न गोदाम, न डिलीवरी बॉय, फिर भी ₹19 करोड़ से खड़ा किया 41 लाख दुकानों का नेटवर्क, अब Meesho ने लगाया ₹202 करोड़ का दांव
किराना क्लब के संस्थापक अंशुल गुप्ता ने करीब पांच साल में सिर्फ 2 मिलियन डॉलर की फंडिंग से 41 लाख किराना दुकानों का नेटवर्क तैयार किया. बिना गोदाम और डिलीवरी फ्लीट के बने इस नेटवर्क को अब मीशो ने 202.08 करोड़ रुपये में खरीद लिया है. यह सौदा भारतीय स्टार्टअप जगत की सबसे अनोखी सफलता की कहानियों में शामिल हो गया है.
Meesho Kirana Club Deal: भारत के स्टार्टअप जगत में अक्सर बड़ी फंडिंग, भारी खर्च और तेज विस्तार को सफलता का पैमाना माना जाता है. लेकिन किराना क्लब के संस्थापक अंशुल गुप्ता ने बिल्कुल अलग रास्ता चुना. उन्होंने करीब पांच साल में सिर्फ 2 मिलियन डॉलर (18.8 करोड़ रुपये) की पूंजी जुटाकर 41 लाख किराना दुकानों का नेटवर्क खड़ा कर दिया. अब ई-कॉमर्स कंपनी Meesho ने उनकी कंपनी Kirana Club को 202.08 करोड़ रुपये में खरीद लिया है. सबसे दिलचस्प बात यह है कि अंशुल ने यह नेटवर्क बिना बड़े गोदाम, बिना डिलीवरी फ्लीट और बिना भारी-भरकम खर्च के तैयार किया. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर उन्होंने 41 लाख किराना दुकानदारों को कैसे जोड़ा और एक छोटे से स्टार्टअप को करोड़ों रुपये की कंपनी में कैसे बदल दिया?
बाजार की समस्या को अलग नजरिए से समझा
जब कई स्टार्टअप किराना कारोबार को सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स की समस्या मान रहे थे, तब अंशुल गुप्ता ने इसे जानकारी की समस्या के रूप में देखा. उनका मानना था कि छोटे शहरों और कस्बों के किराना दुकानदारों के पास सही समय पर सही जानकारी नहीं पहुंचती. उन्हें यह जानने में परेशानी होती है कि किस सामान की कीमत क्या है, कौन-सी स्कीम चल रही है और बाजार में किस प्रोडक्ट की मांग बढ़ रही है.
अंशुल ने इसी समस्या का समाधान खोजने का फैसला किया. उन्होंने ऐसा प्लेटफॉर्म तैयार किया, जहां किराना दुकानदार एक-दूसरे से जुड़ सकें, जानकारी शेयर कर सकें और अपने कारोबार से जुड़ी जरूरी बातें स्थानीय भाषाओं में जान सकें.
बिना गोदाम और बिना डिलीवरी नेटवर्क के बढ़ाया कारोबार
Kirana Club की सबसे बड़ी खासियत इसका हल्का बिजनेस मॉडल रहा. कंपनी ने खुद कोई इन्वेंट्री नहीं रखी, बड़े गोदाम नहीं बनाए और न ही डिलीवरी नेटवर्क खड़ा किया. इसके बजाय पूरा फोकस दुकानदारों का मजबूत नेटवर्क तैयार करने पर रखा गया.
यही वजह रही कि कंपनी का खर्च सीमित रहा और वह कम पूंजी में तेजी से आगे बढ़ती गई. जहां कई कंपनियां करोड़ों रुपये लॉजिस्टिक्स पर खर्च कर रही थीं, वहीं किराना क्लब दुकानदारों के बीच भरोसा और जानकारी का नेटवर्क बना रहा था.
इंजीनियरिंग से शुरू हुआ सफर
अंशुल गुप्ता ने MNIT जयपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने 2015 से 2017 तक Oracle में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में काम किया. इसके बाद वह Impact Analytics से जुड़े, जहां उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर काम किया और रिटेल व एफएमसीजी सेक्टर की कई बड़ी कंपनियों के लिए तकनीकी समाधान तैयार किए. यहीं से उन्हें रिटेल कारोबार की बारीकियों को समझने का मौका मिला.
छोटे कारोबारियों के साथ काम करके मिली बड़ी सीख
Kirana Club शुरू करने से पहले अंशुल ने Grill AI नाम का एक प्रोजेक्ट भी चलाया था. यह प्रोजेक्ट डेटा के जरिए रेस्तरां की कमाई बढ़ाने पर काम करता था. इस दौरान उन्हें एक अहम बात समझ आई कि छोटे कारोबारियों को सिर्फ तकनीक नहीं चाहिए, बल्कि ऐसी जानकारी चाहिए जिस पर वे भरोसा कर सकें. यही सीख बाद में Kirana Club की नींव बनी.
Retail Pulse ने तैयार की मजबूत बुनियाद
साल 2020 में अंशुल गुप्ता ने Retail Pulse की शुरुआत की. यह कंपनी कंप्यूटर विजन तकनीक की मदद से किराना दुकानों की शेल्फ की तस्वीरों का एनालिसिस करती थी. इस तकनीक का इस्तेमाल Unilever, PepsiCo और L’Oréal जैसी कंपनियां भी करती थीं.
Retail Pulse के जरिए अंशुल को किराना बाजार को बेहद करीब से समझने का मौका मिला. बाद में इसी अनुभव और तकनीक का इस्तेमाल Kirana Club को आगे बढ़ाने में हुआ.
सिर्फ 2 मिलियन डॉलर की फंडिंग में खड़ी की बड़ी कंपनी
Kirana Club ने अपने पूरे सफर में सिर्फ दो सीड फंडिंग राउंड के जरिए करीब 2 मिलियन डॉलर जुटाए. यह रकम क्विक कॉमर्स सेक्टर की बड़ी कंपनियों के मुकाबले बेहद कम थी, जहां एक-एक फंडिंग राउंड में सैकड़ों मिलियन डॉलर जुटाए जाते हैं.
इसके बावजूद अंशुल गुप्ता ने 41 लाख किराना दुकानों का नेटवर्क तैयार किया और कंपनी को उस मुकाम तक पहुंचाया जहां Meesho ने इसे 202.08 करोड़ रुपये में खरीदने का फैसला किया.
अब Meesho के साथ होगी नई शुरुआत
Meesho के साथ हुआ यह सौदा मार्च 2027 तक तीन स्टेज में पूरा होगा. अधिग्रहण के बाद भी अंशुल गुप्ता और उनकी सह-संस्थापक ऐश्वर्या जैन कंपनी के साथ बने रहेंगे. Kirana Club, Meesho समूह के भीतर स्वतंत्र रूप से काम करता रहेगा.
दरअसल, Meesho को सिर्फ एक कंपनी नहीं मिली है, बल्कि उसे 41 लाख किराना दुकानदारों तक पहुंच बनाने वाला एक बड़ा नेटवर्क मिला है. यही नेटवर्क Kirana Club की सबसे बड़ी ताकत बना और इसी ने अंशुल गुप्ता को भारत के स्टार्टअप जगत में अलग पहचान दिलाई.
इसे भी पढ़ें- NSE IPO का ख्वाब… हकीकत से कुछ कदम दूर, आज फाइल हो सकता है ड्राफ्ट पेपर, SBI बनेगा सबसे बड़ा सेलर!
Latest Stories
भारत बना सकता है 15 करोड़ बैरल तेल का भंडार, चीन मॉडल अपनाने पर सरकार कर रही विचार
सस्ता हुआ सोना-चांदी, जानें 10 ग्राम गोल्ड खरीदने के लिए अब कितना करना होगा खर्च
प्री-वॉर लेवल की ओर बढ़ रहा कच्चा तेल, ब्रेंट $80 के नीचे फिसला; पेट्रोल-डीजल होंगे सस्ते!
