सरकार की सख्ती से सिल्वर इम्पोर्ट पर लगा ब्रेक! एक महीने में 82% गिरा आयात; ड्यूटी और लाइसेंस नियम का बड़ा असर

भारत में सिल्वर इम्पोर्ट पर सरकार की सख्ती का बड़ा असर देखने को मिला है. मई 2026 में सिल्वर इम्पोर्ट 82 प्रतिशत तक गिर गया, जो हाल के वर्षों की सबसे बड़ी मासिक गिरावटों में से एक है. सरकार ने सिल्वर पर इम्पोर्ट ड्यूटी 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दी है और आयात के लिए लाइसेंस भी अनिवार्य बना दिया है.

सिल्वर इम्पोर्ट Image Credit: Canva/ Money9

Silver Import: भारत में सिल्वर इम्पोर्ट पर सरकार की सख्ती का असर अब साफ दिखाई देने लगा है. मई 2026 में देश का सिल्वर इम्पोर्ट 82 प्रतिशत तक गिर गया है. सरकार द्वारा इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाने और सिल्वर इम्पोर्ट के लिए लाइसेंस अनिवार्य करने के बाद आयात में यह तेज गिरावट दर्ज की गई है. ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की रिपोर्ट के अनुसार, मई 2026 में भारत का सिल्वर इम्पोर्ट घटकर केवल 7.6 करोड़ डॉलर रह गया, जबकि अप्रैल 2026 में यह 41.1 करोड़ डॉलर था. यानी सिर्फ एक महीने में सिल्वर इम्पोर्ट में 81.6 प्रतिशत की भारी गिरावट देखने को मिली.

क्यों उठाने पड़े सख्त कदम

सरकार ने यह कदम तब उठाया, जब वित्त वर्ष 2025-26 में सिल्वर इम्पोर्ट रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. रिपोर्ट के अनुसार, FY26 में भारत का सिल्वर इम्पोर्ट 149.6 प्रतिशत बढ़कर 12.05 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जबकि इससे पिछले वित्त वर्ष में यह 4.83 अरब डॉलर था.

सिल्वर देश की सबसे तेजी से बढ़ने वाली इम्पोर्ट कैटेगरीज में शामिल हो गया था. बढ़ते आयात का असर देश के ट्रेड बैलेंस और विदेशी मुद्रा पर पड़ सकता था. इसी वजह से सरकार ने इम्पोर्ट को नियंत्रित करने के लिए सख्त कदम उठाने का फैसला किया.

इम्पोर्ट ड्यूटी में हुई बड़ी बढ़ोतरी

सरकार ने सिल्वर पर इम्पोर्ट ड्यूटी को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया. हालांकि, इस फैसले के बाद एक नई चुनौती सामने आई. इंडिया-UAE फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के तहत UAE से आने वाले सिल्वर को टैरिफ में विशेष रियायत मिलती है. ड्यूटी बढ़ने के बाद यह अंतर लगभग 8 प्रतिशत तक पहुंच गया. इससे कारोबारियों के लिए UAE के जरिए सिल्वर इम्पोर्ट करना अधिक आकर्षक हो सकता था.

लाइसेंस व्यवस्था भी लागू

इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) ने 16 मई 2026 को सिल्वर को “रिस्ट्रिक्टेड” कैटेगरी में डाल दिया. इसके बाद सिल्वर इम्पोर्ट के लिए लाइसेंस लेना अनिवार्य हो गया. सरकार का मानना है कि केवल ड्यूटी बढ़ाने से आयात पर पूरी तरह नियंत्रण नहीं पाया जा सकता था. इसलिए क्वांटिटेटिव कंट्रोल के रूप में लाइसेंसिंग सिस्टम लागू किया गया, जिससे इम्पोर्ट की मात्रा पर बेहतर निगरानी रखी जा सके.

एक महीने में दिखा बड़ा असर

इम्पोर्ट ड्यूटी में बढ़ोतरी और लाइसेंसिंग सिस्टम के प्रभाव का असर तुरंत दिखाई दिया. मई में सिल्वर इम्पोर्ट चार-पांचवें हिस्से से भी अधिक घट गया. यह संकेत देता है कि सरकार की नई नीति फिलहाल प्रभावी साबित हो रही है. आने वाले महीनों में सिल्वर इम्पोर्ट काफी हद तक DGFT द्वारा जारी किए जाने वाले लाइसेंस पर निर्भर करेगा. UAE से प्रेफरेंशियल टैरिफ के तहत आयात जारी रह सकता है, जबकि अन्य देशों से इम्पोर्ट पर 15 प्रतिशत ड्यूटी लागू रहेगी.

गोल्ड पर क्यों नहीं लगी ऐसी पाबंदी

रिपोर्ट के अनुसार, गोल्ड इम्पोर्ट पर सिल्वर जैसी पाबंदियां नहीं लगाई गई हैं. इसकी मुख्य वजह इंडिया-UAE ट्रेड एग्रीमेंट के तहत गोल्ड पर मिलने वाला टैरिफ एडवांटेज काफी कम है. गोल्ड के मामले में यह लाभ करीब 1 प्रतिशत के आसपास है, जिससे बड़े पैमाने पर आर्बिट्राज की संभावना सीमित रहती है.

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