भारत-कनाडा के बीच 2.6 अरब डॉलर की यूरेनियम डील, 2026 के अंत तक CEPA फाइनल करने का लक्ष्य; जानें क्या फायदा

भारत और कनाडा ने 2.6 अरब डॉलर के ऐतिहासिक यूरेनियम सप्लाई समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिससे भारत के असैन्य परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को लॉन्ग टर्म यूरेनियम सेफ्टी मिलेगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की वार्ता में 2026 तक CEPA को अंतिम रूप देने, 2030 तक 50 अरब डॉलर व्यापार लक्ष्य, क्रिटिकल मिनरल्स, ग्रीन एनर्जी, AI और शिक्षा सहयोग पर भी सहमति बनी.

भारत-कनाडा यूरेनियम डील Image Credit: @PTI

India-Canada Uranium Deal: भारत और कनाडा ने द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देते हुए 2.6 अरब डॉलर करीब 23 हजार करोड़ रुपये के ऐतिहासिक यूरेनियम सप्लाई समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच हुई व्यापक वार्ता के बाद इस बड़े समझौते की घोषणा की गई. इसके साथ ही दोनों देशों ने व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (Comprehensive Economic Partnership Agreement- CEPA) को तेजी से अंतिम रूप देने पर सहमति जताई है, जिसका लक्ष्य 2026 के अंत तक इसे पूरा करना है.

न्यूक्लियर एनर्जी को मिलेगा लॉन्ग टर्म यूरेनियम सेफ्टी

2.6 अरब डॉलर का यूरेनियम समझौता भारत के असैन्य न्यूक्लियर एनर्जी प्रोग्राम के लिए लॉन्ग टर्म यूरेनियम सप्लाई सुनिश्चित करेगा. यह करार ऐसे समय में हुआ है जब भारत क्लीन और भरोसेमंद एनर्जी सोर्स के विस्तार पर जोर दे रहा है. संयुक्त बयान में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दोनों देश न केवल यूरेनियम सप्लाई में सहयोग बढ़ाएंगे, बल्कि स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) और एडवांस परमाणु रिएक्टर तकनीकों पर भी साथ काम करेंगे. कनाडा, जो दुनिया के प्रमुख यूरेनियम एक्सपोर्टर्स में शामिल है, भारत की एनर्जी जरूरतों को स्थिरता देने में अहम भूमिका निभा सकता है. इस समझौते को भारत की एनर्जी सेफ्टी और कार्बन उत्सर्जन कम करने की रणनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है.

इससे इतर, कैनेडा के पेंशन फंड ने भी भारत में 100 बिलियन डॉलर का निवेश किया है. PMO इंडिया के आधिकारिक एक्स हैंडल से इस बात की जानकारी दी गई. पोस्ट के मुताबिक, इस निवेश को लेकर पीएम मोदी ने कहा कि यह निवेश भारत की ग्रोथ स्टोरी में उनके गहरे विश्वास का प्रतीक है.

50 अरब डॉलर का बिजनेस टारगेट, CEPA पर तेजी

बैठक में आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाई देने पर विशेष जोर रहा. प्रधानमंत्री मोदी ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा. उन्होंने कहा कि आर्थिक सहयोग की पूरी क्षमता को खोलना दोनों देशों की प्राथमिकता है और इसी उद्देश्य से CEPA को तुरंत अंतिम रूप देने का निर्णय लिया गया है. मार्क कार्नी ने भी पुष्टि की कि कनाडा 2026 तक CEPA वार्ता को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है. यह समझौता लागू होने पर व्यापार, निवेश, सेवाओं और बाजार पहुंच के क्षेत्र में व्यापक अवसर पैदा कर सकता है.

अहम समझौते: क्रिटिकल मिनरल्स से लेकर संस्कृति तक

दोनों देशों ने कई समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए. इनमें क्रिटिकल मिनरल्स सहयोग, रिन्यूएबल एनर्जी को बढ़ावा, सप्लाई स्ट्रक्चर की मजबूती और सांस्कृतिक आदान-प्रदान शामिल हैं. क्रिटिकल मिनरल्स पर सहयोग विशेष रूप से अहम है क्योंकि सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहन और क्लीन एनर्जी तकनीकों के लिए इन खनिजों की मांग तेजी से बढ़ रही है. विदेश मंत्री एस. जयशंकर और कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद की उपस्थिति में इन दस्तावेजों का आदान-प्रदान हुआ. दोनों देशों ने व्यापक आर्थिक साझेदारी के लिए टर्म्स ऑफ रेफरेंस पर भी सहमति जताई, जो भविष्य की वार्ताओं का ढांचा तय करेगा.

ग्रीन एनर्जी और जलवायु सहयोग पर जोर

जलवायु परिवर्तन और क्लीन एनर्जी सहयोग भी बातचीत का प्रमुख हिस्सा रहा. प्रधानमंत्री मोदी ने कनाडा के अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) और ग्लोबल बायोफ्यूल एलायंस में शामिल होने के फैसले का स्वागत किया. साथ ही घोषणा की गई कि इस साल भारत-कनाडा रिन्यूएबल एनर्जी और स्टोरेज समिट आयोजित किया जाएगा. यह पहल दोनों देशों को सोलर एनर्जी, बैटरी स्टोरेज और हरित ईंधन के क्षेत्र में संयुक्त प्रोजेक्ट के अवसर दे सकती है.

टेक्नोलॉजी और इनोवेशन

तकनीकी सहयोग को भी नई गति देने पर सहमति बनी. प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और कनाडा को “स्वाभाविक साझेदार” बताते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), क्वांटम टेक्नोलॉजी, सुपरकंप्यूटिंग और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की बात कही. शिक्षा और रिसर्च साझेदारी को मजबूत करने के लिए नए विश्वविद्यालय सहयोग कार्यक्रमों की घोषणा की गई. AI, हेल्थकेयर, कृषि और नवाचार जैसे क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा. कनाडाई विश्वविद्यालयों के भारत में कैंपस खोलने पर भी सहमति बनी है.

जन-से-जन संबंध और सांस्कृतिक जुड़ाव

दोनों देशों ने लोगों के बीच संपर्क को और मजबूत करने पर जोर दिया. एक MoU के तहत सांस्कृतिक सहयोग बढ़ाया जाएगा, जिसमें आदिवासी और स्वदेशी समुदायों के बीच संवाद को भी शामिल किया गया है. यह पहल शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक सहयोग के नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है. मार्क कार्नी 27 फरवरी को भारत पहुंचे थे और यह उनकी पहली आधिकारिक भारत यात्रा है. मुंबई से शुरू हुए उनके दौरे का समापन नई दिल्ली में उच्चस्तरीय वार्ताओं और इंडिया-कनाडा CEO फोरम में भागीदारी के साथ हुआ. दोनों प्रधानमंत्रियों ने व्यापार और निवेश, ऊर्जा, कृषि, शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और वैश्विक मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की. साथ ही क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया गया.

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