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रिलायंस ने FY27 में तेल बाजार में उतार-चढ़ाव की दी चेतावनी, ग्रोथ के लिए गैस और ग्रीन केमिकल्स पर लगाया दांव

रिफाइनरी और तेल इंफ्रास्ट्रक्चर को हुए नुकसान, जिससे प्रोडक्ट की सप्लाई में कमी आई है, को ठीक होने में ज्यादा समय लगने की संभावना है, जिसके चलते बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव बना रहेगा. RIL ने भारत की एनर्जी ट्रांजिशन स्ट्रैटेजी में नैचुरल गैस के बढ़ते महत्व पर जोर दिया.

रिलायंस इंडस्ट्री के शेयर में गिरावट. Image Credit: Getty image

रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने FY26 की अपनी सालाना रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि कच्चे तेल की अधिक कीमतों, आर्थिक मंदी और पश्चिम एशिया में जारी जियो-पॉलिटिकल तनाव की वजह से वित्त वर्ष 2026-27 में वैश्विक तेल मांग में बढ़ोतरी कम रहने की संभावना है. रिलायंस ने कहा कि FY27 के लिए आउटलुक जियो-पॉलिटिकल, मैक्रोइकोनॉमिक और नीतिगत जोखिमों के प्रति ‘बेहद संवेदनशील’ बना हुआ है.

रिफाइनरी और तेल इंफ्रास्ट्रक्चर को हुए नुकसान, जिससे प्रोडक्ट की सप्लाई में कमी आई है, को ठीक होने में ज्यादा समय लगने की संभावना है, जिसके चलते बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव बना रहेगा.

संवेदनशील बना हुआ है आउटलुक

RIL ने कहा, ‘वित्त वर्ष 2026-27 का आउटलुक जियो-पॉलिटिकल, मैक्रोइकोनॉमिक और पॉलिसी से जुड़े जोखिमों के प्रति बेहद संवेदनशील बना हुआ है. कंपनी ने आगे कहा कि पश्चिम एशिया से सप्लाई में रुकावटों के अलावा, घरेलू नीतिगत उपाय, जिनमें भारत सरकार के स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED), पेट्रोकेमिकल फीडस्टॉक के इस्तेमाल और खास पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर ड्यूटी में छूट से जुड़े निर्देश शामिल हैं, घरेलू मांग और रिफाइनिंग मार्जिन पर दबाव डाल सकते हैं.

मटीरियल्स बिजनेस

हालांकि, अनिश्चितता के माहौल के बावजूद RIL ने कहा कि उसे अपने एनर्जी और मटीरियल्स बिजनेस के लिए आगे ‘कई दशकों का अवसर’ दिख रहा है. कंपनी ने कहा, ‘अब हमारा ध्यान पूरी तरह से चालू और इंटीग्रेटेड प्लेटफॉर्म को बेहतर बनाने पर है, जिससे खुद के लिए वैल्यू बने, आर्थिक रूप से आत्मनिर्भरता आए, और ग्रीन केमिकल्स के क्षेत्र में विस्तार हो.’

नैचुरल गैस के बढ़ते महत्व पर जोर

RIL ने भारत की एनर्जी ट्रांजिशन स्ट्रैटेजी में नैचुरल गैस के बढ़ते महत्व पर जोर दिया. कंपनी के अनुसार, जैसे-जैसे देश क्लीनर फ़्यूल अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, भारत के एनर्जी मिक्स में नैचुरल गैस की हिस्सेदारी मौजूदा लगभग 6 फीसदी से बढ़कर 2030 तक 15 फीसदी होने की उम्मीद है.

Reliance ने कहा कि उसका गैस पोर्टफोलियो इस स्ट्रक्चरल बदलाव से फायदा उठाने के लिए अच्छी स्थिति में है, और यह भारत के घरेलू गैस उत्पादन में लगभग 30% का योगदान देता है.

डीपवॉटर और कोल बेड मीथेन

कंपनी को उम्मीद है कि उसके डीपवॉटर और कोल बेड मीथेन (CBM) एसेट्स का लगातार डेवलपमेंट, जिसे मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर और ऑपरेशनल क्षमताओं का समर्थन प्राप्त है, वित्त वर्ष 27 और उसके बाद गैस की सप्लाई बढ़ाने और बढ़ती मांग को पूरा करने में मदद करेगा.

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