IMF ने ग्लोबल ग्रोथ का अनुमान 3.1 फीसदी से घटाकर 3% किया, बताया इन दो फैक्टर्स से प्रभावित हो रहा प्रदर्शन

इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड ने कहा कि ये अनुमान '2024-25 में देखे गए 3.5 फीसदी के औसत से कम हैं और अप्रैल 2026 के वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक (WEO) के अनुमानों की तुलना में कुल मिलाकर लगभग वैसे ही हैं.'

ग्लोबल ग्रोथ का अनुमान. Image Credit: CANVA

इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) ने बुधवार को 2026 के लिए अपनी ग्लोबल ग्रोथ का अनुमान 3.1 फीसदी से घटाकर 3 फीसदी कर दिया. उसने 2027 के लिए भी ग्लोबल ग्रोथ का अनुमान 3.4 फीसदी लगाया है. IMF ने कहा कि ये अनुमान ‘2024-25 में देखे गए 3.5 फीसदी के औसत से कम हैं और अप्रैल 2026 के वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक (WEO) के अनुमानों की तुलना में कुल मिलाकर लगभग वैसे ही हैं.’

वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक अपडेट

जुलाई के लिए ‘वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक अपडेट’ नाम की रिपोर्ट में कहा गया है कि तेज मांग के कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को तेजी से अपनाने से वेस्ट एशिया में युद्ध के आर्थिक असर की कुछ हद तक भरपाई हुई है. इसमें ग्लोबल इकोनॉमी को ‘युद्ध और टेक्नोलॉजी के विरोधाभासी हालात’ में फंसी हुई बताया गया है.

आर्थिक प्रदर्शन के दो फैक्टर्स

IMF के अनुसार, देशों का आर्थिक प्रदर्शन तेजी से दो फैक्टर्स से तय हो रहा है. युद्ध के कारण ऊर्जा की कीमतों में आए उछाल का उन पर कितना असर पड़ा है और ग्लोबल टेक्नोलॉजी वैल्यू चेन में उनकी स्थिति क्या है.

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘संघर्ष वाले इलाके से बाहर ऊर्जा निर्यात करने वाले देशों को व्यापार की अनुकूल शर्तों का फायदा मिलता है, जबकि टेक्नोलॉजी से जुड़ी तेजी में शामिल अर्थव्यवस्थाओं में गतिविधियां मजबूत होती हैं, भले ही वे ऊर्जा का आयात करती हों.’ इसके उलट, ‘टेक्नोलॉजी वैल्यू चेन में सीमित भागीदारी वाली ऊर्जा आयात करने वाली अर्थव्यवस्थाओं में गतिविधियां कमजोर पड़ जाती हैं.’

धीमी हो सकती है रफ्तार

IMF ने कहा कि ग्लोबल इकॉनमी ने अब तक युद्ध के झटके का सामना उम्मीद से बेहतर तरीके से किया है. उसने कहा कि कमोडिटी की कीमतों, महंगाई की उम्मीदों और फाइनेंशियल हालात जैसे अहम क्षेत्रों पर इसका असर काफी हद तक सीमित रहा है. हालांकि, उसने चेतावनी दी कि ये सुरक्षा उपाय अस्थायी हैं और भविष्य के संकेत बताते हैं कि आगे रफ्तार धीमी हो सकती है.

हालांकि, ‘असर अभी शुरुआती दौर में है- कमर्शियल और स्ट्रैटेजिक डीस्टॉकिंग ने एनर्जी सप्लाई में कमी से अस्थायी राहत दी है, जबकि सप्लाई चेन पर दबाव और मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स जैसे भविष्य के संकेत बताते हैं कि आगे रफ्तार धीमी हो सकती है और कुछ देशों को दूसरों की तुलना में अधिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है.’

हेडलाइन महंगाई में हो सकता है इजाफा

फंड को उम्मीद है कि ग्लोबल हेडलाइन महंगाई 2025 में 4.1% से बढ़कर 2026 में 4.7% हो जाएगी,और फिर 2027 में घटकर 3.9% हो जाएगी. इससे महंगाई कम होने के उस ट्रेंड में रुकावट आएगी जो 2024 की शुरुआत से चल रहा था. ग्लोबल ट्रेड की रफ्तार भी धीमी होने की उम्मीद है. ट्रेड वॉल्यूम में बढ़ोतरी 2025 में 5% से तेजी से घटकर 2026 में 3.5% होने और फिर 2027 में बढ़कर 4.3% होने का अनुमान है.

आउटलुक

उसने कहा, ‘ये हालात पहले की गई अधिक खरीदारी (फ्रंट-लोडिंग) और टैरिफ के असर के साथ-साथ ट्रेड लिंकेज और प्रोडक्शन चेन में धीरे-धीरे हो रहे बदलाव को दिखाते हैं. इन बदलावों में ट्रेड डायवर्जन, री-रूटिंग और टेक्नोलॉजी से जुड़े ट्रेड फ्लो में तेजी से बढ़ोतरी जैसी चीजें शामिल हैं.’ आगे देखते हुए, IMF ने कहा कि आउटलुक के लिए जोखिम ‘अप्रैल की तुलना में अधिक संतुलित हैं, लेकिन अभी भी गिरावट की ओर झुके हुए हैं.’

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