SIP रोकना पड़ सकता है जिंदगी की सबसे महंगी भूल! एक्सपर्ट ने बताई चौंकाने वाली वजह
SIP बीच में रोकना सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि कंपाउंडिंग का कीमती समय भी छीन लेता है. विशेषज्ञों के मुताबिक कुछ महीनों का ब्रेक भी रिटायरमेंट, बच्चों की पढ़ाई और अन्य बड़े वित्तीय लक्ष्यों को कई साल पीछे धकेल सकता है.
आज के समय में म्यूचुअल फंड में निवेश का सबसे लोकप्रिय तरीका सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) है. हर महीने एक तय रकम निवेश करने से धीरे-धीरे बड़ा फंड तैयार किया जा सकता है. लेकिन कई निवेशक आर्थिक जरूरत, बाजार में गिरावट या घबराहट के कारण बीच में SIP बंद कर देते हैं. पहली नजर में यह फैसला मामूली लग सकता है, लेकिन इसका सबसे बड़ा नुकसान पैसों का नहीं बल्कि समय का होता है.
वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि निवेश में खोया हुआ पैसा दोबारा कमाया जा सकता है, लेकिन खोया हुआ समय वापस नहीं आता. यही वजह है कि कुछ महीनों या एक-दो साल के लिए SIP रोकने का असर लंबे समय में आपके रिटायरमेंट, बच्चों की पढ़ाई या घर खरीदने जैसे बड़े वित्तीय लक्ष्यों पर पड़ सकता है.
समय क्यों है सबसे बड़ी पूंजी?
निवेश की दुनिया में कंपाउंडिंग (चक्रवृद्धि) सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है. इसमें सिर्फ आपकी जमा राशि ही नहीं, बल्कि उस पर मिलने वाला रिटर्न भी आगे रिटर्न कमाने लगता है. जितना अधिक समय निवेश को मिलता है, उतनी तेजी से आपकी संपत्ति बढ़ती है.
अगर आप नियमित रूप से SIP जारी रखते हैं तो आपका पैसा कई वर्षों तक कंपाउंडिंग का लाभ उठाता है. लेकिन बीच में निवेश रुकने से यह प्रक्रिया टूट जाती है और भविष्य में बनने वाला बड़ा फंड काफी छोटा हो सकता है.
कुछ महीनों का ब्रेक भी पड़ सकता है महंगा
कई लोग सोचते हैं कि छह महीने या एक साल के लिए SIP रोकने से कोई बड़ा फर्क नहीं पड़ेगा. लेकिन वास्तविकता इससे अलग है. SIP का हर महीना महत्वपूर्ण होता है क्योंकि हर निवेश को बढ़ने के लिए अलग-अलग समय मिलता है.
मान लीजिए कोई निवेशक 20-25 साल के लक्ष्य के साथ SIP कर रहा है. यदि वह शुरुआती वर्षों में कुछ समय के लिए निवेश बंद कर देता है, तो बाद में शुरू की गई SIP को उतना समय नहीं मिल पाता, जितना पहले किए गए निवेश को मिलता. इसका सीधा असर अंतिम कॉर्पस पर पड़ता है.
बाजार गिरने पर SIP बंद करना सही फैसला नहीं
शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव सामान्य बात है. लेकिन अक्सर निवेशक बाजार गिरने पर SIP रोक देते हैं. विशेषज्ञ इसे सबसे बड़ी गलतियों में से एक मानते हैं.
दरअसल, जब बाजार नीचे होता है तो उसी राशि में अधिक यूनिट्स मिलती हैं. बाद में बाजार के सुधरने पर यही यूनिट्स बेहतर रिटर्न देने में मदद करती हैं. इसलिए बाजार में गिरावट के दौरान SIP जारी रखना लंबे समय में फायदेमंद साबित हो सकता है.
वित्तीय लक्ष्य हो सकते हैं पीछे
SIP में रुकावट का असर सिर्फ निवेश पर नहीं, बल्कि आपके पूरे वित्तीय प्लान पर पड़ता है. यदि आपका लक्ष्य 20 साल में रिटायरमेंट फंड तैयार करना या बच्चे की उच्च शिक्षा के लिए पैसा जुटाना है, तो बीच में निवेश रोकने से लक्ष्य हासिल करने में देरी हो सकती है.
कई मामलों में निवेशक को बाद में उसी लक्ष्य तक पहुंचने के लिए हर महीने ज्यादा रकम निवेश करनी पड़ती है. यानी समय की कमी की भरपाई अतिरिक्त निवेश से करनी पड़ती है.
अगर मजबूरी में SIP रोकनी पड़े तो क्या करें?
हर किसी की जिंदगी में ऐसे मौके आ सकते हैं, जब कुछ समय के लिए निवेश जारी रखना मुश्किल हो जाए. ऐसे में घबराकर SIP हमेशा के लिए बंद करने के बजाय कुछ विकल्पों पर विचार किया जा सकता है.
यदि संभव हो तो SIP की राशि कम कर दें, लेकिन निवेश पूरी तरह बंद न करें. कुछ म्यूचुअल फंड हाउस कम राशि से भी SIP जारी रखने की सुविधा देते हैं. इसके अलावा, आर्थिक स्थिति सुधरने पर तुरंत SIP दोबारा शुरू करें और यदि आय बढ़ गई हो तो स्टेप-अप SIP के जरिए हर साल निवेश बढ़ाते रहें. इससे खोए हुए समय की कुछ हद तक भरपाई की जा सकती है.
निवेश में अनुशासन ही सफलता की कुंजी
विशेषज्ञों का मानना है कि सफल निवेशक वही होता है, जो बाजार की तेजी-मंदी से प्रभावित हुए बिना अपने निवेश को लंबे समय तक जारी रखता है. SIP की असली ताकत नियमित निवेश, लंबे समय और कंपाउंडिंग के मेल में छिपी होती है.
इसलिए यदि आपकी आर्थिक स्थिति इसकी अनुमति देती है, तो छोटी-मोटी बाजार गिरावट या अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के कारण SIP रोकने से बचें. याद रखें, निवेश में सबसे बड़ी कीमत अक्सर पैसों की नहीं, बल्कि समय की होती है. जितना अधिक समय आपका पैसा बाजार में रहेगा, उतनी ही अधिक संभावना है कि वह आपके वित्तीय सपनों को पूरा करने में मदद करेगा.
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