टूटा सोने में गिरावट का सिलसिला, 1200 रुपये बढ़ा भाव; चांदी की कीमतें स्थिर, जानें- 24 कैरेट वाले गोल्ड का रेट

मंगलवार को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सोने की कीमतों में चार दिन से जारी गिरावट का सिलसिला टूट गया. व्यापारियों ने घरेलू सोने की कीमतों में आई इस तेजी का श्रेय वैश्विक कमोडिटी बाजारों में सुधार और हाल ही में आई भारी गिरावट के बाद निचले स्तरों पर हुई कुछ खरीदारी को दिया.

सोने-चांदी की कीमतें. Image Credit: money9live

सोने-चांदी की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रही है. ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के अनुसार, मंगलवार को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सोने की कीमतों में चार दिन से जारी गिरावट का सिलसिला टूट गया और भाव 1,200 रुपये बढ़कर 1.44 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया, जबकि चांदी की कीमतें 2.30 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर स्थिर रहीं. 99.9 फीसदी प्योरिटी वाला सोना सोमवार को 1,43,600 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी टैक्स सहित) पर बंद हुई थी.

व्यापारियों ने घरेलू सोने की कीमतों में आई इस तेजी का श्रेय वैश्विक कमोडिटी बाजारों में सुधार और हाल ही में आई भारी गिरावट के बाद निचले स्तरों पर हुई कुछ खरीदारी को दिया.

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में, स्पॉट गोल्ड 9 सत्रों की गिरावट के बाद फिर से ऊपर चढ़ा. इसकी कीमत 16.96 डॉलर (या 0.38 प्रतिशत) बढ़कर 4,423.83 डॉलर प्रति औंस हो गई, जबकि चांदी 1.03 प्रतिशत की बढ़त के साथ 69.86 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी.

सावधानी भरी उम्मीद का माहौल है

मीराए एसेट शेयरखान में कमोडिटीज के प्रमुख प्रवीण सिंह ने कहा, ‘लगातार 9 दिनों तक गिरने के बाद, स्पॉट गोल्ड विदेशी बाजारों में लगभग 4,420 डॉलर प्रति औंस पर स्थिर कारोबार कर रहा है. ईरान युद्ध को लेकर सावधानी भरी उम्मीद का माहौल है, क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में ऊर्जा ठिकानों पर होने वाले हमलों पर पांच दिनों के लिए संघर्ष-विराम (सीजफायर) की घोषणा की है.’

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इस संघर्ष-विराम की प्रभावशीलता को लेकर अभी भी संदेह बना हुआ है, जिसके चलते निवेशकों का रुख सतर्क बना हुआ है.

विश्लेषकों का कहना है कि भू-राजनीतिक मोर्चे से मिल रहे मिले-जुले संकेतों के कारण, निकट भविष्य में बुलियन (सोने-चांदी) की कीमतें अस्थिर रह सकती हैं.

सोने की कीमतों पर असर

फरवरी के आखिर में शुरू हुए अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष में कुछ नरमी आने के बावजूद, जिसमें ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई शामिल थी, बुलियन बाजार का रुख सतर्क बना रहा. महंगाई, ऊर्जा की कीमतों में उतार-चढ़ाव, ब्याज दरों के भविष्य और मुद्रा पर पड़ रहे दबाव जैसी व्यापक चिंताओं का असर भी सोने पर लगातार बना रहा.

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