शंघाई एक्सचेंज में चांदी का भंडार 10 साल के निचले स्तर पर पहुंचा, जानें कीमतें होंगी धड़ाम या आएगी तेजी

शंघाई फ्यूचर्स एक्सचेंज (SHFE) पर चांदी का स्टॉक करीब 10 साल के निचले स्तर पर आ गया है जिससे वैश्विक सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है और कीमतों को मध्यम अवधि में सपोर्ट मिल सकता है. एक्सपर्ट के मुताबिक, मजबूत औद्योगिक मांग और सीमित सप्लाई के कारण चांदी का आउटलुक सकारात्मक है. 80 डॉलर प्रति औंस के ऊपर टिकने पर कीमतें 85-88 डॉलर तक जा सकती हैं, जबकि 77.20 डॉलर अहम सपोर्ट है.

सिल्वर Image Credit: canva

वैश्विक कमोडिटी बाजार में चांदी को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है. शंघाई फ्यूचर्स एक्सचेंज (SHFE) पर चांदी का स्टॉक लगभग एक दशक के निचले स्तर पर पहुंच गया है जिससे सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं. आइये जानते हैं कि इसका चांदी की कीमतों पर क्या असर पड़ सकता है.

कितना रह गया है स्टॉक

ताजा आंकड़ों के मुताबिक, SHFE पर डिलीवरी के लिए उपलब्ध चांदी का स्टॉक घटकर करीब 350 टन रह गया है, जो 2015 के बाद का सबसे निचला स्तर है. CEIC डेटा के अनुसार, 9 फरवरी 2026 तक चांदी का स्टॉक 318.5 टन रह गया, जबकि 6 फरवरी को यह 349.9 टन था. यानी कुछ ही दिनों में तेज गिरावट दर्ज की गई है. 2021 में यह स्टॉक 3,091 टन के रिकॉर्ड स्तर पर था जिसके मुकाबले अब इसमें 88% से ज्यादा की कमी आ चुकी है.

क्या हैं कारण

2025 में चीन से लंदन की ओर भारी मात्रा में चांदी का निर्यात होने से स्थानीय स्टॉक तेजी से घटा है. इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में फिजिकल सप्लाई का दबाव कुछ कम हुआ लेकिन चीन के घरेलू बाजार में कमी और बढ़ गई. चीन इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर एनर्जी और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स जैसे सेक्टर में चांदी का बड़ा उपभोक्ता है जिससे औद्योगिक मांग लगातार मजबूत बनी हुई है.

क्या बोले एक्सपर्ट

केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर अजय केडिया ने Money9 को बताया कि हाई वोलैटिलिटी और अत्यधिक सट्टेबाजी पर काबू पाने के लिए SHFE ने सिल्वर कॉन्ट्रैक्ट्स पर मार्जिन आवश्यकताएं बढ़ा दी हैं. इससे लीवरेज पोजीशनों में कटौती देखने को मिली, लेकिन फिजिकल सप्लाई की कमी के कारण कीमतें अब भी मजबूती से बनी हुई हैं. फरवरी 2026 के SHFE सिल्वर कॉन्ट्रैक्ट में इस महीने करीब 13% की तेजी देखी गई है और हालिया करेक्शन के बाद इसमें मजबूत रिकवरी आई है.

अजय केडिया का कहना है कि एक्सचेंज के वेयरहाउस में नई चांदी की एंट्री नहीं हो रही है, जबकि सोलर और इलेक्ट्रिक व्हीकल सेक्टर से मांग लगातार मजबूत बनी हुई है. इसके अलावा COMEX के मुकाबले चीन में चांदी का प्रीमियम असामान्य रूप से ज्यादा है जिससे इंपोर्ट महंगा पड़ रहा है और सप्लाई का ईजी फ्लो ब्लॉक हो रहा है.

कीमतों पर क्या असर

अजय केडिया के मुताबिक, एक्सचेंज द्वारा उठाए गए कदम शॉर्ट टर्म में उतार-चढ़ाव को कुछ हद तक कम कर सकते हैं लेकिन फिजिकल सप्लाई पर दबाव अब भी वास्तविक है. ऐसे में चांदी की कीमतों को मध्यम अवधि में सपोर्ट मिलता रह सकता है, क्योंकि मांग मजबूत और उपलब्ध स्टॉक सीमित बना हुआ है.

वहीं, केडिया एडवाइजरी के अमित गुप्ता ने कहा कि चांदी की कीमतों के लिए मौजूदा हालात सपोर्टिव बने हुए हैं. अगर चांदी की कीमत 80 डॉलर प्रति औंस के ऊपर टिककर मजबूती दिखाती है, तो इसमें आगे 85 से 88 डॉलर के स्तर तक जाने की संभावना बन सकती है. वहीं 77.20 डॉलर का स्तर फिलहाल अहम सपोर्ट के रूप में देखा जा रहा है. इस स्तर के ऊपर बने रहने से बाजार में तेजी का रुख बरकरार रह सकता है.

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