80-85 दिनों के लिए कोल स्टॉक मौजूद, सेक्टर में 5 लाख करोड़ के निवेश पर हो रहा है काम: जी. किशन रेड्डी

पर्यावरणीय स्थिरता से जुड़ी चिंताओं पर बात करते हुए मंत्री ने कहा कि सरकार कोयला खनन के मामले में 'प्रगतिशील दृष्टिकोण' अपना रही है. उन्होंने आगे बताया कि इस क्षेत्र में सरकारी और निजी, दोनों ही पक्षों द्वारा 5 लाख करोड़ रुपये के निवेश की योजना बनाई गई है.

WITT शिखर सम्मेलन में जी. किशन रेड्डी. Image Credit: Tv9 Network

WITT Summit 2026: केंद्रीय कोयला और खनन मंत्री जी. किशन रेड्डी ने मंगलवार को कहा कि भारत अनिश्चित समय के बीच भविष्य की संसाधनों की जरूरतों की तैयारी करते हुए, ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर लगातार आगे बढ़ रहा है. TV9 नेटवर्क के ‘What India Thinks Today Summit 2026’ में बोलते हुए, रेड्डी ने कहा कि केंद्र सरकार न कोयला सुरक्षा को बढ़ावा दे रही है, साथ ही महत्वपूर्ण खनिजों के मामले में भी आत्मनिर्भर बनने के प्रयास कर रही है. उन्होंने कहा कि भारत ने कोयले का एक मजबूत बफर तैयार कर लिया है और महत्वपूर्ण खनिजों के आयात पर निर्भरता कम करने के लिए भी आधार तैयार कर रहा है.

आत्मनिर्भर बन रहे हैं हम

जी. किशन रेड्डी ने कहा कि पहले हम दूसरों पर निर्भर थे, लेकिन अब हम आत्मनिर्भर बन रहे हैं. 2014 से पहले कोयले का संकट था, लेकिन आज कोयला ब्लॉकों का आवंटन पूरी पारदर्शिता के साथ किया जा रहा है, और हमारे पास 80-85 दिनों का स्टॉक मौजूद है. उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारत की 70 फीसदी से अधिक बिजली आज भी कोयले पर ही आधारित है.

कोयला क्षेत्र में इनोवेशन पर सरकार के जोर का जिक्र करते हुए रेड्डी ने कहा कि कोयला गैसीकरण को मिशन मोड में आगे बढ़ाया जा रहा है और यह एक प्रमुख नया उद्योग बनकर उभर सकता है.

5 लाख करोड़ रुपये के निवेश की योजना

रेड्डी ने कहा कि हमारे पास अगले 70 साल के लिए कोयले के भंडार मौजूद हैं. कोयला गैसीकरण के जरिए, हम खाद भी बना सकते हैं. हाल ही में, सतह पर गैसीकरण के लिए सात कोयला ब्लॉकों की नीलामी की गई है, आजादी के बाद ऐसा पहली बार हुआ है.

उन्होंने आगे बताया कि इस क्षेत्र में सरकारी और निजी, दोनों ही पक्षों द्वारा 5 लाख करोड़ रुपये के निवेश की योजना बनाई गई है. भारत सतह और जमीन के नीचे, दोनों ही तरह के गैसीकरण पर काम कर रहा है. इसके लिए तकनीक और उपकरण जर्मनी जैसे देशों से मंगाए जा रहे हैं. आने वाले दिनों में यह एक बहुत बड़ा बदलाव लाने वाला साबित होगा.

क्रिटिकल मिनिरल्स: आयात पर निर्भरता कम करना

जरूरी खनिजों के मामले में रेड्डी ने यह मानते हुए कि भारत अभी अपनी जरूरत का लगभग 95 फीसदी हिस्सा आयात करता है. कहा कि इस स्थिति को बदलने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं. रेड्डी ने कहा कि आज हमारे पास जरूरी खनिजों की पर्याप्त मात्रा नहीं है, लेकिन भारत में जल्द ही इनकी खोज शुरू होगी, जिसके बाद खनन का काम होगा.

हम मिशन मोड में काम कर रहे हैं. सरकार अलग-अलग राज्यों में जरूरी खनिजों की प्रोसेसिंग के लिए खास पार्क भी बना रही है, साथ ही लैटिन अमेरिका और अफ्रीका से संसाधन जुटाने में निजी क्षेत्र की भागीदारी को भी बढ़ावा दे रही है.

विकास और पर्यावरण में संतुलन

पर्यावरणीय स्थिरता से जुड़ी चिंताओं पर बात करते हुए मंत्री ने कहा कि सरकार कोयला खनन के मामले में ‘प्रगतिशील दृष्टिकोण’ अपना रही है. उन्होंने कहा, ‘पहले कभी भी किसी एक भी कोयला खदान को वैज्ञानिक तरीके से बंद नहीं किया गया था. अब, हम 147 खाली हो चुकी खदानों को एक योजनाबद्ध तरीके से बंद कर रहे हैं और उन्हें पार्क और खेल के मैदान जैसी सार्वजनिक जगहों में बदल रहे हैं.’ हम देश की जरूरतों और पर्यावरण से जुड़ी चिंताओं के बीच संतुलन बना रहे हैं. नई खदानें विकसित करने के साथ-साथ बंद हो चुकी खदानों में हरियाली वाली जगहें भी बना रहे हैं.

वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में भारत की स्थिति

रेड्डी ने कहा कि वैश्विक ऊर्जा संकटों, जिनमें पश्चिम एशिया संकट से पैदा होने वाले संकट भी शामिल हैं, से निपटने के मामले में भारत कई अन्य देशों की तुलना में बेहतर स्थिति में है. उन्होंने कहा, ‘हमने कोविड संकट के दौरान अपनी क्षमता साबित की है. लोगों के सहयोग से हम मौजूदा वैश्विक चुनौतियों पर भी पार पा लेंगे.’ उन्होंने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने के महत्व पर भी जोर दिया और लॉन्ग टर्म ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया.

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