आजाद भारत का पहला बजट कितने करोड़ का था, सबसे ज्यादा खर्च किस सेक्टर पर किया गया था? जानें किसने किया था पेश
स्वतंत्र भारत का पहला बजट 26 नवंबर 1947 पेश किया गया था. यह बजट देश के विभाजन के बाद पैदा हुई आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों से निपटने पर केंद्रित था. कुल खर्च 197 करोड़ रुपये और इनकम 171 करोड़ रुपये आंकी गई थी.
First Budget of India: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक जनवरी को देश का बजट पेश करेंगी. बजट से आम लोगों को हर साल की तरह इस साल भी काफी उम्मीदें हैं. बजट के दौरान वित्त मंत्री देश की इनकम और खर्च का पूरा लेखा जोखा पेश करेंगी. जैसे- जैसे बजट की तारीख नजदीक आ रही है वैसे वैसे इसे लेकर आम लोगों के बीच चर्चा तेज हो गई है. कई लोग यह जानने को उत्सुक हैं कि देश का पहला बजट कैसा था और उस समय कुल बजट कितना पेश किया गया था. आइए जानते हैं भारत के पहले बजट से जुड़ी पूरी जानकारी.
भारत का पहला बजट
आजादी के तुरंत बाद भारत को कई गंभीर आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा था. देश का विभाजन हो चुका था, लाखों शरणार्थी भारत आ रहे थे और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना सबसे बड़ी जरूरत थी. ऐसे माहौल में स्वतंत्र भारत का पहला बजट पेश किया गया. सरकार का फोकस तत्काल जरूरतों पर था. इसी बजट ने आगे की आर्थिक दिशा तय करने की नींव रखी.
कब और किसने पेश किया
स्वतंत्र भारत का पहला बजट वित्त मंत्री आर के शनमुखम चेट्टी ने पेश किया था. यह बजट 26 नवंबर 1947 को संसद में रखा गया. यह बजट 15 अगस्त 1947- 31 मार्च 1948 तक की अवधि के लिए था. यानी यह बजट पूरे साल का नहीं बल्कि साढ़े सात महीने का था. उस समय सरकार को तुरंत फैसले लेने थे. इसलिए बजट को जरूरतों के हिसाब से रखा गया था.
कितने रुपये हुए थे खर्च
पहले बजट में सरकार का कुल खर्च लगभग 197 रुपये रखा गया था. वहीं कुल इनकम करीब 171 रुपये आंकी गई. इस तरह सरकार को लगभग 26 करोड़ रुपये के घाटे का अनुमान था. यह घाटा उस समय की परिस्थितियों को देखते हुए स्वाभाविक माना गया. इसलिए सरकार ने घाटे के बावजूद जरूरी खर्च को प्राथमिकता दी.
रक्षा क्षेत्र को सबसे बड़ा हिस्सा
पहले बजट में सबसे बड़ा हिस्सा रक्षा क्षेत्र को दिया गया. डिफेंस के लिए करीब 93 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया. यह कुल बजट का लगभग आधा हिस्सा था. विभाजन के बाद देश में तनाव और सुरक्षा चुनौतियां बनी हुई थीं. सेनाओं के पुनर्गठन और सीमाओं की सुरक्षा जरूरी थी. इसी कारण रक्षा पर इतना अधिक खर्च किया गया.
शरणार्थी समस्या का फोकस
विभाजन के बाद लाखों लोग भारत आए जिन्हें बसाने की जिम्मेदारी सरकार पर थी. शरणार्थियों की राहत और पुनर्वास के लिए करीब 22 करोड़ रुपये रखे गए. इसके साथ ही भोजन की कमी भी एक बड़ी समस्या थी. देश को अनाज के लिए आयात पर निर्भर रहना पड़ रहा था. इसलिए अनाज पर सब्सिडी के लिए भी बजट में प्रावधान किया गया.
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डेवलपमेंट के लिए 70 करोड़
पहले बजट में विकास को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया गया. सामान्य कैपिटल जरूरतों और विकास योजनाओं के लिए लगभग 70 रुपये रखे गए. इसमें केंद्र और राज्यों की बुनियादी जरूरतें शामिल थीं. हालांकि यह राशि सीमित थी. फिर भी यह संकेत था कि सरकार आगे चलकर विकास पर ध्यान देगी. कुल मिलाकर यह बजट देश को स्थिर करने का एक जरूरी कदम था.