UPI के 10 साल पूरे, ऐसे बनी दुनिया की सबसे बड़ी पेमेंट ताकत

UPI ने 10 साल में भारत के डिजिटल पेमेंट सिस्टम को पूरी तरह बदल दिया है. 2016-17 में 1.78 करोड़ से बढ़कर 2025-26 में 24,162 करोड़ लेनदेन हुए. अब UPI 11 देशों में पहुंच चुका है और वैश्विक रियल टाइम पेमेंट में 49% हिस्सेदारी रखता है.

यूपीआई

Highlights

  • 10 साल में UPI लेनदेन 13,000 गुना तक बढ़ा
  • 2025-26 में 24,162 करोड़ यूपीआई लेनदेन हुए
  • दुनिया के रियल टाइम पेमेंट में 49% हिस्सेदारी UPI की

यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) पिछले 10 साल में भारत में डिजिटल पेमेंट का सबसे बड़ा माध्यम बन गया है. आज लोग चाय-पानी से लेकर बड़े सामान की खरीदारी तक, मोबाइल से कुछ ही सेकंड में यूपीआई के जरिए भुगतान कर रहे हैं. अब यूपीआई को दुनिया में रियल टाइम पेमेंट का एक बड़ा मॉडल भी माना जा रहा है.

10 साल में हजारों गुना बढ़े यूपीआई ट्रांजैक्शन

यूपीआई की शुरुआत 25 अगस्त 2016 को हुई थी. तब से इसने भारत के डिजिटल पेमेंट सिस्टम में बड़ा बदलाव किया है. वित्त मंत्रालय के मुताबिक, वित्त वर्ष 2016-17 में यूपीआई से सिर्फ 1.78 करोड़ लेनदेन हुए थे. वहीं 2025-26 में यह आंकड़ा बढ़कर 24,162 करोड़ से ज्यादा हो गया. यानी करीब 13,000 गुना की बढ़ोतरी हुई.

लेनदेन की रकम में भी जबरदस्त इजाफा हुआ है. 2016-17 में यूपीआई के जरिए करीब 7,000 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ था. 2025-26 में यह बढ़कर करीब 314 लाख करोड़ रुपये हो गया. यानी इस दौरान लेनदेन की रकम 4,000 गुना से ज्यादा बढ़ी है.

जुलाई 2026 में बना नया रिकॉर्ड

साल 2026 यूपीआई के लिए खास रहा. मई 2026 में पहली बार एक महीने में यूपीआई लेनदेन का आंकड़ा 2,320 करोड़ पहुंच गया. इसके बाद जुलाई में यह रिकॉर्ड भी टूट गया. जुलाई में 2,366 करोड़ लेनदेन हुए, जो यूपीआई शुरू होने के बाद किसी एक महीने में सबसे ज्यादा हैं.

यूपीआई से जुड़े बैंकों की संख्या भी बढ़ी

यूपीआई से जुड़ने वाले बैंकों की संख्या में भी लगातार बढ़ोतरी हुई है. शुरुआत यानी 2016-17 में सिर्फ 44 बैंक यूपीआई से जुड़े थे. अब 2025-26 में इनकी संख्या बढ़कर 703 हो गई है.

यूपीआई के जरिए अब लोग एक-दूसरे को पैसे भेजने के साथ दुकानदारों और कारोबारियों को भी आसानी से भुगतान कर रहे हैं. इससे छोटे दुकानदारों और कारोबारियों के लिए डिजिटल पेमेंट अपनाना आसान हुआ है.

दुनिया में भी यूपीआई की पहचान

यूपीआई अब सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के मुताबिक, लेनदेन की संख्या के हिसाब से यूपीआई दुनिया का सबसे बड़ा रियल टाइम पेमेंट सिस्टम है. साल 2025 में दुनिया के कुल रियल टाइम पेमेंट लेनदेन में यूपीआई की हिस्सेदारी करीब 49 प्रतिशत रही.

यूपीआई के जरिए रोजाना 66 करोड़ से ज्यादा लेनदेन होते हैं. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि भारत में डिजिटल भुगतान के लिए यह कितना महत्वपूर्ण बन चुका है.

11 देशों में पहुंचा यूपीआई

भारत में शुरू हुआ यूपीआई अब विदेशों में भी इस्तेमाल किया जा रहा है. फिलहाल यह यूएई, फ्रांस, भूटान, श्रीलंका, नेपाल, सिंगापुर, मॉरीशस, कतर, कंबोडिया, ग्रीस और मालदीव समेत 11 देशों में काम कर रहा है.

सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में यूपीआई को और ज्यादा लोगों और कारोबारियों तक पहुंचाना है. तकनीक, सरकारी नीतियों और वित्तीय समावेशन के जरिए डिजिटल पेमेंट सिस्टम को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है.

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