मैं नोएडा हूं! जापान से ज्यादा कमाई, UP का सबसे अमीर शहर; फिर क्यों मेरी सड़कों पर मजदूर?

वेतन बढ़ोतरी की मांग से शुरू हुआ नोएडा का श्रमिक प्रदर्शन अब कानून-व्यवस्था से आगे बढ़कर आर्थिक चिंता का विषय बन गया है. राज्य के GDP में 10 फीसदी से ज्यादा योगदान देने वाले इस औद्योगिक हब में अस्थिरता निवेश, उत्पादन और निर्यात पर असर डाल सकती है. पढ़ें पूरी रिपोर्ट.

नोएडा, मजदूरों का प्रदर्शन और अर्थव्यवस्था Image Credit: @Money9live

Noida Labour Protest and Impact: शाम को चमकते नोएडा की सुबहें अक्सर सुस्त और शांत ही होती हैं. उस वक्त सड़कों पर गाड़ियों का जमावड़ा कम नजर आता है. शोर का मीटर लो होता है. लेकिन शहर के कुछ एक इलाके ऐसी होती हैं जहां भीड़ जमा नजर आती है. अगर आप कभी सुबह-सुबह दफ्तर के लिए या किसी दूसरे काम के लिए नोएडा सेक्टर 62 की तरफ से गुजरेंगे, तो एक चौराहा पड़ता है…नाम है लेबर चौक. सुबह-सुबह मजदूर अपनी रोजी-रोटी के लिए यहां जमा होते हैं. लोग आते हैं…उन्हें अपना काम बताते हैं…मजदूरी का मोल भाव-करते हैं और इसी तरह उनके दिन की रोजी-रोटी तय होती है.

मजदूरों के पास होता है, एक झोला…जिसमें दोपहर का खाना और एक बोतल पानी रखा रहता है. कंधे पर लटकता रहता है गमछा और माथे पर पीले-सफेद-नीले रंग की टोपियां. ये नोएडा के मजदूर हैं…अलग-अलग इलाकों में आपको कई ऐसे चौराहे पर ये नजर आ जाएंगे. ये नोएडा की एक तस्वीर है. इसी तस्वीर का एक हिस्सा पिछले कुछ वक्त से सुर्खियों में है.

केवल आंदोलन नहीं बल्कि अर्थव्यवस्था पर असर

दरअसल, आज यानी सोमवार, 13 अप्रैल को नोएडा की सड़कों पर हाल में उग्र प्रदर्शन देखने को मिला जिसकी वजह वेतन में बढ़ोतरी है. लेकिन क्या आपको मालूम है कि इस प्रदर्शन ने केवल उत्तर प्रदेश के कानून-व्यवस्था को ही नहीं, बल्कि राज्य की आर्थिक सेहत को लेकर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. वेतन बढ़ोतरी की मांग से शुरू हुआ विरोध अचानक हिंसक झड़प, आगजनी और ट्रैफिक ठप होने जैसी घटनाओं में बदल गया. लेकिन इस पूरे घटनाक्रम को केवल एक श्रमिक आंदोलन के तौर पर देखना अधूरा होगा. अगर हम उत्तर प्रदेश की आर्थिक सेहत की बात कर रहे हैं तो बात वाकई उसके इकोनॉमी से जुड़ा है. इस विरोध-प्रदर्शन के बीच असल चिंता यह है कि इसका असर देश के सबसे अहम इंडस्ट्रियल सेंटर यानी नोएडा में से एक पर पड़ सकता है.

क्यों अहम है नोएडा?

गौतम बुद्ध नगर (नोएडा और ग्रेटर नोएडा) सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुका है. आंकड़ों के मुताबिक, यह जिला राज्य के कुल GDP में 10 फीसदी से ज्यादा का योगदान देता है. 2023-24 में यहां की अर्थव्यवस्था करीब 2.63 लाख करोड़ रुपये की रही, जो कई राज्यों से भी बड़ी है. टाइम्स ऑफ इंडिया ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि अगर प्रति व्यक्ति आय की बात करें, तो गौतम बुद्ध नगर का आंकड़ा करीब 10.17 लाख रुपये है, जो खरीद क्षमता (PPP) के आधार पर जापान जैसे विकसित देश के बराबर बैठता है. यह अंतर दिखाता है कि यूपी के बाकी जिलों की तुलना में नोएडा कितनी तेजी से आगे निकला है.

UP के लिए प्रदर्शन क्यों बन सकता है बड़ा ‘डेंट’?

ऐसे में जब इसी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर औद्योगिक गतिविधियां होती हैं, वहां किसी भी तरह की अस्थिरता सीधे प्रोडक्शन, सप्लाई चेन और निवेशकों के भरोसे पर असर डालती है. नोएडा और ग्रेटर नोएडा देश के सबसे बड़े मैन्युफैक्चरिंग और आईटी हब्स में शामिल हैं. अगर हम कंपनियों की गिनती शुरू कर दें तो फेहरिस्त काफी लंबी हो जाएगी. यहां आईटी कंपनियों से लेकर ऑटो तक, कई कंपनियों का भरमार है. Dixon Technologies, Optiemus Electronics, Lava, OPPO, Vivo और Samsung जैसी कंपनियां बड़े पैमाने पर मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स का प्रोडक्शन करती हैं.

वहीं IT और सर्विस सेक्टर में HCL, Microsoft, Adobe, TCS, Oracle, Capgemini और Paytm जैसी दिग्गज कंपनियों की मजबूत मौजूदगी है. ऑटो सेक्टर भी यहां काफी मजबूत है- Honda Cars India, Yamaha, New Holland Agriculture और Makino Auto जैसी कंपनियां अपने बड़े प्लांट्स के जरिए प्रोडक्शन करती हैं. Sharda Motor Industries जैसी कंपनियां ऑटो कंपोनेंट्स बनाती हैं. ऐसे में अगर श्रमिक असंतोष बढ़ता है या बार-बार प्रदर्शन होते हैं, तो इसका असर केवल एक-दो कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम पर पड़ेगा.

एक्सपोर्ट हब पर भी असर की आशंका

नोएडा सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग का ही नहीं, बल्कि एक्सपोर्ट का भी बड़ा केंद्र है. NOIDA Export Processing Zone (NEPZ) से जेम्स एंड ज्वेलरी, गारमेंट्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, कंप्यूटर हार्डवेयर-सॉफ्टवेयर और लेदर प्रोडक्ट्स का बड़े पैमाने पर निर्यात होता है. अगर हम आंकड़ों की भाषा में बात करें तो जोनल नोएडा NSEZ के अधिकार क्षेत्र से आने वाले NSEZ से वर्ष 2024-25 की अवधि के दौरान कुल माल निर्यात 26,145 करोड़ रुपये रहा. ये एक्सपोर्ट कई बड़े देशों तक फैला है. दूसरे देशों की सूची में 10,532 करोड़ रुपये के साथ UAE टॉप पर है. उसके बाद अमेरिका (5,546 करोड़ रुपये), हांगकांग (1,370 करोड़ रुपये), UK (1,150 करोड़ रुपये) और फ्रांस (810 करोड़ रुपये) का नाम है.

इससे इतर, सर्विस एक्सपोर्ट के आंकड़ों की बात करें तो वर्ष 2024-25 के दौरान यह 84,580.4 करोड़ रुपये दर्ज किया गया. यह पिछले साल की अवधि यानी 2023-24 के 83,657.2 करोड़ रुपये के मुकाबले 16.8 फीसदी की तेजी को दर्शाता है. उत्पादों की बात करें तो गौतम बुद्ध नगर क्षेत्र से इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, इंजीनियरिंग गुड्स, केमिकल्स और आईटी प्रोडक्ट्स का निर्यात देश की अर्थव्यवस्था में अहम योगदान देता है.

4 दिन पहले शुरू हुआ विवाद

नोएडा में इस आंदोलन की शुरुआत दरअसल 4 दिन पहले शुरू हुई. टीवी9 की रिपोर्ट के मुताबिक, यह आंदोलन 9 अप्रैल को फेस 2 थाना क्षेत्र में मौजूद होजरी कॉम्प्लेक्स से शुरू हुआ था. वहां पर गारमेंट और होजरी यूनिट्स में काम करने वाले मजदूर फैक्ट्रियों के बाहर इकट्ठा हुए. 9 अप्रैल से 11 अप्रैल तक ये आंदोलन काफी शांतिपूर्ण रहा था लेकिन मामला आज यानी सोमवार, 13 अप्रैल को उग्र होना शुरू हुआ जब ग्रेटर नोएडा के इकोटेक थर्ड इलाके में प्रदर्शन के दौरान मिंडा कंपनी के पास हालात अचानक बिगड़ गए. इस दौरान पुलिस कार्रवाई में गोली चलने की घटना सामने आई, जिसमें एक महिला मजदूर को गोली लग गई. यह घटना पूरे आंदोलन के लिए टर्निंग प्वाइंट साबित हुई. जैसे ही गोलीकांड की खबर फैली, मजदूरों में भारी आक्रोश फैल गया और आंदोलन ने उग्र रूप ले लिया.

न्यूनतम वेतन की मांग कहां से हुई शुरू?

नोएडा में श्रमिकों के बीच न्यूनतम वेतन को बढ़ाने की मांग तब शुरू हुई जब हरियाणा सरकार ने अपने कर्मचारियों के मासिक वेतन को लगभग 35 फीसदी तक बढ़ाते हुए 14000 रुपये से 19000 रुपये कर दिया. मालूम हो कि उत्तर प्रदेश में श्रमिकों की न्यूनतम वेतन लगभग 13000 रुपये के आसपास है. नोएडा में शुरू आंदोलन की शुरुआत हरियाणा के इस फैसले से जरूर हुई लेकिन यहां के मजदूरों ने इसी के साथ कई दूसरे डिमांड भी सामने रखें. इनमें बोनस पेमेंट, साप्ताहिक छुट्टी, ओवरटाइम करने पर सही भुगतान जैसी बातें शामिल हैं. इससे इतर, कार्यस्थल की सुरक्षा को लेकर भी आवाज उठाई गई जहां पर यौन उत्पीड़न रोकने के लिए समिति गठन, पीएफ से जुड़े नियमों को ठीक करना और शिकायत हल करना भी शामिल है.

मदरसन का नाम क्यों आया चर्चा में?

प्रदर्शन के दौरान संवर्धन मदरसन ग्रुप का नाम भी सामने आया, क्योंकि कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि इसके कर्मचारियों ने आंदोलन की शुरुआत की. हालांकि, कंपनी ने इस पर सफाई देते हुए स्टॉक एक्सचेंज को बताया कि यह मामला किसी एक कंपनी तक सीमित नहीं है. कंपनी के मुताबिक, यह “नोएडा और दूसरे शहरों में कई इंडस्ट्रीज से जुड़ा व्यापक श्रम मुद्दा है, जो वेतन संशोधन को लेकर फैली गलत जानकारी से पैदा हुआ है.” कंपनी ने यह भी कहा कि उसके ऑपरेशंस पर इसका कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है और सभी गतिविधियां नियमों के मुताबिक जारी हैं. साथ ही, कर्मचारियों की सुरक्षा को प्राथमिकता बताया गया है.

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