सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भड़के डोनाल्ड ट्रंप, बोले – ‘यह शर्मनाक’, टैरिफ बहाल करने के लिए बैकअप प्लान है तैयार

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला ट्रंप प्रशासन के लिए बड़ा कानूनी झटका माना जा रहा है. एक तरफ ट्रंप इसे “शर्मनाक” बताते हुए बैकअप प्लान की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ यह मामला अमेरिकी व्यापार नीति और कार्यकारी शक्तियों की सीमाओं पर नई बहस छेड़ चुका है. ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि प्रशासन किस कानूनी रास्ते से अपने टैरिफ एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश करता है.

डोनाल्ड ट्रंप Image Credit:

अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पिछले साल लागू किए गए ग्लोबल टैरिफ के खिलाफ फैसला सुनाया है. इस निर्णय के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को शर्मनाक बताया है. CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, व्हाइट हाउस में गवर्नरों के साथ बैठक के दौरान ट्रंप ने कहा कि टैरिफ उपायों को दोबारा लागू करने के लिए उनके पास बैकअप प्लान तैयार है.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर ट्रंप की तीखी प्रतिक्रिया

रिपोर्ट के मुताबिक, गवर्नरों के साथ वर्किंग ब्रेकफास्ट के दौरान ट्रंप फैसले से नाराज दिखे. उन्होंने यूनाइटेड स्टेट के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को “डिस्ग्रेस” यानी शर्मनाक बताया. रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रंप ने संकेत दिया कि प्रशासन पहले से ही वैकल्पिक रास्तों पर विचार कर रहा है. ट्रंप ने मौजूद लोगों से कहा कि उनके दिमाग में बैकअप प्लान है, जिसके जरिए टैरिफ उपायों को फिर से लागू किया जा सकता है.

टैरिफ पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई में 6–3 के बहुमत से ट्रंप के ग्लोबल टैरिफ को खारिज कर दिया. कोर्ट ने कहा कि ट्रंप ने International Emergency Economic Powers Act (IEEPA) का इस्तेमाल करके अपनी शक्तियों से आगे बढ़ने की कोशिश की. कोर्ट का साफ मत था कि IEEPA राष्ट्रीय आपात स्थितियों के लिए बना कानून है, जिसका उपयोग व्यापक आयात शुल्क लगाने के लिए नहीं किया जा सकता. यह फैसला ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में कार्यकारी शक्तियों पर एक बड़ी न्यायिक रोक के रूप में देखा जा रहा है.

कानूनी चुनौती और राज्यों का विरोध

रिपोर्ट के मुताबिक, इन टैरिफ उपायों को तीन अलग-अलग मुकदमों में चुनौती दी गई थी. पांच छोटे आयात कारोबारियों और 12 डेमोक्रेटिक झुकाव वाले राज्यों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था. इन राज्यों में एरिजोना, कोलोराडो, कनेक्टिकट, डेलावेयर, इलिनोइस, मेन, मिनेसोटा, नेवाडा, न्यू मैक्सिको, न्यूयॉर्क, ओरेगन और वर्मोंट शामिल थे. निचली अदालतों ने पहले ही संकेत दिया था कि ट्रंप ने कांग्रेस द्वारा दी गई सीमाओं से आगे कदम उठाया.

IEEPA के इस्तेमाल पर विवाद

दरअसल अमेरिकी संविधान के तहत टैक्स और टैरिफ लगाने का अधिकार कांग्रेस के पास है. CNN की रिपोर्ट बताती है कि पहले के राष्ट्रपति IEEPA का इस्तेमाल मुख्य रूप से विदेशी देशों पर प्रतिबंध या संपत्तियां फ्रीज करने के लिए करते रहे हैं.
ट्रंप पहले ऐसे राष्ट्रपति बने जिन्होंने इसी कानून का उपयोग व्यापक टैरिफ लागू करने के लिए किया. हालांकि, कानून में टैरिफ का सीधा उल्लेख नहीं है. प्रशासन का तर्क था कि “regulate” शब्द के तहत आयात पर कंट्रोल और शुल्क लगाया जा सकता है.

‘लिबरेशन डे’ से ‘रिसिप्रोकल टैरिफ’ तक

रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने टैरिफ को अपनी आर्थिक और विदेश नीति का केंद्रीय हथियार बनाया. 2 अप्रैल 2025 को उन्होंने “Liberation Day” का ऐलान करते हुए कई देशों पर “reciprocal tariffs” लगाए. फरवरी और मार्च 2025 में ट्रंप ने चीन, कनाडा और मैक्सिको पर भी IEEPA के तहत टैरिफ लागू किए. इसके पीछे फेंटेनाइल और अवैध ड्रग तस्करी को वजह बताया गया.

आर्थिक असर और सरकारी आंकड़े

रिपोर्ट के अनुसार, Congressional Budget Office के अर्थशास्त्रियों का अनुमान था कि यदि मौजूदा टैरिफ जारी रहते, तो अगले दशक में हर साल लगभग 300 बिलियन डॉलर का राजस्व मिल सकता था. ट्रेजरी डेटा के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2025 में नेट कस्टम ड्यूटी रिसीट्स रिकॉर्ड 195 बिलियन डॉलर तक पहुंच गईं.

आगे क्या रास्ता अपनाएगा प्रशासन

हालांकि सुप्रीम कोर्ट का फैसला IEEPA के तहत लगाए गए टैरिफ को अमान्य करता है, लेकिन यह प्रशासन को दूसरे व्यापार कानूनों के इस्तेमाल से नहीं रोकता. CNN की रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट सहित प्रशासनिक अधिकारी वैकल्पिक कानूनी प्रावधानों पर विचार कर रहे हैं. हालांकि, ये विकल्प IEEPA जितने तेज और लचीले नहीं माने जा रहे.

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