देश से विदेश तक सस्ता हुआ सोना, चांदी की कीमतों का ऐसा है हाल; जानें- आज का रेट

Gold-Price Today: ट्रेडर्स ने कहा कि बुलियन पर दबाव बना रहा, क्योंकि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने महंगाई की चिंता बढ़ा दी, जिससे US ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड और डॉलर में बढ़ोतरी हुई. मिडिल ईस्ट में बड़े संघर्ष की आशंका फिर से बढ़ गई है.

सोने-चांदी की कीमतें. Image Credit: Canva/ Money9

Gold-Price Today: बुधवार को लगातार तीसरे दिन सोने की कीमतों में गिरावट आई. राष्ट्रीय राजधानी में सोना 800 रुपये सस्ता होकर 1.48 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया. इसकी वजह कमजोर ग्लोबल ट्रेंड और वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में उछाल थी, जिससे निवेशकों का भरोसा कम हुआ.

सोने की कीमतें

99.9 फीसदी प्योरिटी वाले सोने की कीमत मंगलवार के 1,49,250 रुपये प्रति 10 ग्राम के क्लोजिंग लेवल से 800 रुपये घटकर 1,48,450 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी टैक्स सहित) हो गई.

चांदी की कीमतें स्थिर

हालांकि, चांदी की कीमतें 2,39,800 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी टैक्स सहित) पर स्थिर रहीं. ट्रेडर्स ने कहा कि बुलियन पर दबाव बना रहा, क्योंकि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने महंगाई की चिंता बढ़ा दी, जिससे US ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड और डॉलर में बढ़ोतरी हुई.

क्यों आई कीमतों में गिरावट?

HDFC सिक्योरिटीज के कमोडिटीज सीनियर एनालिस्ट सौमिल गांधी ने कहा, ‘बुधवार को सोने की कीमतों में गिरावट जारी रही. विदेशी बाजार में कमजोरी और जियो-पॉलिटिकल तनाव बढ़ने व कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के कारण कीमती मेटल्स के प्रति निवेशकों का भरोसा कम हुआ.’

इंटरनेशनल मार्केट में गोल्ड-सिल्वर

इंटरनेशनल मार्केट में स्पॉट गोल्ड 49.46 डॉलर या 1.2 फीसदी गिरकर 4,056.24 डॉलर प्रति औंस पर आ गया और चांदी की कीमत 58.61 डॉलर प्रति औंस हो गई.

स्पॉट गोल्ड पर गिरावट का दबाव

मिराए एसेट शेयरखान के कमोडिटीज हेड प्रवीण सिंह ने कहा, ‘US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ अंतरिम शांति समझौते को ‘खत्म’ घोषित करने के बाद बुधवार को ग्लोबल मार्केट में स्पॉट गोल्ड पर फिर से गिरावट का दबाव बना है. इससे मिडिल ईस्ट में बड़े संघर्ष की आशंका फिर से बढ़ गई है.’

तेल की कीमतों में उछाल

उन्होंने कहा कि US और ईरान के बीच नए तनाव से कच्चे तेल की कीमतें लगभग 7 फीसदी तक बढ़ गई हैं. साथ ही, ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड और डॉलर इंडेक्स भी मजबूत हुए हैं, क्योंकि उम्मीद है कि ऊर्जा की ऊंची कीमतें महंगाई बढ़ा सकती हैं और ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रख सकती हैं.

ऑगमोंट में रिसर्च हेड रेनिशा चैनानी ने कहा, ‘निवेशक फेडरल रिजर्व की 16-17 जून की FOMC मीटिंग के मिनट्स का भी इंतजार कर रहे थे, जो आज आने वाले हैं. इससे चेयर केविन वॉर्श के तहत ब्याज दरों की दिशा के बारे में नए संकेत मिल सकते हैं.’

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