रूसी तेल खरीद में तीसरे नंबर पर फिसला भारत, एक महीने में 30% घटा इंपोर्ट; ट्रंप की सख्ती का असर!
दिसंबर 2025 में भारत ने रूस से तेल और गैस की खरीद में बड़ी कटौती की, जिससे वह दूसरे स्थान से खिसककर तीसरे नंबर पर पहुंच गया. अमेरिकी प्रतिबंध, प्राइस कैप और रिफाइनरियों की रणनीति में बदलाव इसके प्रमुख कारण रहे. जानें किस देश ने मारी बाजी और कितना है मौजूदा एक्सपोर्ट.
Russian Oil Import India and Trump: दिसंबर 2025 में रूस से तेल और गैस खरीद के मामले में भारत की स्थिति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है. यूरोप की एक रिसर्च संस्था की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय रिफाइनरियों ने रूसी कच्चे तेल की खरीद में काफी बड़ी कटौती की, जिसके चलते भारत रूस से फॉसिल फ्यूल खरीदने वाले देशों की सूची में दूसरे से तीसरे स्थान पर खिसक गया. ये बदलाव पिछले महीने यानी दिसंबर, 2025 में देखी गई. रूसी तेल की खरीद में आई इस बड़ी गिरावट को ट्रंप की सख्ती के असर के तौर पर भी देखा जा रहा है. आइए समझते हैं क्या है पूरा मामला.
रूस से भारत की खरीद में आई बड़ी गिरावट
यूरोप स्थित थिंक टैंक Centre for Research on Energy and Clean Air (CREA) की रिपोर्ट के मुताबिक, दिसंबर 2025 में भारत ने रूस से कुल 2.3 अरब यूरो के हाइड्रोकार्बन खरीदे. यह आंकड़ा नवंबर में 3.3 अरब यूरो था. यानी एक महीने में ही भारत की खरीद में करीब 30 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. इस गिरावट के साथ Turkey भारत को पीछे छोड़ते हुए रूस से फॉसिल फ्यूल खरीदने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश बन गया. तुर्किये ने दिसंबर में रूस से 2.6 अरब यूरो के हाइड्रोकार्बन खरीदे. वहीं, चीन अपनी स्थिति बरकरार रखते हुए रूस का सबसे बड़ा खरीदार बना रहा, जिसकी हिस्सेदारी टॉप पांच देशों की कुल खरीद में 48 फीसदी (करीब 6 अरब यूरो) रही.
कच्चा तेल रहा भारत की खरीद का सबसे बड़ा हिस्सा
CREA के मुताबिक, भारत की रूस से की गई कुल खरीद में 78 फीसदी हिस्सा कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) का रहा. दिसंबर में भारत ने करीब 1.8 अरब यूरो का रूसी क्रूड खरीदा. इसके अलावा-
- कोयला: 424 मिलियन यूरो
- तेल से बने उत्पाद: 82 मिलियन यूरो
नवंबर 2025 में भारत ने सिर्फ रूसी कच्चे तेल पर ही 2.6 अरब यूरो खर्च किए थे. दिसंबर में इसमें 29 फीसदी की महीने-दर-महीने गिरावट दर्ज की गई, जो प्राइस कैप पॉलिसी लागू होने के बाद का सबसे निचला स्तर बताया गया है.
रिलायंस और सरकारी रिफाइनरियों ने घटाई खरीद
रूसी तेल की खरीद में आई गिरावट की सबसे बड़ी वजह Reliance Industries की जामनगर रिफाइनरी रही. रिपोर्ट के मुताबिक, रिलायंस ने दिसंबर में रूस से कच्चे तेल का आयात करीब आधा कर दिया. हालांकि, जो भी तेल आया, वह Rosneft से पहले से किए गए सौदों के तहत था, जो अमेरिकी प्रतिबंध लागू होने से पहले खरीदे गए थे. इसके अलावा, सरकारी तेल कंपनियों (PSU रिफाइनरियों) ने भी दिसंबर में रूस से तेल खरीद में करीब 15 फीसदी की कटौती की.
अमेरिका द्वारा रूस की बड़ी तेल कंपनियों Rosneft और Lukoil पर लगाए गए नए प्रतिबंधों का असर भारतीय कंपनियों पर साफ दिखा. रिलायंस, HPCL, HPCL-Mittal Energy और MRPL जैसी कंपनियों ने एहतियातन रूसी तेल की खरीद या तो रोकी या कम की, जबकि IOC ने गैर-प्रतिबंधित रूसी सप्लायर्स से खरीद जारी रखी.
रूस से तेल क्यों खरीदता रहा है भारत?
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है. रूस-यूक्रेन युद्ध से पहले भारत की तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा मिडिल ईस्ट से आता था और रूस से आयात 1 फीसदी से भी कम था. लेकिन फरवरी 2022 के बाद जब पश्चिमी देशों ने रूस से तेल लेना बंद किया, तो रूस ने भारी छूट पर तेल बेचना शुरू किया. इस मौके का फायदा उठाते हुए भारत ने रूसी तेल की खरीद तेजी से बढ़ाई और कुछ समय के लिए रूस भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बन गया. एक समय पर भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी करीब 40 फीसदी तक पहुंच गई थी. हालांकि, दिसंबर 2025 में यह हिस्सेदारी घटकर 25 फीसदी रह गई, जो नवंबर में 35 फीसदी थी.
रूसी तेल से बने उत्पादों का एक्सपोर्ट भी घटा
CREA की रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि भारत, तुर्किये और ब्रुनेई की पांच रिफाइनरियों ने दिसंबर में रूसी क्रूड से बने तेल प्रोडक्ट्स का 943 मिलियन यूरो का एक्सपोर्ट उन देशों को किया, जिन्होंने रूस पर प्रतिबंध लगाए हैं. इनमें-
- यूरोपीय संघ (EU): 436 मिलियन यूरो
- अमेरिका: 189 मिलियन यूरो
- ब्रिटेन: 34 मिलियन यूरो
- ऑस्ट्रेलिया: 283 मिलियन यूरो
इनमें से करीब 274 मिलियन यूरो के प्रोडक्ट सीधे तौर पर रूसी कच्चे तेल से रिफाइन किए गए थे. हालांकि, कुल मिलाकर प्रतिबंध लगाने वाले देशों को एक्सपोर्ट में 9 फीसदी की गिरावट आई. EU और UK को भेजे गए उत्पादों में सबसे ज्यादा कमी रही. इसके उलट ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका को एक्सपोर्ट बढ़ा, जिसमें भारत की जामनगर रिफाइनरी की अहम भूमिका रही.
चीन की खरीदारी बढ़ी
जहां भारत ने खरीद घटाई, वहीं चीन ने रूस से तेल और गैस की खरीद बढ़ाई. दिसंबर में चीन का रूस से आयात बढ़कर 6 अरब यूरो तक पहुंच गया. इसमें कच्चे तेल की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा रही. खास तौर पर समुद्री रास्ते से आने वाले रूसी क्रूड (ESPO और Urals ग्रेड) की खरीद में इजाफा देखने को मिला.
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