महंगे हो सकते हैं ब्यूटी प्रोडक्ट्स, पश्चिम एशिया में तनाव से दबाव में कॉस्मेटिक इंडस्ट्री; रॉ मैटेरियल की कीमतें बढ़ीं
ईरान-इजरायल तनाव का असर अब वैश्विक ब्यूटी और कॉस्मेटिक्स इंडस्ट्री पर दिखने लगा है. कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और शिपिंग रूट में बाधा के कारण पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स लागत तेजी से बढ़ रही है. स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज में व्यवधान से सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिससे डिलीवरी में देरी और खर्च दोनों बढ़े हैं. इसका असर कंपनियों के मार्जिन और उपभोक्ताओं की मांग पर पड़ सकता है.
Iran Israel Tension Beauty Industry Impact: ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच तनाव का असर अब वैश्विक ब्यूटी और कॉस्मेटिक्स इंडस्ट्री पर भी साफ नजर आने लगा है. कच्चे माल से लेकर पैकेजिंग और ट्रांसपोर्ट तक हर स्तर पर लागत बढ़ रही है, जिससे कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ गया है. खासतौर पर स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज जैसे अहम शिपिंग रूट में बाधा आने से सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिसका असर पूरी दुनिया में महसूस किया जा रहा है.
पैकेजिंग और कच्चे माल की लागत में उछाल
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कॉस्मेटिक्स इंडस्ट्री में प्लास्टिक जार, लिपस्टिक ट्यूब और अन्य पैकेजिंग सामग्री की लागत तेजी से बढ़ रही है. इसका मुख्य कारण कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और केमिकल कंपोनेंट्स की महंगाई है. कई कंपनियों ने माना है कि एनर्जी प्राइस बढ़ने से उत्पादन लागत पर सीधा असर पड़ा है.
इटली की एक प्रमुख कॉस्मेटिक्स कंपनी के अनुसार, सिर्फ लॉजिस्टिक्स से जुड़े अतिरिक्त खर्च ही साल भर में करीब 1.5 मिलियन यूरो तक बढ़ सकते हैं. यह दिखाता है कि सप्लाई चेन में आई बाधाएं कंपनियों के लिए कितनी बड़ी चुनौती बन चुकी हैं.
ट्रांसपोर्ट और डिलीवरी में देरी
ईरान संकट के चलते मिडिल ईस्ट में कई कंटेनर फंसे हुए हैं, जिससे शिपिंग में देरी और लागत दोनों बढ़ गई हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, पहले जहां किसी शिपमेंट को पहुंचने में 8 हफ्ते लगते थे, अब वही समय बढ़कर 12 से 14 हफ्ते हो गया है. इस देरी का असर सिर्फ सप्लाई पर ही नहीं, बल्कि कंपनियों की प्लानिंग और इन्वेंट्री मैनेजमेंट पर भी पड़ रहा है. कई कंपनियां अब वैकल्पिक रास्तों जैसे रेल और एयर ट्रांसपोर्ट का सहारा ले रही हैं, जिससे लागत और बढ़ रही है.
सप्लाई चेन पर बढ़ता दबाव
कॉस्मेटिक्स कंपनियां अब कच्चे माल की उपलब्धता को लेकर भी चिंतित हैं. पैकेजिंग इंडस्ट्री से जुड़ी कंपनियां प्लास्टिक रेजिन जैसे जरूरी संसाधनों का स्टॉक बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं, ताकि उत्पादन बाधित न हो. हालांकि अभी तक बड़े स्तर पर सप्लाई की कमी नहीं आई है, लेकिन लागत और समय दोनों में बढ़ोतरी ने इंडस्ट्री के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं.
मांग पर भी पड़ सकता है असर
लागत बढ़ने का असर अंततः उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है. महंगाई बढ़ने से लोगों की खरीदने की शक्ति कम हो सकती है, जिससे ब्यूटी प्रोडक्ट्स की मांग पर दबाव आ सकता है. इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स इसे “परफेक्ट स्टॉर्म” की स्थिति मान रहे हैं, जहां लागत बढ़ रही है और मांग कमजोर होने का खतरा है.
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