FPIs निवेश आसान बनाने का बोल्ड फैसला आएगा काम! 92 प्रति डॉलर पहुंचेगी रुपये की कीमत? क्या कहते हैं एक्सपर्ट
RBI के हालिया फैसलों के बाद भारतीय रुपये को लेकर नई उम्मीदें जगी हैं. एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि भारत में 40 अरब डॉलर से 75 अरब डॉलर तक की विदेशी पूंजी आती है, तो रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूत होकर 92-93 के स्तर तक पहुंच सकता है. G-Secs में बदलाव और विदेशी निवेशकों को टैक्स छूट जैसे कदम भारतीय बाजार को अधिक आकर्षक बना सकते हैं.

Foreign Investment India: भारत की करेंसी को लेकर एक बड़ी उम्मीद सामने आई है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि भारतीय अर्थव्यवस्था में बड़े पैमाने पर विदेशी कैपिटल का फ्लो होता है, तो रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूत होकर 92-93 के स्तर तक पहुंच सकता है. यह अनुमान भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा सरकारी बॉन्ड यानी G-Secs से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों के बाद लगाया गया है. RBI के हालिया कदम विदेशी निवेशकों को आकर्षित कर सकते हैं, जिससे भारतीय करेंसी को मजबूती मिलेगी और पिछले कुछ समय से जारी कमजोरी की सेंटीमेंट भी बदल सकती है.
RBI के फैसले से बढ़ सकती है डॉलर की आमद
RBI ने शुक्रवार को फुली एक्सेसिबल रूट (FAR) के तहत 15 वर्ष, 30 वर्ष और 40 वर्ष की नई गवर्नमेंट सिक्योरिटीज (G-Secs) को शामिल करने का फैसला किया. इसके साथ ही अल्पावधि वाली सिक्योरिटीज पर लागू 30 फीसदी की सीमा भी हटा दी गई.
इस कदम का उद्देश्य विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बॉन्ड बाजार को अधिक आकर्षक बनाना है. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की भागीदारी बढ़ेगी और भारतीय बाजार में डॉलर का फ्लो तेज होगा. विदेशी करेंसी की बढ़ती उपलब्धता रुपये को मजबूती देने में अहम भूमिका निभा सकती है.
92-93 प्रति डॉलर तक पहुंच सकता है रुपया
SBI की एक रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, यदि रुपये को मौजूदा स्तर से मजबूत होकर 92-93 प्रति डॉलर तक पहुंचना है, तो देश में कम से कम 40 अरब डॉलर की अतिरिक्त विदेशी कैपिटल का फ्लो जरूरी होगा. वहीं Kotak Institutional Equities का अनुमान इससे भी अधिक आशावादी है. ब्रोकरेज का मानना है कि RBI द्वारा घोषित पूरे पैकेज के चलते 50 अरब डॉलर से 75 अरब डॉलर तक की कैपिटल भारत में आ सकती है. यदि ऐसा होता है, तो रुपये की स्थिति में सुधार देखने को मिल सकता है.
विदेशी निवेशकों को मिलेगा अतिरिक्त फायदा
सरकार ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों को ब्याज इनकम और कैपिटल गेन पर टैक्स छूट भी प्रदान की है. SBI के अनुसार, इससे निवेशकों को आफ्टर टैक्स 4,000 करोड़ रुपये से 5,000 करोड़ रुपये तक का अतिरिक्त लाभ मिल सकता है. यह कदम भारत को वैश्विक बॉन्ड इंडेक्स में शामिल होने की दिशा में भी मजबूत बनाता है. यदि भारत की हिस्सेदारी अंतरराष्ट्रीय बॉन्ड इंडेक्स में बढ़ती है, तो विदेशी निवेश स्वतः बढ़ सकता है और इसका सीधा लाभ रुपये को मिलेगा.
NRI जमा पर भी RBI का बड़ा दांव
RBI ने विदेशी करेंसी में जमा किए जाने वाले FCNR(B) डिपॉजिट्स को बढ़ावा देने के लिए भी महत्वपूर्ण घोषणा की है. केंद्रीय बैंक 30 सितंबर 2026 तक नई 3 से 5 वर्ष की FCNR(B) जमाओं पर करेंसी हेजिंग की पूरी लागत स्वयं वहन करेगा. FCNR(B) डिपॉजिट्स वे विदेशी करेंसी जमा हैं, जिन्हें NRI भारतीय बैंकों में जमा करते हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले के बाद बैंक विदेशी करेंसी जमाओं पर 5.5 फीसदी से अधिक ब्याज दर की पेशकश कर सकते हैं, जिससे NRI निवेश में बढ़ोतरी हो सकती है.
सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को भी मिलेगा लाभ
RBI ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के लिए विदेशी उधारी को आसान बनाने के उद्देश्य से रियायती विदेशी करेंसी स्वैप सुविधा भी शुरू की है. यह सुविधा 3 से 5 वर्ष की अवधि वाली एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग्स (ECB) पर लागू होगी. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे PFC, REC और NTPC जैसी सरकारी कंपनियां विदेशों से कम लागत पर अधिक कैपिटल जुटा सकेंगी. वित्त वर्ष 2026 में ECB और FCCB के जरिए आने वाली कैपिटल में लगभग 30 फीसदी की गिरावट आई थी, जिसे यह कदम संतुलित करने में मदद कर सकता है.
महंगाई और विकास दर पर RBI की नजर
हालांकि RBI ने Repo Rate को 5.25 फीसदी पर स्थिर रखा है, लेकिन केंद्रीय बैंक ने आर्थिक विकास के अनुमान को थोड़ा कम कर दिया है. RBI ने वित्त वर्ष 2027 के लिए वास्तविक GDP वृद्धि दर का अनुमान घटाकर 6.6 फीसदी कर दिया है. वहीं उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 5.1 फीसदी कर दिया गया है. वैश्विक मांग में कमजोरी, सप्लाई चेन से जुड़ी चुनौतियां और El Nino जैसे जोखिमों को देखते हुए RBI सतर्क रुख अपनाए हुए है.
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