डीजल और ATF पर फिर टैक्स बढ़ा, पेट्रोल पर कोई बदलाव नहीं, जानें क्यों लिया गया फैसला?
सरकार ने मार्च में पहली बार डीजल और एटीएफ के निर्यात पर यह शुल्क लगाया था. इसके बाद पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और ग्लोबल एनर्जी मार्केट में लगातार बदलते हालात को देखते हुए इन दरों में कई बार संशोधन किया गया है. सरकार समय-समय पर अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों और घरेलू उपलब्धता की समीक्षा कर टैक्स दरों में बदलाव करती रही है.

केंद्र सरकार ने डीजल और हवाई जहाजों में इस्तेमाल होने वाले ईंधन (एटीएफ) के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में बढ़ोतरी कर दी है. वहीं, पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाले शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है. वित्त मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार नई दरें 16 जून से लागू हो गई हैं.
क्या बदला है?
सरकार ने डीजल के निर्यात पर लगने वाले विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) को 13.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 14 रुपये प्रति लीटर कर दिया है. वहीं, एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) यानी विमान ईंधन के निर्यात पर शुल्क 9.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 12.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है. पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाला शुल्क 1.5 रुपये प्रति लीटर पर पहले की तरह बरकरार रखा गया है. इसके अलावा घरेलू बाजार में बिकने वाले पेट्रोल और डीजल पर कोई बदलाव नहीं किया गया है.
सरकार ने यह फैसला क्यों लिया?
सरकार का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी जियो-पॉलिटिकल टेंशन और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच देश में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना जरूरी है. हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की दिशा में प्रगति हुई है, लेकिन स्थिति अभी पूरी तरह स्थिर नहीं मानी जा रही है. ऐसे में सरकार नहीं चाहती कि तेल कंपनियां अधिक मुनाफे के लिए घरेलू जरूरतों की बजाय निर्यात को प्राथमिकता दें.
विंडफॉल टैक्स क्या होता है?
विंडफॉल टैक्स एक अतिरिक्त कर होता है, जिसे सरकार तब लगाती है जब किसी क्षेत्र या कंपनी को अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण अचानक ज्यादा मुनाफा होने लगता है. कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आने पर रिफाइनिंग कंपनियों को निर्यात से अतिरिक्त लाभ मिलता है. ऐसे मुनाफे पर नियंत्रण रखने और घरेलू बाजार की जरूरतों को सुरक्षित करने के लिए सरकार यह टैक्स लगाती है.
पहले भी हो चुके हैं बदलाव
सरकार ने मार्च में पहली बार डीजल और एटीएफ के निर्यात पर यह शुल्क लगाया था. इसके बाद पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और ग्लोबल एनर्जी मार्केट में लगातार बदलते हालात को देखते हुए इन दरों में कई बार संशोधन किया गया है. सरकार समय-समय पर अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों और घरेलू उपलब्धता की समीक्षा कर टैक्स दरों में बदलाव करती रही है.
आम लोगों पर क्या असर होगा?
फिलहाल इस फैसले का आम उपभोक्ताओं पर सीधा असर पड़ने की संभावना नहीं है, क्योंकि घरेलू बाजार में बिकने वाले पेट्रोल और डीजल पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगाया गया है. सरकार का कहना है कि इस कदम का मुख्य उद्देश्य देश के भीतर ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना और किसी संभावित आपूर्ति संकट से बचाव करना है. इससे घरेलू बाजार में ईंधन की सप्लाई बनाए रखने में मदद मिलेगी.