E20 Petrol Issue : कैसे खत्म होगा एथेनॉल वाले तेल का बवाल, लोग कैसे खरीदेंगे कार?
भारत में पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की योजना का उद्देश्य कच्चे तेल के आयात को कम करना, किसानों की आय बढ़ाना और प्रदूषण घटाना है. सरकार ने E20, E85 और E100 जैसे ईंधनों को बढ़ावा देने की कोशिश की, लेकिन यह योजना उम्मीद के अनुसार आगे नहीं बढ़ सकी. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि ऐसे ईंधन का उपयोग करने वाली गाड़ियां अभी बहुत कम हैं और उनके लिए पर्याप्त पेट्रोल पंप भी उपलब्ध नहीं हैं. कई लोगों का कहना है कि पुरानी गाड़ियों में एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से माइलेज कम हो सकता है और रखरखाव का खर्च बढ़ सकता है. हालांकि सरकार और कुछ वाहन कंपनियां इन दावों से सहमत नहीं हैं, फिर भी लोगों में भ्रम बना हुआ है.
इसके अलावा, नई तकनीक वाली गाड़ियां महंगी हैं और उनके लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर भी पूरी तरह विकसित नहीं हुआ है. जैसे इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग स्टेशन अभी पर्याप्त नहीं हैं, वैसे ही अधिक एथेनॉल वाले ईंधन के लिए भी पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं. इसलिए विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को पहले मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और उचित कीमत की व्यवस्था करनी चाहिए, फिर नई योजनाओं को बड़े स्तर पर लागू करना चाहिए. इससे लोगों का भरोसा बढ़ेगा और नई तकनीक को अपनाना आसान होगा.
