कच्चा तेल ने बिगाड़ा रुपये का खेल, डॉलर के मुकाबले 34 पैसे गिरकर 95.08 पर बंद
भारतीय रुपया बुधवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 34 पैसे गिरकर 95.08 पर बंद हुआ. कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने से रुपये पर दबाव बढ़ा. ब्रेंट क्रूड 2.94 फीसदी बढ़कर 100.73 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. कमजोर शेयर बाजार और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने भी रुपये को नुकसान पहुंचाया. सेंसेक्स 813 अंक और निफ्टी 203 अंक गिरा.
Highlights
- कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने से रुपये पर दबाव बढ़ा.
- डॉलर के मुकाबले रुपया 34 पैसे गिरकर 95.08 पर बंद हुआ.
- कमजोर शेयर बाजार और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने भी रुपये की गिरावट बढ़ाई.
भारतीय रुपया बुधवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 34 पैसे कमजोर होकर 95.08 के स्तर पर बंद हुआ. रुपये में गिरावट की बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल रही. ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है. इससे भारत के लिए महंगे आयात और बढ़ती महंगाई की चिंता बढ़ गई है. कमजोर शेयर बाजार और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने भी रुपये पर दबाव बनाया. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने भी बाजार की चिंता बढ़ाई है.
100 डॉलर के पार पहुंचा कच्चा तेल
ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब छह सप्ताह में पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई. बुधवार को ब्रेंट क्रूड 2.94 फीसदी बढ़कर 100.73 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था. पश्चिम एशिया में तेल ठिकानों और जहाजों पर हमलों के बाद तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है. अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने से बाजार में आगे सप्लाई प्रभावित होने की आशंका है. कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर भारत के आयात खर्च पर पड़ सकता है.
95.22 तक फिसला रुपया
इंटरबैंक फॉरेन करेंसी मार्केट में रुपया 94.80 के स्तर पर खुला था. कारोबार के दौरान यह 94.80 के अपने ऊपरी स्तर से गिरकर 95.22 तक पहुंच गया. बाद में रुपये में कुछ सुधार आया और यह 95.08 के स्तर पर बंद हुआ. इससे पिछले कारोबारी सत्र में रुपया 94.74 पर बंद हुआ था. इस तरह बुधवार को रुपये में कुल 34 पैसे की गिरावट दर्ज की गई.
महंगे तेल से बढ़ सकती है महंगाई की चिंता
भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा कच्चा तेल आयात करता है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत बढ़ने से देश का आयात खर्च बढ़ सकता है. इससे व्यापार घाटे और महंगाई पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है. तेल महंगा होने पर पेट्रोल, डीजल और परिवहन से जुड़ी लागत भी प्रभावित हो सकती है. इसी वजह से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी को रुपये के लिए नकारात्मक माना जा रहा है.
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विदेशी निवेशकों की बिकवाली से भी दबाव
रुपये पर विदेशी निवेशकों की बिकवाली का भी दबाव रहा. शेयर बाजार में कमजोर कारोबार के बीच विदेशी संस्थागत निवेशकों ने मंगलवार को भारतीय शेयरों में 123.19 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की. इससे बाजार में डॉलर की मांग बढ़ सकती है और रुपये पर दबाव आ सकता है. बुधवार को घरेलू शेयर बाजार में भी बड़ी गिरावट देखने को मिली. सेंसेक्स 813.35 अंक गिरकर 74,764.23 पर और निफ्टी 203.60 अंक गिरकर 23,431.50 पर बंद हुआ.
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