नौकरी बदलते ही बदल जाता है PF नंबर, लेकिन UAN क्यों नहीं? जानें अकाउंट मैनेज करने का पूरा तरीका
UAN नौकरीपेशा लोगों के EPF अकाउंट से जुड़ा 12 अंकों का जरूरी नंबर है. नौकरी बदलने पर PF Member ID बदल सकती है, लेकिन UAN वही रहता है. इसके जरिए अलग-अलग नौकरियों के PF रिकॉर्ड जुड़े रहते हैं. UAN Portal से पासबुक, बैलेंस, ट्रांसफर और क्लेम जैसी सुविधाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है.
Highlights
- Universal Account Number नौकरीपेशा लोगों के EPF अकाउंट से जुड़ा 12 अंकों का जरूरी नंबर है.
- नौकरी बदलने पर PF Member ID बदल सकती है.
- UAN Portal से पासबुक, बैलेंस, ट्रांसफर और क्लेम जैसी सुविधाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है.
अगर कोई कर्मचारी नौकरी बदलता है तो उसका PF Member ID बदल सकता है, लेकिन उसका UAN यानी Universal Account Number वही रहता है. यही नंबर अलग-अलग कंपनियों में बने PF अकाउंट को एक पहचान से जोड़ने का काम करता है. EPF के दायरे में आने वाले हर नौकरीपेशा व्यक्ति के लिए UAN काफी महत्वपूर्ण होता है.
UAN एक 12 अंकों का नंबर है, जिसे EPFO यानी Employees’ Provident Fund Organisation जारी करता है. इसे एक ऐसी स्थायी पहचान के तौर पर समझा जा सकता है, जिसके तहत अलग-अलग कंपनियों से जुड़े PF Member ID आते हैं.
नौकरी बदलने पर UAN क्यों नहीं बदलता?
नौकरी बदलने पर कर्मचारी का नया PF Member ID बन सकता है, क्योंकि नई कंपनी के साथ उसका नया PF अकाउंट जुड़ता है. लेकिन कर्मचारी को अपना पुराना UAN नई कंपनी को देना चाहिए. इससे नई नौकरी से जुड़ा PF अकाउंट उसी UAN से लिंक हो जाता है. ऐसे में कर्मचारी के अलग-अलग नौकरियों के PF रिकॉर्ड एक ही पहचान से जुड़े रहते हैं और EPF अकाउंट को संभालना आसान हो जाता है.
सीधे शब्दों में कहें तो एक व्यक्ति का UAN वही रहता है, जबकि नौकरी बदलने पर PF Member ID बदल सकता है.
नौकरीपेशा लोगों के लिए UAN क्यों जरूरी है?
UAN के जरिए EPF से जुड़ी कई चीजों को एक ही पहचान के तहत संभाला जा सकता है. अगर UAN को Aadhaar, PAN और बैंक खाते जैसी KYC जानकारी से सही तरीके से जोड़ा गया है तो कर्मचारी ऑनलाइन कई EPFO सेवाओं का इस्तेमाल कर सकता है.
UAN की मदद से अलग-अलग कंपनियों के PF Member ID को एक साथ जोड़ा जा सकता है. इससे कर्मचारी अपने रोजगार और PF रिकॉर्ड को आसानी से देख सकता है. नौकरी बदलने पर पुरानी और नई PF पहचान को जोड़ने में भी सुविधा होती है.
UAN से मिलने वाली मुख्य सुविधाएं
UAN के जरिए कर्मचारी अलग-अलग PF Member ID से जुड़े रिकॉर्ड को देख सकता है. इसके अलावा EPF अकाउंट से जुड़ी जानकारी और उपलब्ध ऑनलाइन सेवाओं का इस्तेमाल कर सकता है. UAN Member Portal पर कर्मचारी अपने EPF Passbook को देख और डाउनलोड कर सकता है. PF खाते में जमा योगदान और बैलेंस की जानकारी भी देखी जा सकती है.
इसके अलावा कर्मचारी ऑनलाइन PF Transfer Claim जमा कर सकता है. PF से जुड़े क्लेम और निकासी की स्थिति भी ट्रैक की जा सकती है. जरूरत पड़ने पर मोबाइल नंबर और ईमेल जैसी व्यक्तिगत जानकारी अपडेट करने की सुविधा भी उपलब्ध है.
UMANG App से भी बन और एक्टिवेट हो सकता है UAN
नए UAN को Aadhaar-based Face Authentication के जरिए UMANG App पर जनरेट और एक्टिवेट किया जा सकता है. मौजूदा UAN को भी इसी सुविधा के जरिए एक्टिवेट किया जा सकता है.
नई नौकरी जॉइन करते समय क्या करना चाहिए?
नई कंपनी जॉइन करते समय कर्मचारी को अपना मौजूदा UAN जरूर देना चाहिए. इससे नया PF अकाउंट उसी UAN से जुड़ जाएगा और अलग-अलग UAN बनने की समस्या से बचा जा सकेगा. कर्मचारियों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि उनके व्यक्तिगत और KYC से जुड़े विवरण सही और अपडेट हों. एक से ज्यादा UAN बन जाने या इस्तेमाल होने से PF रिकॉर्ड को संभालने में परेशानी हो सकती है.
UAN की सुरक्षा भी जरूरी
UAN से जुड़ी जानकारी को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है. कर्मचारी को अपना UAN, पासवर्ड, OTP, Aadhaar, PAN और बैंक खाते की जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करनी चाहिए. EPFO समय-समय पर लोगों को संदिग्ध कॉल, मैसेज और WhatsApp संदेशों से सावधान रहने की सलाह देता है. ऐसे किसी भी संदिग्ध संदेश के जवाब में भुगतान करने से बचना चाहिए.
सिर्फ नंबर नहीं, PF रिकॉर्ड की पहचान है UAN
UAN को सिर्फ एक नंबर समझने की गलती नहीं करनी चाहिए. यह एक ऐसी केंद्रीय पहचान है, जो अलग-अलग कंपनियों में नौकरी के दौरान बने PF Member ID को आपस में जोड़ने में मदद करती है. नौकरी बदलने के दौरान सही UAN का इस्तेमाल करने और इसके विवरण को अपडेट रखने से EPF रिकॉर्ड को संभालना आसान हो सकता है. इसलिए EPFO के दायरे में आने वाले हर नौकरीपेशा व्यक्ति को अपने UAN की जानकारी रखनी चाहिए और EPF से जुड़े कामों के लिए केवल आधिकारिक EPFO और UMANG प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करना चाहिए.
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