अंधाधुंध सोना बेच रहे हैं लोग, क्या आने वाला है बड़ा क्रैश?
भारत में सोना सिर्फ एक धातु नहीं, बल्कि भावनाओं, परंपरा और सुरक्षा का प्रतीक है. हालांकि, हाल के आंकड़ों से पता चला है कि पिछले 90 दिनों में भारतीय परिवारों ने करीब 50,000 किलोग्राम यानी 50 टन पुराना सोना बेचा है. यह बिक्री नया सोना खरीदने के बजाय सीधे नकद लेने या बैंक खाते में पैसे जमा करने के उद्देश्य से की गई है, जो एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है. इस प्रवृत्ति के पीछे मुख्य कारण सोने की रिकॉर्ड ऊँची कीमतें हैं.
कई निवेशकों को यह आशंका है कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में स्थिति बदलने पर सोने के दामों में गिरावट आ सकती है, इसलिए वे मौजूदा ऊँचे भाव पर मुनाफा बुक करना चाहते हैं. पहले जहाँ लोग पुरानी ज्वेलरी के बदले नई ज्वेलरी खरीदते थे, वहीं अब बड़ी संख्या में ग्राहक सीधे कैश लेना पसंद कर रहे हैं. ज्वेलर्स के अनुसार, नए गहनों की मांग कमजोर पड़ी है, जिससे बाजार में सोने की आपूर्ति बढ़ रही है लेकिन नई खरीदारी में कमी आई है. यह ट्रेंड घरेलू अर्थव्यवस्था के लिए कुछ सकारात्मक पहलू भी लाता है, खासकर सोने की रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देने और आयात पर निर्भरता कम करने में.
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