बेकाबू महंगाई पर लगाम लगाने की तैयारी, इन 3 कारणों की वजह से जेब पर पड़ रहा असर
बढ़ती महंगाई पर नकेल कसने के लिए RBI ने रेपो रेट को 0.25 फीसदी बढ़ाकर 5.50 फीसदी कर दिया है. क्या आपको पता है कि आखिर क्यों महंगाई बढ़ती जा रही है और इसके पीछे के तीन बड़े कारण क्या हैं?
Highlights
- RBI ने रेपो रेट बढ़ाकर 5.50 फीसदी किया.
- बढ़ती महंगाई बनी RBI की सबसे बड़ी टेंशन.
- महंगे लोन के साथ बढ़ सकता है FD पर रिटर्न.
बढ़ती महंगाई आम जनता की कमर तोड़ रही है, यही वजह है कि महंगाई पर लगाम लगाने के लिए सरकार भी एड़ी चोटी का जोर लगा रही है. यही वजह है कि भारतीय रिजर्व बैंक ने सख्त रुख इख्तियार करते हुए रेपो रेट में 0.25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी कर दी है. फरवरी 2023 के बाद ब्याज दर में यह पहली बढ़ोतरी है, रेपो रेट में बढ़ोतरी के बाद अब नया रेपो रेट 5.50 फीसदी हो गया है. रेपो रेट को बढ़ाने का फैसला, इस बात का साफ संकेत है कि भारतीय रिजर्व बैंक के लिए इस वक्त महंगाई सबसे बड़ी टेंशन बनी हुई है जिसे कंट्रोल में लाना बेहद जरूरी है.
क्यों RBI को लेना पड़ा रेपो रेट बढ़ाने का फैसला?
लंबे समय से खुदरा महंगाई भारतीय रिजर्व बैंक के तय किए 4 फीसदी टारगेट से ऊपर ही बनी हुई है. अगस्त में रिटेल महंगाई 4.82 फीसदी दर्ज की गई, अब भारतीय रिजर्व बैंक ने फाइनेंशियल ईयर 26-27 के लिए महंगाई दर के अनुमान क को 5 फीसदी से बढ़ाकर 5.2 फीसदी कर दिया है.
बढ़ती महंगाई के दबाव के पीछे ये हैं 3 बड़े कारण
पहली बड़ी वजह, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल का आंकड़ा भी पार कर गई हैं. भारत ज्यादातर तेल को आयात करता है जिस कारण से ईंधन और ट्रांसपोर्टेशन महंगा होता जा रहा है.
दूसरी बड़ी वजह, रुपया हो रहा कमजोर: डॉलर की तुलना 2026 में रुपया कमजोर हुआ है, भारतीय करेंसी के कमजोर होने के कारण विदेश से आने वाले इंपोर्टेड गुड्स महंगे हो जाते हैं.
तीसरी बड़ी वजह, मौसम का बदलता मिजाज: एल नीनो (El Nino) और मानसून की अनिश्चितता के असर से फसलों के उत्पादन पर भी बुरा असर पड़ रहा है. इस कारण खाने-पीने की चीजों, सब्जियों और अनाज की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है.
What is Repo Rate?
रेपो रेट वो दर है जिसपर भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से बैंकों को कर्ज दिया जाता है और इसमें बढ़ोतरी की असर सीधा आम जनता की जेब पर पड़ता है. रेपो रेट बढ़ने से मार्केट में लिक्विडिटी कम होती है, जिससे मांग कम होती है और महंगाई पर लगाम लगाने में मदद मिलती है. मांग के कम होने से चीजों के दाम स्थिर होने लगते हैं या फिर घटने लगते हैं.
पहला असर, ईएमआई हो जाती है महंगी: भारतीय रिजर्व बैंक के रेपो रेट बढ़ाने से बैंक कार लोन, होम लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दर बढ़ा देते हैं जिससे कि नया लोन लेने वाले कस्टमर्स की हर महीने की ईएमआई भी बढ़ जाती है.
दूसरा असर, बेहतर हो सकता है FD पर रिटर्न: बेशक रेपो रेट बढ़ने से आपकी ईएमआई बढ़ जाती है लेकिन वो कहते हैं न कि सिक्के के दो पहलू होते हैं. बैंक एक ओर ईएमआई बढ़ाते हैं तो वहीं दूसरी ओर फिक्स्ड डिपॉजिट पर भी ब्याज दरों में इजाफा कर सकते हैं जिससे आम जनता को FD पर बेहतर रिटर्न मिल सकता है.
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