HSBC ने भारतीय इक्विटीज की रेटिंग घटाकर ‘अंडरवेट’ की, तेल की बढ़ती कीमतों को बताया खतरा

पश्चिम एशिया में तनाव के कारण तेजी से बढ़ती ऊर्जा कीमतें, देश की अर्निंग में हो रही रिकवरी की स्थिरता के लिए खतरा बन सकती हैं. ब्रोकरेज ने कहा कि हालांकि घरेलू इक्विटी के वैल्यूएशन अपने ऊंचे स्तरों से नीचे आए हैं, लेकिन जैसे-जैसे कमाई के अनुमानों में कटौती की खबरें सामने आएंगी.

भारतीय इक्विटीज की ग्रोथ Image Credit: Anton Petrus/Moment/ Getty Images

HSBC ने भारतीय इक्विटीज की रेटिंग को ‘न्यूट्रल’ से घटाकर ‘अंडरवेट’ कर दिया है. एक महीने से भी कम समय में यह दूसरी कटौती है, क्योंकि ब्रोकरेज को आशंका है कि पश्चिम एशिया में तनाव के कारण तेजी से बढ़ती ऊर्जा कीमतें, देश की अर्निंग में हो रही रिकवरी की स्थिरता के लिए खतरा बन सकती हैं. फरवरी के आखिर में जब से संघर्ष शुरू हुआ है, ब्रेंट क्रूड की कीमतें 42 फीसदी ऊपर चली गई हैं और अभी 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर ट्रेड कर रहा है.

सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला बाजार

इससे दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल आयातक भारत के लिए महंगाई और ग्रोथ के जोखिम बढ़ गए हैं. HSBC ने गुरुवार को एक नोट में कहा, ‘मौजूदा मैक्रो हालात में भारत अब अपने उत्तर-पूर्वी एशियाई साथियों के मुकाबले कम आकर्षक लग रहा है.’ इस साल अब तक बेंचमार्क निफ्टी50 और सेंसेक्स में 6.7 फीसदी और 7.9 फीसदी की गिरावट आई है , जो दुनिया भर में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले बाजारों में से हैं.

कच्चे तेल की कीमतों का अर्निंग पर असर

HSBC को उम्मीद है कि जून और सितंबर तिमाही के ज्यादातर समय में तेल और गैस बाजार टाइट बने रहेंगे. इस बैकग्राउंड में, उसे उम्मीद है कि 2026 के लिए अर्निंग के अनुमान, जो अभी सालाना आधार पर 16 फीसदी की बढ़त पर हैं, को घटाकर कम किया जाएगा. कच्चे तेल की कीमतों में 20 फीसदी की बढ़ोतरी से अर्निंग की बढ़त में 1.5 फीसदी अंकों की कमी आ सकती है.

विदेशी निवेशकों की चिंताएं

ब्रोकरेज ने कहा कि हालांकि घरेलू इक्विटी के वैल्यूएशन अपने ऊंचे स्तरों से नीचे आए हैं, लेकिन जैसे-जैसे कमाई के अनुमानों में कटौती की खबरें सामने आएंगी, वे फिर से महंगे लग सकते हैं. इसने विदेशी निवेशकों की चिंताओं को भी उजागर किया, जिसमें रुपये के डेप्रिसिएशन का जोखिम भी शामिल है. ऐसा तब हो सकता है जब भारतीय सॉफ्टवेयर सर्विसेज पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रभाव से जुड़ी बढ़ती चिंताओं के बीच तेल की कीमतें ऊंची बनी रहें.

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने पिछले साल 18.9 अरब डॉलर के शेयर बेचने के बाद, 2026 में अब तक भारतीय शेयर 18.5 अरब डॉलर में बेच दिए हैं.

घरेलू निवेश बना मददगार

हालांकि, घरेलू निवेश, खासकर SIPs के जरिए, मददगार बना हुआ है, HSBC ने कहा कि सीजनल तौर पर कमजोर पहले क्वार्टर के बाद IPO की मजबूत एक्टिविटी के लिए विदेशी मांग में फिर से तेजी लाने की जरूरत पड़ सकती है.

इसमें आगे कहा गया कि प्राइवेट बैंकों, बेस मेटल्स और हेल्थकेयर में अभी भी चुनिंदा अवसर मौजूद हैं, लेकिन भारतीय इक्विटीज के लिए ब्रॉडर रेलेटिव स्थिति कमजोर हुई है.

यह भी पढ़ें: इन 4 कंपनियों के ऑर्डर बुक के सामने बौना पड़ गया मार्केट कैप! Indian Railway है क्लाइंट, 1450% तक उछले शेयर

Latest Stories

भारत अगले 90 दिनों में जर्मनी के साथ सबसे बड़ी डिफेंस डील के लिए तैयार, 8 अरब डॉलर के सबमरीन समझौते पर नजर

Apple को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के बावजूद यहां चूक गए Tim Cook, इस प्रोडक्ट का लॉन्च बना सबसे बड़ा अफसोस

टाटा ग्रुप के इस शेयर पर ब्रोकरेज है बुलिश, जानें- कितना दिया टारगेट; चौथी तिमाही में रहा जोरदार प्रदर्शन

अब ATF में ब्लेंड होंगे सिंथेटिक हाइड्रोकार्बन, जानें क्या है यह नई तकनीक और क्यों लिया गया फैसला

पहली बार प्राइवेट सेक्टर के लिए खुल सकता है BSNL CMD का पद, सरकार बाहरी विकल्प पर कर रही विचार

₹5 हजार सस्ती हुई चांदी, सोने में भी नरमी, 24-22-18 कैरेट गोल्ड के लेटेस्ट रेट, जानें अपने शहर के ताजा भाव