बिजनेस से कमाई है तो 31 अगस्त याद रखें, ITR भरने से पहले चेक कर लें ये 5 फॉर्म
बिजनेस या प्रोफेशन से कमाई करने वाले नॉन-ऑडिट टैक्सपेयर्स को AY 2026-27 के लिए 31 अगस्त 2026 तक ITR भरनी है. रिटर्न फाइल करने से पहले Form 26AS, AIS, Form 16A, Form 15G और 15H जैसे दस्तावेजों को चेक करना जरूरी है.
Highlights
- बिजनेस या प्रोफेशन से कमाई करने वाले नॉन-ऑडिट टैक्सपेयर्स के लिए 31 अगस्त 2026 तक ITR भरनी है.
- पहले Form 26AS, AIS, Form 16A, Form 15G और 15H जैसे दस्तावेजों को चेक करना जरूरी है.
- टैक्स ऑडिट और ट्रांसफर प्राइसिंग वाले मामलों में Form 3CB-CD और 3CEB की जरूरत पड़ सकती है.
ITR Filing 2026: अगर आपकी कमाई बिजनेस या किसी प्रोफेशन से होती है, तो इनकम टैक्स रिटर्न यानी ITR भरने से पहले सिर्फ सही ITR फॉर्म चुनना ही काफी नहीं है. रिटर्न फाइल करने से पहले अपनी कमाई, TDS, टैक्स पेमेंट और दूसरी वित्तीय जानकारियों को मिलाना भी जरूरी है. इनकम टैक्स विभाग ने बिजनेस या प्रोफेशनल इनकम वाले नॉन-ऑडिट टैक्सपेयर्स को याद दिलाया है कि AY 2026-27 के लिए उन्हें 31 अगस्त 2026 तक अपना लागू ITR फाइल करना है. इसमें ITR-3, ITR-4, ITR-5 और ITR-7 शामिल हो सकते हैं.
ऐसे में आखिरी वक्त की भागदौड़ से बचने के लिए कुछ जरूरी फॉर्म और दस्तावेज पहले से तैयार रखना बेहतर हो सकता है. आइए जानते हैं 5 अहम फॉर्म और दस्तावेजों के बारे में.
1. Form 26AS और AIS को जरूर मिलाएं
ITR फाइल करने से पहले Form 26AS और Annual Information Statement यानी AIS को चेक करना जरूरी है.
Form 26AS में मुख्य रूप से TDS और TCS की जानकारी होती है. वहीं AIS में टैक्स विभाग के पास उपलब्ध आपकी वित्तीय जानकारियों की ज्यादा विस्तृत जानकारी मिल सकती है. इसमें TDS, TCS, Specified Financial Transactions यानी SFT, टैक्स भुगतान, रिफंड, डिमांड और कुछ GST से जुड़ी जानकारियां शामिल हो सकती हैं. टैक्सपेयर्स को इन जानकारियों का अपने रिकॉर्ड से मिलान करना चाहिए. अगर कोई अंतर दिखता है, तो ITR जमा करने से पहले उसे समझना और ठीक करना जरूरी है.
2. नॉन-सैलरी इनकम पर TDS के लिए Form 16A
अगर आपकी कमाई सैलरी के अलावा किसी अन्य स्रोत से हुई है और उस पर TDS काटा गया है, तो Form 16A महत्वपूर्ण हो सकता है. यह एक TDS सर्टिफिकेट है, जिसे टैक्स काटने वाला व्यक्ति या संस्था जारी करती है. इसमें उस आय या भुगतान की जानकारी होती है, जिस पर TDS काटा गया है. इसके साथ ही काटे गए टैक्स और सरकार के पास जमा किए गए टैक्स की जानकारी भी मिलती है.
बिजनेस और प्रोफेशनल टैक्सपेयर्स अपने रिकॉर्ड के साथ Form 16A का मिलान करके यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि ITR में TDS की जानकारी सही दर्ज हो.
3. कब काम आते हैं Form 15G और Form 15H?
Form 15G और फॉर्म 15H का इस्तेमाल कुछ खास मामलों में ब्याज से होने वाली आय पर TDS न काटने के लिए किया जाता है. फॉर्म 15G आमतौर पर 60 साल से कम उम्र के पात्र निवासी व्यक्ति, HUF और कुछ अन्य पात्र टैक्सपेयर्स जमा कर सकते हैं. वहीं फॉर्म 15H पात्र निवासी वरिष्ठ नागरिकों यानी 60 साल या उससे अधिक उम्र के लोगों के लिए है.
इन फॉर्म का इस्तेमाल तब किया जा सकता है, जब पात्र टैक्सपेयर की अनुमानित टैक्स देनदारी शून्य हो. इन फॉर्म में अनुमानित आय और अन्य जरूरी जानकारियां देनी होती हैं.
4. टैक्स ऑडिट वालों के लिए Form 3CB और 3CD
हर बिजनेस या प्रोफेशनल टैक्सपेयर पर एक जैसे नियम लागू नहीं होते. जिन टैक्सपेयर्स के खातों का Income Tax Act, 1961 की धारा 44AB के तहत टैक्स ऑडिट जरूरी है, उन्हें टैक्स ऑडिट रिपोर्ट देनी होती है. Form 3CB में खातों के ऑडिट से जुड़ी रिपोर्ट होती है. वहीं Form 3CD में धारा 44AB के तहत जरूरी जानकारी दी जाती है.
AY 2026-27 के लिए टैक्स ऑडिट वाले मामलों में ITR फाइल करने की अंतिम तारीख 31 अक्टूबर 2026 है.
5. किन लोगों को चाहिए Form 3CEB?
ट्रांसफर प्राइसिंग के नियमों के दायरे में आने वाले टैक्सपेयर्स को Form 3CEB की जरूरत पड़ सकती है. यह फॉर्म एक चार्टर्ड अकाउंटेंट से प्राप्त किया जाता है. इसमें Income Tax Act, 1961 की धारा 92E के तहत आने वाले खास अंतरराष्ट्रीय लेनदेन और निर्दिष्ट घरेलू लेनदेन की जानकारी दी जाती है.
आखिरी दिन तक इंतजार न करें
बिजनेस या प्रोफेशनल इनकम वालों के लिए ITR फाइल करना सिर्फ सही फॉर्म चुनने तक सीमित नहीं है. AIS, Form 26AS, TDS सर्टिफिकेट और अन्य जरूरी दस्तावेजों को पहले से चेक करने से गलतियों से बचा जा सकता है. अगर आपका मामला नॉन-ऑडिट कैटेगरी में आता है, तो AY 2026-27 के लिए ITR फाइल करने की अंतिम तारीख 31 अगस्त 2026 है. वहीं टैक्स ऑडिट वाले मामलों में अंतिम तारीख 31 अक्टूबर 2026 है.
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इसलिए आखिरी दिन का इंतजार करने के बजाय जरूरी दस्तावेजों को पहले से तैयार और चेक कर लेना बेहतर हो सकता है. इससे जल्दबाजी में होने वाली गलतियों और बाद की परेशानी से बचा जा सकता है.
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