RBI ने REIT और InvIT को कर्ज देने के नियम किए आसान, बैंकों के लिए जारी किए नए गाइडलाइन

भारतीय रिजर्व बैंक ने REIT और InvIT को कर्ज देने के नियमों में राहत देते हुए नए दिशा निर्देश जारी किए हैं. अब कमर्शियल बैंक निर्धारित शर्तों के तहत इन निवेश ट्रस्टों को फंड कर सकेंगे. RBI ने पात्रता नियमों में बदलाव करते हुए कैश फ्लो आधारित मानदंड अपनाया है. हालांकि जमीन खरीद और निर्माणाधीन एसेट के लिए फंडिंग पर रोक बरकरार रखी गई है.

भारतीय रिजर्व बैंक ने REIT और InvIT को कर्ज देने के नियमों में राहत देते हुए नए दिशा निर्देश जारी किए हैं. Image Credit: @tv9

RBI Guidelines: भारतीय रिजर्व बैंक ने REIT और InvIT को कर्ज देने से जुड़े नियमों में कुछ राहत देते हुए नए दिशा निर्देश जारी किए हैं. केंद्रीय बैंक ने कहा है कि कमर्शियल बैंक अब इन निवेश ट्रस्टों को अधिक स्पष्ट और संशोधित नियमों के तहत फंडिंग कर सकेंगे. हालांकि इसके साथ रिस्क मैनेजमेंट और सुरक्षा से जुड़े कई प्रावधान भी बनाए रखे गए हैं. RBI ने मसौदा नियमों पर मिले सुझावों की समीक्षा के बाद अंतिम नियम जारी किए हैं. नए नियमों का उद्देश्य निवेश को बढ़ावा देना और वित्तीय व्यवस्था में संतुलन बनाए रखना है.

REIT और InvIT को कर्ज देने में मिली राहत

RBI ने बैंकों को REIT और InvIT को कर्ज देने की अनुमति दी है. इससे रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में निवेश को मजबूती मिलने की उम्मीद है. केंद्रीय बैंक ने कहा कि बैंक निर्धारित शर्तों के तहत इन संस्थाओं को वित्तीय सहायता दे सकेंगे. हालांकि बैंकों को रिस्क मैनेजमेंट और रेगुलेटरी स्टैंडर्ड का पालन करना होगा. इससे वित्तीय क्षेत्र में ट्रांसपेरेंसी और स्थिरता बनाए रखने का प्रयास किया गया है.

विदेशी शाखाओं को भी मिली भागीदारी की अनुमति

नए नियमों के तहत भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाएं भी REIT फाइनेंसिंग में भाग ले सकेंगी. हालांकि उनकी हिस्सेदारी कुल फंडिंग का 20 फीसदी से अधिक नहीं हो सकती. RBI ने इसके लिए 150 फीसदी जोखिम भार निर्धारित किया है. इससे विदेशी बाजारों में भी भारतीय बैंकों की भागीदारी बढ़ेगी. साथ ही जोखिम को नियंत्रित रखने के लिए लिमिट तय की गई है.

पात्रता नियमों में किया गया बदलाव

पहले प्रस्तावित नियमों में तीन साल के संचालन का अनुभव जरूरी था. अब RBI ने इसे बदलकर एसेट के कैश फ्लो से जोड़ दिया है. नए नियम के अनुसार कम से कम 80 प्रतिशत एसेट से एक साल तक सकारात्मक कैश फ्लो होना चाहिए. इससे अधिक परियोजनाएं पात्रता के दायरे में आ सकेंगी. उद्योग जगत ने इस बदलाव का स्वागत किया है.

कर्ज जोखिम और भुगतान नियमों पर जोर

RBI ने तनावग्रस्त विशेष प्रयोजन इकाइयों को फंडिंग देने पर कुछ प्रतिबंध लगाए हैं. इसके अलावा बुलेट और बैलून भुगतान संरचना पर रोक बरकरार रखी गई है. हालांकि कैश फ्लो के अनुसार चरणबद्ध भुगतान की अनुमति दी गई है. इससे उधारकर्ताओं को कुछ लचीलापन मिलेगा, जबकि बैंकों के हित भी सुरक्षित रहेंगे.

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एक्सपोजर लिमिट और रिस्क

केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि किसी बैंक का REIT और InvIT तथा उनसे जुड़ी इकाइयों में कुल एक्सपोजर परिसंपत्ति मूल्य के 49 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा. REIT से जुड़े एक्सपोजर पर 100 प्रतिशत जोखिम भार लागू होगा, जबकि InvIT पर कॉरपोरेट लेंडिंग के अनुसार जोखिम भार लगाया जाएगा. RBI ने यह भी कहा कि 1 अप्रैल 2027 से पूंजी शुल्क ढांचे के तहत नए नियम लागू होंगे. इससे बैंकिंग प्रणाली में रिस्क मैनेजमेंट को और मजबूत किया जा सकेगा.