रुपये देने का आदेश भी दिया गया.

इस तरह मुआवजे और कानूनी खर्च की कुल रकम 26,000 रुपये हो गई. इसके अलावा ग्राहक को कैरी बैग के लिए दिए गए 30 रुपये भी वापस करने होंगे. इस रकम पर 31 अगस्त 2025 से भुगतान होने तक 9 फीसदी सालाना ब्याज भी देना होगा.

पहले भी आ चुके हैं ऐसे फैसले

गुरुग्राम आयोग ने अपने फैसले में पहले के उपभोक्ता मामलों का भी हवाला दिया. इनमें नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन (NCDRC) का 2020 का Big Bazaar से जुड़ा फैसला और चंडीगढ़ स्टेट कंज्यूमर कमीशन का Lifestyle से जुड़ा मामला शामिल है.

इन मामलों में भी रिटेलर्स द्वारा ग्राहकों से अलग से कैरी बैग का पैसा लेने को सही नहीं माना गया था. आयोग ने कहा कि अगर दुकानों को इस तरह कैरी बैग के लिए अलग से पैसा लेने की छूट दी जाती रही, तो इससे बड़ी संख्या में ग्राहकों पर छोटे-छोटे अतिरिक्त चार्ज का बोझ पड़ सकता है.

ग्राहकों के लिए क्या है सीख?

इस मामले से ग्राहकों को यह सीख मिलती है कि छोटी रकम होने के बावजूद अपने अधिकारों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. अगर किसी दुकान पर सामान खरीदने के बाद कैरी बैग के लिए अलग से शुल्क लिया जाता है, तो ग्राहक बिल और भुगतान का रिकॉर्ड संभालकर रख सकता है और जरूरत पड़ने पर उपभोक्ता शिकायत का रास्ता अपना सकता है.

हालांकि, हर मामले की परिस्थितियां अलग हो सकती हैं. इसलिए किसी भी विवाद में संबंधित उपभोक्ता कानून और मामले के तथ्यों के आधार पर फैसला होगा. गुरुग्राम आयोग का यह आदेश फिलहाल इस बात को रेखांकित करता है कि महज छोटी रकम का चार्ज होने से उपभोक्ता अधिकार खत्म नहीं हो जाते.

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