दूध, दवाई, कपड़े, गाड़ियां…घर चलाने वाली हर चीजें होंगी महंगी, 44 महीने के टॉप पर पहुंचा इनपुट कॉस्ट रेशियो

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने कंपनियों की मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट को बुरी तरह बढ़ा दिया है. CRISIL की रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल 2026 में इनपुट-आउटपुट रेशियो 44 महीनों बाद 1.0 के ऊपर पहुंच गया.

महंगी होंगी रोजमर्रा की चीजें Image Credit: Money9 Live

Inflation Alert: कुछ वक्त में महंगाई आपके हर एक खरीद को प्रभावित करेगी. आपके दरवाजे तक पहुंचने वाले सामानों की इनपुट कॉस्ट में इस समय जबरदस्त आग लगी हुई है. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के बंद होने से दुनिया भर में कच्चे तेल और जरूरी कमोडिटीज को लेकर अब तक का सबसे बड़ा झटका लगा है . कंपनियां अब तक इस बढ़े हुए बोझ को खुद झेल रही थीं, लेकिन अब पानी सिर से ऊपर जा चुका है . आने वाले कुछ ही महीनों में यह बढ़ी हुई लागत सीधे आपकी जेब पर महंगाई बनकर टूटने वाली है . खुद को तैयार रखिए, क्योंकि अब महंगाई आपके बिल्कुल दरवाजे पर खड़ी है.

44 महीनों का रिकॉर्ड टूटा

क्रिसिल की ताजा ‘क्विकनॉमिक्स’ रिपोर्ट के मुताबिक, थोक मूल्य सूचकांक (WPI) पर आधारित इनपुट-आउटपुट रेशियो अप्रैल 2026 में 1.0 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर 1.02 पर पहुंच गया है.

  • लगातार गिरावट के बाद बड़ा उछाल: पिछले 44 महीनों से यह रेशियो 1.0 के स्तर से नीचे बना हुआ था, जो अब टूट चुका है.
  • पिछला रिकॉर्ड: इससे पहले मार्च 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के समय यह रेशियो 1.0 के पार गया था और लगातार 5 महीनों तक ऊपर रहा था.
  • एक महीने में भारी बढ़ोतरी: अप्रैल महीने में इनपुट कॉस्ट (लागत) में महीने-दर-महीने 6.2% की भारी बढ़ोतरी हुई, जबकि इसके मुकाबले तैयार माल की कीमतें (आउटपुट प्राइज) केवल 0.7% ही बढ़ीं.

इनपुट कॉस्ट बढ़ने की मुख्य वजहें

कंपनियों के लिए सामान बनाना अचानक इतना महंगा क्यों हो गया, इसके पीछे मुख्य रूप से कच्चे माल और एनर्जी की कीमतों में आया उछाल है:

  • एनर्जी और फ्यूल: क्रूड पेट्रोलियम, नेचुरल गैस और मिनरल ऑयल्स की कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
  • इंडस्ट्रियल कच्चा माल: स्टील, बेसिक केमिकल्स, फर्टिलाइजर्स, प्लास्टिक, सिंथेटिक रबर, मैन-मेड फाइबर और नॉन-फेरस मेटल्स की मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट काफी बढ़ गई है.
  • कमोडिटी में उछाल (अप्रैल 2026 के आंकड़े): केवल अप्रैल महीने में ही क्रूड ऑयल से जुड़े प्रोडक्ट्स 49.3%, एल्युमिनियम 20.6%, गैस से जुड़े प्रोडक्ट्स 19.1% और कॉपर की कीमतें 17.3% तक बढ़ गईं.

थोक महंगाई (WPI) में आया तगड़ा उछाल

इस इनपुट कॉस्ट के दबाव का सीधा असर थोक महंगाई के आंकड़ों पर दिखने लगा है:

  • अप्रैल 2026 में देश की कुल थोक महंगाई दर (WPI Inflation) मार्च के 3.9% से सीधे छलांग लगाकर 8.3% पर पहुंच गई है.
  • इसमें भी गैर-खाद्य थोक महंगाई (Non-food WPI) मार्च के 4.7% से बढ़कर 10.9% के खतरनाक स्तर पर आ गई है.
  • जबकि इससे ठीक पिछले पूरे वित्त वर्ष 2026 (FY26) में औसत WPI महंगाई महज 0.7% और नॉन-फूड WPI सिर्फ 1.1% थी.

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कंपनियां बढ़ाएंगी दाम, आम जनता पर पड़ेगा सीधा असर

अब तक घरेलू बाजार में डिमांड अच्छी होने की वजह से कंपनियां इस बढ़े हुए खर्च को खुद संभाल रही थीं, ताकि उनके मार्जिन बचे रहें. लेकिन क्रिसिल का अनुमान है कि यह इनपुट कॉस्ट आने वाले समय में भी ऊंची बनी रहेगी.

नतीजतन, मैन्युफैक्चरर्स अब इस बढ़ी हुई लागत का बोझ धीरे-धीरे ग्राहकों पर डालना शुरू करेंगे. बहुत जल्द डेयरी प्रॉडक्ट्स, दवाइयां, कपड़े, फर्नीचर और ऑटोमोबाइल जैसी रोजमर्रा और जरूरत की चीजें महंगी होने जा रही हैं. आने वाले महीनों में कंज्यूमर प्राइज इंडेक्स (CPI) यानी खुदरा महंगाई और मुख्य रूप से कोर सीपीआई (Core CPI) में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है.